Freedom not for name..

Freedom not for name..

वे नाम के लिए नहीं लड़े थे ,…
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बीता कल इतिहास बन जाता है I उसी बीते कल के ध्वंसावशेषों के बीच पहुँच मै आज के लिए कुछ तलाश रहा था I रुइया गढ़ी और उसके वीर राजा नरपत सिंह की विजय गाथा की 159वीं वर्षगाँठ पर मै इतिहास के पन्नों में नरपत सिंह का नाम तलाशता रहा I राजा नरपत सिंह की रुइया गढ़ी हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर माधौगंज के पास है I यह तो आज की स्थिति में उस स्थान तक जाने का रास्ता है पर इतिहास के उस कालखंड में न तो हरदोई जिला मुख्यालय था और न कोई अपनी पहचान उस काल खंड में रखता था I शायद इसी लिए आज हरदोई के अधिकांश लोग इतिहास के उन नामों की कोई खास पहचान नहीं रखते है जिनके नाम से आज हरदोई का इतिहास में नाम बना है I
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हरदोई गजेटियर और फ्रीडम स्ट्रगल इन उत्तर प्रदेश के पन्नों को खंगालने वालों को राजा नरपत सिंह की वीरगाथा विस्तार से दर्ज मिल जायगी I मैं उसे यहाँ दोहराना नहीं चाहूँगा पर एक सार संक्षेप में इतना ही कहूंगा कि वीर राजा नरपत सिंह आजादी का वो दीवाना था जिसने अंग्रेज और उनकी सेना के कब्जे से अपनी रुइया गढ़ी को अपने जीते जी आजाद ही रखा और अंगरेजी सेना को दूर दूर तक जाकर धूल चटाई I ब्रिग्रेडियर होप जो तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य की महारानी का नजदीकी रिश्तेदार था , उसे राजा नरपत सिंह ने उसके 55 सैनिकों के साथ मार गिराया था I

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इतिहास के पन्नों में आजादी की इस लड़ाई को लेकर वीर राजा नरपत सिंह की जीत की तारीख 15 अप्रैल 1888 दर्ज है और रुइयागढ़ी स्मारक समिति ने इस तारीख की याद करते हुए बीते कल  विजय दिवस के नाम से एक आयोजन रखा जिसमें कुछ स्थानीय लोंगों के अलावा कुछ और नामचीन लोगों ने शिरकत की I इसे मै आज यहाँ इसलिए संदर्भित कर रहा हूँ कि आज देशभक्ति की नयी परिभाषाएं गढ़ी जा रही है I राष्ट्रवाद और भारतमाता की जय का उद्दघोष कुछ दिलों में उफान मार रहा है  और देशभक्तों की सूची में अपना नाम सबसे आगे दर्ज करवाने का उतावलापन  है I
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आज नाम के लिए आपस में ही लड़ने वाले ज़रा इस बात पर गौर करें कि “वे नाम के लिए नहीं लड़े थे” I आज उनके नाम को याद करने का वक्त आपके पास नहीं है I आयोजकों ने अपने भरसक प्रयास किये कि राष्ट्रवाद के उफान मार रहे इस दौर में ज्यादा से ज्यादा लोग पहुँच कर आयोजन को सफल बनाए पर कम से कम लोग पहुँचे I एक मांग रुइया गढ़ी और वीर राजा नरपत सिंह की  वीरगाथा को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए उस आयोजन से निकली है कि इस स्थान को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाय I इस पोस्ट को पढ़ने वालों से गुजारिश है कि इस मांग के समर्थन में उनसे जो बन सकता हो वो करने की एक कोशिश जरुर करें I
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#भारत_माता_की_जय
साभार श्री राकेश पाण्डेय हरदोई

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