पानी की समश्या का भयानक भविष्य

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पानी की कीमत का अंदाजा नहीं लगा पा रहे भारत के लोगों ने अगर पानी का मोल जल्द ही नहीं समझा तो वर्ष 2020 तक देश में जल की समस्या विकराल रूप ले सकती है।
देश में पानी की उपलब्धता की खराब होती स्थिति गम्भीर चिंता का विषय बनी हुई है और एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2020 तक पानी की उपलब्धता प्रति व्यक्ति एक हजार क्यूबिक मीटर से भी कम रह जाएगी
तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़े जाने की आशंकाओं के बीच भारत में जलस्रोतों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है नतीजतन कई राज्य पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। पानी के इस्तेमाल के प्रति लोगों की लापरवाही अगर बरकरार रही तो भविष्य में इसके गम्भीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
यहाँ एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किए गए अध्ययन पत्र में इस चिंता को व्यक्त करते हुए बताया गया कि देश में 85 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल खेती के लिए, 10 फीसदी जल का प्रयोग उद्योगों में तथा पाँच प्रतिशत पानी घरेलू कामों में इस्तेमाल किया जाता है।
विश्व बैंक के एक अध्ययन का जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया है कि 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 27 एशियाई शहरों में चेन्नई और दिल्ली पानी की उपलब्धता के मामले में सबसे खराब स्थिति वाले महानगर हैं। इस फेहरिस्त में मुम्बई दूसरे स्थान पर जबकि कोलकाता चौथी पायदान पर है।

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