ऑस्कर की रेस में गुजराती फिल्म : द गुड रोड

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मार्च, 2014 में आयोजित होने वाले ऑस्कर में भारत की तरफ से इस बार एक गुजराती फिल्म द गुड रोड को चुना गया है. इस फिल्म के निर्देशक ज्ञान कोरिया हैं. द गुड रोड पहली गुजराती फिल्म है, जिसे ऑस्कर पुरस्कार के लिए चुना गया है. इसकी अधिकांश शूटिंग गुजरात के कच्छ ज़िले में हुई है. द गुड रोड साल की शुरुआत में ही सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है. इसमें सोनाली कुलकर्णी और अजय गेही सरीखे कलाकार हैं. हालांकि इस फिल्म को लेकर विवाद भी चल रहा है. माना जा रहा है कि इस फिल्म में गुजरात की जो तस्वीर पेश की गई है, असल में वह वैसा है नहीं. फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) द्वारा गठित चयन समिति के अध्यक्ष, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता गौतम घोष के मुताबिक, नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएफडीसी) द्वारा प्रस्तुत द गुड रोड का चयन, सर्वसम्मति से लिया गया एक निर्णय था. 19 सदस्यीय ज्यूरी ने सर्वसम्मति से इसे चुना. ज्यूरी के सदस्यों के बीच फिल्म का चयन करने के लिए पांच घंटे तक विचार-विमर्श चला.

इस साल ऑस्कर के चुनाव के लिए पूरे देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 22 फिल्मों ने आवेदन किया था, लेकिन इसमें द गुड रोड ने बाज़ी मार ली. द गुड रोड में तीन अलग-अलग लोगों की कहानियां हैं. द गुड रोड की ख़ास विशेषता इसके किरदार ही हैं. पूरी फिल्म की कहानी दो ऐसे बच्चों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कच्छ में खो गए हैं. इसमें अहम भूमिका है ट्रक डाइवर पप्पू की, जो उन्हें उनके घरवालों से मिलाता है. यानी ट्रक ड्राइवर ही फिल्म का हीरो है. हालांकि ऑस्कर के लिए इस फिल्म के चुनाव को लेकर आम सहमति नहीं है. कुछ लोग इस निर्णय से भड़के भी हुए हैं. खासतौर पर ऐसे लोग जो भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए कुछ अन्य फिल्मों के चुने जाने की उम्मीद कर रहे थे. फिल्म लंच बॉक्स के को-प्रोड्यूसर अनुराग कश्यप भी इस ़फैसले से काफ़ी नाराज़ दिखे. उन्होंने ट्विटर पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर अपनी नाराज़गी का इज़हार किया. उन्होंने ट्वीट किया कि ऑस्कर के लिए किसी मूवी को भेजने के लिए हमें स्पष्ट नीति बनानी चाहिए. अगर आप बेस्ट फिल्म भेजना चाहते हैं तो नेशनल अवॉर्ड विनर मूवी को भेजिए. नहीं तो उसे भेजिए, जिसके जीतने की संभावना ज़्यादा है. कश्यप ने लिखा कि वह पहली बार उत्साहित थे, क्योंकि हमें पता था कि हमारे पास चांस है. उन्होंने कहा कि अब वह निराशा में डूबा हुआ महसूस कर रहे हैं और उनका फूट-फूट कर रोने का मन हो रहा है. वहीं फिल्म के डायरेक्टर रितेश बत्रा के साथ-साथ प्रेजेंटर करण जौहर ने भी नाराज़गी का इज़हार किया. बत्रा ने फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से नियुक्त समिति पर आरोप लगाया है कि उसमें समझ की कमी है. समिति के अध्यक्ष बंगाली फिल्म निर्माता गौतम घोष हैं.

रेस में पीछे छूटीं ये फिल्में

द गुड रोड के साथ भाग मिल्खा भाग, इंग्लिश विंग्लिश, विश्‍वरूपम, मलयालम फिल्म सेल्युलाइड और बांग्ला फिल्म शब्दो भी ऑस्कर के दौड़ में शामिल थीं. हालांकि चयनकर्ताओं को द लंच बॉक्स भी काफ़ी पसंद आई, लेकिन इनमें चुना गया द गुड रोड को.

ऑस्कर में अब तक बॉलीवुड की तीन फिल्में

100 साल के सिनेमा के इतिहास में अब तक बॉलीवुड की मात्र तीन फिल्में ही चुनी गईं. इनमें से एक है महबूब ख़ान के निर्देशन में बनी फिल्म मदर इंडिया (1957), मीरा नायर की सलाम बांबे (1988) और आशुतोष गोवारिकर की लगान (2001).

पाकिस्तानी फिल्म ज़िंदा भाग का भारत कनेक्शन

Zinda-Bhaag-lollywood-movieपाकिस्तान की ओर से ऑस्कर के लिए फिल्म ज़िंदा भाग भेजी गई है. इस फिल्म का गहरा कनेक्शन भारत से है. पाकिस्तान की तरफ़ से 50 साल से भी ज़्यादा समय के बाद ऑस्कर में भेजी जाने वाली यह पहली फिल्म है. फिल्म में न स़िर्फ नसीरुद्दीन शाह प्रमुख भूमिका में हैं, बल्कि इसके तकनीकी दल के ज़्यादातर सदस्य भी भारतीय हैं. फिल्म की अधिकतर एडिटिंग मुंबई के प्रसाद फिल्म लैब में की गई. फिल्म के संपादक शाह मुहम्मद हैं, जो निर्देशक और कोरियोग्राफर फराह ख़ान की आने वाली फिल्म हैप्पी न्यू ईयर की भी एडिटिंग कर रहे हैं. इसके सिनेमेटोग्राफर सत्यराय नागपाल हैं, जिन्हें पिछले साल पंजाबी फिल्म अन्हे घोड़े द दान के लिए सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. फिल्म के साउंड डिजाइनर विपिन भट्ट हैं, जिन्होंने नागेश कुकुनूर की कई फिल्मों में काम किया है. ख़ास बात यह है कि इस फिल्म की शूटिंग नसीर ने लाहौर में गुपचुप तरी़के से की थी. यही नहीं उन्होंने नये कलाकारों के लिए एक हफ्ते की वर्कशॉप भी आयोजित की थी. पंजाबी-उर्दू में बनी इस फिल्म की निर्देशक फरजाद नबी और मीनू गौड़ हैं. फिल्म की कहानी तीन ऐसे युवकों के ईद-गिर्द घूमती है, जो विदेश जाना चाहते हैं.

कामयाबी एक खूबसूरत हसीना की तरह है: शाहिद कपूर

shahid-kapoor3वैसे तो अभिनेता शाहिद कपूर ने कई फिल्मों में काम किया है, लेकिन उन्हें विवाह और जब वी मेट जैसी फिल्मों से  सफलता मिली. पर बाद में धीरे-धीरे उनके करियर का ग्राफ गिरता ही गया, लेकिन हाल ही आई उनकी फिल्म फटा पोस्टर निकला हीरो, ने उन्हें एक बार फिर हीरो बना दिया है. जी हां, यह एक शुद्ध मनोरंजक फिल्म है. इस फिल्म में शाहिद ने अपना लुक चेंज किया है, जिसे काफ़ी पसंद किया जा रहा है. अपनी असफल फिल्मों के बार में वह कहते हैं कि मैंने हर फिल्म में अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ किया. बॉक्स-ऑफिस पर अगर फिल्म हिट कराने का कोई पैरामीटर होता, तो हर फिल्म मेकर फिल्म बनाने से पहले इसी पैरामीटर पर अपनी फिल्म बनाता. शाहिद कहते हैं कि मौसम और तेरी मेरी कहानी के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी. इन फिल्मों का सब्जेक्ट आम फिल्मों से कुछ अलग और नया था. इसके बावजूद इन फिल्मों को दर्शकों ने रिजेक्ट कर दिया, तो जरूर कुछ  खामियां रही होंगी. पिता पंकज कपूर ने बेटे के करियर को संवारने की ख़ातिर ब़डी अरमानों से फिल्म मौसम बनाया था, लेकिन यह फिल्म सुपर फ्लॉप रही. इस बारे में शाहिद कहते हैं कि फिल्म की ज्यादा लंबाई और इंटरवल के बाद कहानी का ट्विस्ट दर्शकों की बड़ी क्लास को पसंद नहीं आया, जबकि आज कल लोग तीन-चार महीनों में फिल्में बना लेते हैं, वहीं डैड को मौसम बनाने में क़रीब दो साल लगे. यह फिल्म क़रीब साढ़े तीन घंटे से ज़्यादा की है. डैड फाइनल एडिटिंग में कोई सीन कटवाना नहीं चाहते थे, दूसरी ओर डिस्ट्रिब्यूटर्स ढाई घंटे की फिल्म चाहते थे. फिर भी तीन घंटे से कुछ ज़्यादा अवधि की फिल्म फाइनल की गई. शाहिद कहते हैं कि मौसम जब तक पूरी नहीं हुई, तब तक उन्होंने कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की. वह कहते हैं कि हालांकि इस फिल्म की नाकामयाबी का उनसे ज़्यादा शॉक उनके डैड को लगा. शाहिद अपनी नाक़ामयाब फिल्मों के बारे में कहते हैं कि वह कामयाबी को एक ख़ूबसूरत हसीना समझते हैं. इस हसीना का मिजाज किसी के साथ कभी भी एक जैसा नहीं रहता. हालांकि वह यह भी मानते हैं कि करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बहुत गलतियां कीं. पहली ही फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया. उन्हें खुद पर इतना ओवर कॉन्फिडेंस था कि करियर के शुरुआती दौर में जब मुझे उन्हें खूब काम करना चाहिए था, तब वह फिल्मों को लेकर काफी चूजी हो गए. हर महीने तीन-चार फिल्मों की स्क्रिप्ट रिजेक्ट करते. वह कहते हैं कि अब उन्होंने अपनी ग़लतियों से सिख लिया है. फटा पोस्टर के बाद वह जल्द ही प्रभु देवा की रैंबो राजकुमार में नजर आएंगे.

कंगना ने वेबसाइट लॉन्च की

kangana-ranaut-HDकंट्रोवर्सी ऐंड ट्रैंट्रम क्वीन कंगना रनावत इन दिनों सेल्फ प्रमोशन में जुट गई हैं. ट्वीटर या फेसबुक पर समय देने की बजाय उन्होंने अपनी वेबसाइट लॉन्च कर लिया है. इस बारे में वह कहती हैं कि वह अब पहले से ज़्यादा करियर को लेकर सजग हो गई हैं. दरअसल ट्विटर और फेसबुक ज़्यादा टाइम टेकिंग हैं, ऐसे में उन्हें वेबसाइट लॉन्च करना ज़्यादा बेहतर लगा. वह मानती हैं कि आज तक उनके और उनके फैंस के बीच कम्युनिकेशन का कोई सही ज़रिया नहीं था. उनके नाम पर इतने सारे अकाउंट्स हैं और उससे उनके प्रशंसक मिसलीड होते रहते हैं. ऐसे में उन्हें लगा कि उनसे जुड़ी जानकारी सही माध्यम से बाहर नहीं जा पा रही हैं, इसलिए उन्होंने अपनी वेबसाइट लॉन्च करने की योजना बनाई. साथ ही वह यह भी कहती हैं कि उनकी इमेज चाहे जैसी भी बन गई हो, लेकिन उनमें काफ़ी पैशन है अपने काम को लेकर, तभी वह यहां तक पहुंची हैं. चाहे लोग जो भी सोचें, पर सच तो यह हैं कि असल जीवन में भी वह फैमिली वैल्यूज में यकीन करने वाली लड़की हैं. उन्हें अपने भाई-बहन का साथ बहुत पसंद है. उनके साथ वह ख़ुद को ज़्यादा सिक्योर फील करती हैं. हालांकि वह खुद को एक करियर ओरिएंटेड औरत मानती हैं. वह यह भी स्वीकार करती हैं कि उनका स्वभाव थोड़ा जिद्दी और आयिडयल है. उन्हें कई बार बहुत ग़ुस्सा आ जाता है. पर वह हमेशा अपने दिल की सुनती हैं, वह बचपन से ही ऐसी हैं.  कंगना कहती हैं कि लोग इसे बुरा मानते हैं, लेकिन उनका जिद्दी मिजाज ही उन्हें इस मुक़ाम तक लाया है. यही बदतमीजियां और जिद उन्होंने अपने पिता के घर में की, जिससे आज वह यहां हैं. फैशन, तनु वेड्स मनु जैसी परफॉर्मेंस प्रधान रोल्स करने के बाद रास्कल्स और डबल धमाल जैसी शो पीस वाली फिल्म करने की वजह कंगना बताती हैं कि दरअसल यह इंडस्ट्री काफ़ी असुरक्षित जगह है. कई बार आप इनसिक्योर होकर, तो कई दफा पैसों के लिए ऐसे रोल कर जाते हैं, जिन्हें लेकर आप खुद भी खुश नहीं होते. पर एक बार करके उन्होंने जान लिया है कि उन पर ऐसे रोल नहीं जमते. उन्हें ख़ास तरह के रोल ही करने होंगे.

 प्रीव्यू: अग्ली

maxresdefaultफ्रायडे, देव डी और गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 1 और पार्ट 2 जैसी सफल फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप की अगली फिल्म है अग्ली. फैंटम और डीएआर मोशन पिक्चर्स के संयुक्त बैनर तले बनी यह फिल्म मनोवैज्ञानिक थ्रिलर और भावनात्मक है. यह फिल्म एक ऐसी बच्ची पर आधारित है, जिसे पैसों के लिए अगवा कर लिया जाता है और उसका पिता पुलिस की मदद से उसे हासिल करने की कोशिश करता है. एक के बाद एक घटती घटनाओं के बाद शक़ की सूई बच्ची के पिता की तरफ ही घूमती है. अनुराग कश्यप द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म अगली का ट्रेलर बेहद रोमांच और सस्पेंस से भरपूर है. इस फिल्म में रोनित रॉय एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. ठीक इसी तरह का किरदार अक्षय कुमार की फिल्म बॉस में भी उन्होंने अदा किया है. इस फिल्म के ज़रिये मराठी अभिनेता गिरीश कुलकुर्णी भी बॉलीवुड में क़दम रखने जा रहे हैं. उम्मीद है अनुराग की अन्य फिल्मों की तरह यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करेगी.

डायरेक्टर  :       अनुराग कश्यप

प्रोड्यूसर  :       फैंटम फिल्म्स ऐंड डीएआर मोशन पिक्चर्स

स्टार कास्ट        : राहुल भट्ट, रॉनित रॉय, गिरीश कुलकुर्णी,तेजस्विनी कोल्हापुरी, विनीत कुमार सिंह,विपिन शर्मा एवं सुरवीन चावला

संगीत    :       जीवी प्रकाश कुमार

रिलीज डेट :       11 अक्टूबर, 2013

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