हरियाणा में 55% जमीनें जाटों की , गुजरात में 25लाख पटेल करोड़पति फिर भी रिजर्वेशन की मांग क्यों

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>पानीपत/अहमदाबाद. ओबीसी कैटेगरी में रिजर्वेशन की मांग को लेकर देश में हिंसा का दौर चल रहा है। पिछले दिनों जाट आरक्षण की मांग की आग में हरियाणा में भड़की हिंसा ने 20 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी का नुकसान हुआ। इससे पहले पिछले साल जुलाई-अगस्त में गुजरात में पटेल रिजर्वेशन की मांग को लेकर हिंसा भड़की थी।
– हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी के बाद अहमदाबाद में अचानक हिंसा भड़क उठी थी।

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– देखते ही देखते राज्य के अन्य हिस्सों  में भी हिंसा फैली। कहीं बसों में आग लगा दी गई तो कहीं पुलिस थानों और चौकियों पर हमला किया गया।

– लेकिन आरक्षण की मांग कर रही इन दोनों जातियों की जमीनी स्थिति क्या है।

– >इकोनॉमिक, सोशल, पॉलिटिकल रूप से ये कितनी सक्षम हैं? यह जानने के  लिए भास्कर ने इनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई ताे सामने आया कि दोनों ही जातियां मजबूत स्थिति में हैं।

देश में जाटों की संख्या आठ करोड़ के करीब है। जबकि गुजरात में ही पटेल 1.2 करोड़ हैं। जाटों की मौजूदगी हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार और गुजरात में है। हरियाणा में अब तक बने 10 मुख्यमंत्रियों में से कहने को 5 गैरजाट रहे हैंं, लेकिन अभी तक केवल भजनलाल ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं। भगवत दयाल शर्मा, राव बीरेंद्र सिंह, बनारसी दास गुप्ता बहुत कम दिनों के लिए कुर्सी पर रहे।

 

इधर 1960 में गुजरात के गठन से अब तक कुल 15 मुख्यमंत्री हुए। इनमें पांच पाटीदार रहे हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल भी पाटीदार समाज से हैं। गुजरात में  पाटीदारों की सरकार में उपस्थिति तो दमदार है ही उद्योगों और व्यापार में भी उनका दबदबा है। राज्य में 15 से 20 प्रतिशत अर्थात 24 लाख पाटीदार करोड़पति हैं। 10 करोड़ रुपए से अधिक पूंजीनिवेश वाले कुल 6146 उद्योगों में से 1700 से अधिक उद्योग पाटीदारों की मालिकी के हैं। वहीं हरियाणा में खेती की कुल जमीन का 55 फीसदी हिस्सा जाटों का है।

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