क्या #JNU प्रकरण बहस करने लायक है!

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आज भारत देश में देशद्रोह क्या होता है उसपे लोग बहस करने लगे हैं,
क्या देशद्रोह परिभाषित करने लायक विषय है?
आज राहुल गांधी jnu जा कर उन देशद्रोही छात्रो के पक्ष में बोल के आते है और उसी पार्टी के नेता उनको सही ठहराने के लिए जाने क्या क्या बोले जा रहे हैं।
क्या ये शर्मनाक मुद्दा नही है भारत देश के लिए.
मुझे लगा देशद्रोही छात्रो ने प्रकरण के सामने आने पर सारे नेता कम से कम इस मुद्दे पर तो एकजूट होंगे लेकिन नरेंद्र मोदी जी के विरोध में विपक्ष इस कदर अँधा हो जायेगा के देसद्रोह जैसे मुद्दे को सही साबित करने के लिए बहस और डिबेट होने लगेंगे।
जो उन देसद्रोहि छात्रो को समर्थन दे रहे हैं क्या उन्हें भी देशद्रोही घोसित नही कर देना छाहिये।
मुझे नही लगता देशद्रोह जैसी चीज को हम परिभाषित करें। और कहीं से भी इसे बोलने की आजादी से जोड़ कर सही साबित करने की कोसिस करना सही है।
क्या हम इतने आजाद हो गए हैं के खुद के देश में ही रह कर इसके ही खिलाफ खड़े हो जाये।
अंदरुनी तौर पे हमारे विचार अलग हो सकते है उन देशद्रोही छात्रो का अफज़ल के पक्ष में नारा लगाना, क्या ये इस तरह से नही है के मुम्बई ब्लास्ट सही था, या संसद भवन में विस्फोट सही था या हर एक ब्लास्ट सही था आतंकवादियों द्वारा भारत में।
और अगर आप इन चीजो को सही ठहरा रहे हैं तो काहे का आप को भारतीय कहा जा सकता है।

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क्या ये वही राहुल गांधी है जो कभी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे, क्या यही उनकी सच्चाई है?।
मुझे लगता है ये एक अच्छा सवाल है।
हालाँकि मैंने भी पहचान लिया है खुद को के भारतीय कैसे होते है, खुद भी हूँ इसलिए पता है के होगा कुछ नही।
मेरे मन में सवाल ये है के किसी भी कांग्रेस के णरत के पास उन देशद्रोही छात्रो के समर्थन में बोलने की क्षमता आई कैसे, वजह है के वो किसी पद पे हैं मतलब जनता का एक बड़ा वर्ग उन्हें समर्थन देता है। अगर हमारा समर्थन उन्हें नही होता तो क्या वो ऐसे बयान दे पाते । तो कही न कही तो हम खुद भी जिम्मेदार है ही। जो ये वामपंथी और कांग्रेसी सब jnu पे इकठ्ठा हो कर हल्ला मचाये हुए हैं। अब देखना ये है के वो बन्दा कन्हैया जो की इन छात्रो का नेता है जेल से छूटता है या नही।
और भाई अगर वो छूट गया तो आँख बंद कर लीजियेगा और अपने अंदर के देशभक्त को नमक-पानी पिला दीजियेगा।
शायद उबाल न मारे जिस तरह से मेरा मन कर रहा है के उस कन्हैया का बाल नोच लूँ।
ये बोलते हैं के “कितने अफज़ल मारोगे हर घर से अफज़ल निकलेगा” तो तुम्हारे लिए ये जवाब है के “हर उस घर में घुस कर मारेँगे, जिस घर से अफज़ल निकलेगा” ये लाइन मैंने फेसबुक पे पढ़ी थी जो उनके लिए अच्छी लगी।

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