बिजली अभियंताओं ने राष्ट्रीय ऊर्जा नीति और टैरिफ में बदलाव की उठाई मांग

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ऑल इंडिया पॉवर  इन्जीनियर्स फेडरेशन ने हाल ही में जारी किये गए राष्ट्रीय  ऊर्जा नीति और टैरिफ नीति के मसौदे में व्यापक  बदलाव की मांग की है। फेडरेशन  का कहना है कि बिजली कंपनियों के एकीकरण और  निजी घरानों को लाभ देने के लिए सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बंद किया जाए जाये।

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बातचीत में बताया कि जम्मू में हुई फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है  कि सभी राज्यों में बिजली कंपनियों के एकीकरण और निजी घरानों के साथ किये गए महंगी बिजली खरीद के करारों को रद्द कराने एवं सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बंद होने से रोकने के लिए सभी कर्मचारी संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा।

बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह विफल हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र की बेहतरी के लिए सभी राज्यों में बिजली निगमों को एकीकृत किया जाना आवश्यक है, जिससे बिजली प्रणाली का सुचारु रूप  से संचालन किया जा सके और अनावश्यक प्रशासनिक खर्चों में कटौती होने से उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सके ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में देश के सभी बिजली बोर्डों का कुल घाटा 23, हजार करोड़ रुपये  था जो अब 09 लाख करोड़ रुपये ( घाटा और कर्ज ) से अधिक हो चुका है जो विघटन के दुष्परिणामों का नतीजा है । निजी घरानों के साथ किये गए महंगी बिजली खरीद के करारों की पुनर्समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जाना चाहिए और निजी क्षेत्र से बिजली खरीदने के लिए सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बंद नहीं किया जाना चाहिए। फेडरेशन ने कहा है कि सरकारी क्षेत्र के पुराने बिजली घरों को बंद करने के स्थान पर उन्हें नए सुपर क्रिटिकल बिजली घरों में परिवर्तित किया जाना चाहिए, जिसमें नए बिजली घरों की तुलना में काफी कम लागत आएगी और इनकी बिजली उत्पादन लागत भी कम होगी ।

फेडरेशन ने सोलर बिजली उत्पादन का स्वागत करते हुए कहा है कि नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी में परिवर्तन किया जाए, जिससे कुल जरूरत का 20 प्रतिशत ही सोलर ऊर्जा हो और सरकारी क्षेत्र के ताप बिजली घरों को संचालित किया जा सके। देश में वर्तमान में बिजली की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 330000 मेगावाट है, जबकि अधिकतम मांग मात्र 158000 मेगावाट है। देश के 30 करोड़ लोग आज भी बिजली से वंचित हैं तो यह केंद्र सरकार की दोषपूर्ण ऊर्जा नीति का ही नतीजा है, जिसमें बदलाव की जरूरत है ।

दुबे ने कहा कि बिजली कंपनियों के एकीकरण, निजी घरानों के साथ किये गए बिजली करार रद्द करने, सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बंद न करने, नेशनल इलेक्ट्रिसिटी और टैरिफ पॉलिसी के मसौदे में बदलाव करने, केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण को सशक्त बनाने आदि विषयों पर केंद्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल से चर्चा की मांग की है। यदि केंद्र सरकार ने निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की ऊर्जा नीति में परिवर्तन न किया तो ऑल इंडिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन देश के तमाम बिजली कामगार संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा।

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