माननीय श्रीमान केजरीवाल जी पर विशेष

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माननीय श्रीमान केजरीवाल जी पर विशेष :

बड़े अरसे से दिल में ये चाहत थी कि केजरीवाल जी के विषय में अपने विचारों को पंक्तिबद्ध किया जाये …इन पर एक गद्य रचना का स्वाद खुद भी चखा जाये….

‘परिवर्तन’ नाम के एक अच्छे NGO के संचालक , RTI कार्यकर्ता , Magsaysay award winner अरविंद केजरीवाल का नाम मैग्ज़ीन में बड़े सम्मान से कई बार पढ़ा था ,याद भी किया था तत्पश्चात साक्षात् इन्हें ‘जन लोकपाल आंदोलन’ के दौरान देखा ,निस्संदेह प्रभावित भी हुए बाद में इनके लिए mobile पर voting भी की….उम्मीद थी कि देश की राजनीति में भी ये अपनी सकारात्मक और प्रभावशाली भूमिका का प्रदर्शन करेंगे और राजनीतिक गंदगी की सफाई में मददगार साबित होंगे

परंतु इनकी असली भूमिका तो अभी आनी शेष थी ….

ये वे महानुभाव हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी का सफर तो ऊँचाईयों से शुरू किया परन्तु अब निरंतर गर्त की ओर गतिमान हैं और खुशफहमी रखते हैं कि इन्हीं से भारतीय राजनीति का कल निरधारित होगा …इस भ्रम में जीते हैं कि ये जनता की आवाज हैं और ये जन नेता की महत्वपूर्ण भूमिका में हैं…इनके अनुसार इनसे बड़ा ईमानदार कोई हुआ ही नहीं है और होना भी नहीं चाहिये ,..ये सब पर आरोप लगा सकते हैं पर अगर इन पर आरोप लगे तो वो media और विपक्ष की बहुत बड़ी साजिश होती है……ये बेचारे बहुत कु्छ करना चाहते हैं (चाहते हैं या चाहना दिखाते हैं पता नहीं ) पर इनके अनुसार कोई इन्हे कुछ करने ही नहीं दे रहा …इसलिये बेचारे अपने वीडियो टेप द्वारा अपने explanations देना कभी नहीं भूलते, इनके अनुसार सारी राजनीति और media ने इन्हे ही target किया हुआ है , ये ये प्रदर्शित करना कभी नहीं भूलते कि हर बड़े राजनेता को इनका डर है , किसी बड़ी ceremony या public meetings में खुद के looks से कभी भी compromise नहीं करते…वही चप्पल, वही मफलर, वही trouser से बाहर निकली shirt …के माध्यम से आम आदमी को जतलाना चाहते हैं कि मैं तुम में से ही एक हूँ .. वाकई बहुत बड़े वाले नेता बन चुके हैं ये…

केजरीवाल जी के व्यक्तित्व में कुछ खास बातें विशेष तौर पर नज़र आती हैं :

(1) सदा ही अपनी अकर्मण्यता के लिये दूसरे को दोषी ठहराना और कहना कि वे बाधायें उत्पन्न कर रहे हैं इसलिये हम काम नहीं कर पा रहे ।

– अब देखिये ना अपनी बहुत बड़ी वाली चुनावी हार से सबक लेने या कुछ सीखने के बजाय कैसे ये उच्च शिक्षा प्राप्त बेचारे भोले भाले मुख्यमंत्री साहब सारा ध्यान बस अत्यंत ही ईमानदार छवि की धारक (रुको ना भाई मुँह बंद करके पहले हँस लूं ज़रा ) बहन मायावती द्वारा कागज़ से पढ़- पढ़ कर उठाये गये EVM fraud के मुद्दे को हवा देने पर लगा रहे थे ताकि आगे आने वाली हारों की श्रंखला के लिये जवाब तैयार किया जा सके ।

(2) इनकी राजनीति में इतनी शीघ्रता से परिपक्वता आयी कि अच्छे अच्छे मात खा गये… :

(क ) vote bank पर इनका पूर्ण focus देखने लायक है ….इनके visit और हमदर्दी जताने वाली गतिविधियां इसके साक्ष्य हैं , वरना अन्यत्र तो ये झांकते तक नहीं ।

(ख) अपनी प्रारम्भिक दर्शायी गयी विचारधारा के बिल्कुल उलट काम, व्यवहार,आचार और प्रचार करना तो इन्होंने इतनी शीघ्रता से सीखा कि अच्छे अच्छे दांतों तले ऊँगली दबा गये ….हाय लालू जी के साथ कितने प्रेम से भरत मिलाप हुआ था मैं तो अभी तक नहीं भूल पायी …दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है ये सबक तो उन्होंने राजनीति में आते ही सारी उच्च आदर्शों वाली बातों को छोड़कर तुरंत ही सीख लिया था …

(ग) अभी हाल की ख़बर तो बहुत ही मज़ेदार निकली ….इनके द्वारा जनता के धन को detective agency खोलने में लगाना साथ ही अपने खास लोगों की जासूसी की कोशिश करना इनके राजनीतिक आदर्शों , अभिलाषाओं और मंशाओं की उस स्तिथी का द्योतक है जिसमें वे पूरी तरह कीचड़ में नहाये नज़र आ रहे हैं..
या फिर कहीं मुख्यमंत्री साहब दिमागी तौर पर कुछ बीमार तो नहीं …???? या फिर शायद चाटुकारों की फौज थोड़ी कम पड़ने लगी…और मुख्यमंत्री साहब से किसी ने कुछ सवाल करने की हिमाकत कर ली …???

(3) अत्यंत ही विरोधाभासी व्यक्तित्व के धनी हैं केजरीवाल जी …… :

(क) अब किसी भी आम जन की सोच से परे था कि नोटबन्दी पर अरविन्द केजरीवाल क्यों मरे जा रहे थे… जनता बेचारी परेशान थी बहुत परेशान थी पर आशा में थी …वैसे ही जैसे ‘जन लोकपाल आन्दोलन ‘ के दौरान परेशान होकर भी किसी नवीन की आशा में खुश थी ….

(ख) हाल की चर्चाओं में छायी रहीं विभिन्न audit reports भी उनकी बेईमानी से परिपूर्ण मंशा और उनके दोगलेपन को उजागर करने का अच्छा जरिया रहीं …

अरविन्द जी आपको ये समझना होगा कि आन्दोलन अगर किसी परिवर्तन के स्तर पर उतरने लगे तो दुखी नहीं हुआ करते वरन् थोड़ी सी पुरानी सहेजी हुयी ईमानदारी बची हुयी हो तो इसके लिये खुश हो जाइये, भविष्य किसी ने भी नहीं देखा | उच्च राजनीतिक आदर्शों की आशा मुझ जैसे कई बेवकूफों ने आपसे की थी …पर आपकी गतिविधियों नें वाकई ना जाने कितनों को हताश किया साथ ही भविष्य के लिये सचेत भी किया कि भईया बड़ी बड़ी बातें नहीं , बड़े बड़े कामों से और सोच से देश बदलता है …..! जय हिन्द

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