संस्कृत : देव वाणी

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मित्रों हमारी मूल भाषा संस्कृत है
जो विश्व की न केवल सबसे पुरानी भाषा है बल्कि सबसे सशक्त भाषा भी है
हालाँकि आज हम इसके महत्त्व को नहीं जानते
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आप इस बात को साधारण शब्दों में ऐसे समझ सकते हो कि
जिस भाषा में जितने अक्षर होते हैं वो उतनी ही समृद्ध होती है
उदहारण के तौर पर English में 26 अक्षर है और शायद वो विश्व की सबसे गरीब भाषा है
जबकि हिंदी में 444 अक्षर हैं और वह एक समृद्ध भाषा है
संस्कृत में तो इससे भी ज्यादा हैं
इसलियें संस्कृत निचित ही विश्व की न केवल सबसे पुरानी भाषा है बल्कि सबसे समृद्ध भाषा भी है
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अब इसे व्यवहारिक रूप में समझिए
संस्कृत एक साँस कृत भाषा है
अर्थात इसमे शब्द निर्माण साँस यानि ध्वनि के आधार पर हुआ है
उदहारण के लियें हिंदी में घोड़े की आवाज के लियें शब्द बना है हिनहिनाना जो उसकी वास्तविक आवाज के लगभग आसपास है जबकि इसी आवाज का English शब्द neigh बिलकुल भी मेल नहीं खाता, इसी प्रकार कुत्ता भोकता है तो bark bark नहीं करता
शायद अब आप मेरी बात का असली अर्थ समझ रहे होंगे
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अब जरा बाबा रामदेव जी की दवा का मर्म जाने
एक होती है दवा जो कई वनस्पतियों से मिलकर बनती है
उसका एक नाम होता है जो दवा बनाने वाला रखता है और परिवर्तनशील है
एक होती है वनस्पति जिसका एक आयुर्वेदिक, निश्चित नाम होता है
और जो परिवर्तनशील नहीं है
Modern Medical Science ने भी इन वनस्पतिओं के उन्ही नामो को स्वीकार कर लिया है
अब आप वनस्पतिओं के नामो के विषय में जानिए
ये नाम भी संस्कृत में हैं जाहिर सी बात हैं साँस कृत हैं
अर्थात किसी न किसी आधार पर रक्खे गए हैं
जैसे एक है सर्पगंधा इससे सर्प जैसी गंध आती है
ऐसे ही आयुर्वेद की कुछ औषधियों के नाम -अश्वगंधा,गजदंत,गोखुर,कुमारिका मांसम,पुत्र जीवक आदि आदि—-।
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अब त्यागी जी को कौन समझाए कि
पहली बात तो वनस्पति के नाम से शाब्दिक अर्थ जुड़ा ही नहीं है इसलियें, भ्रमित क्यों हों
दूसरी बात दवा डॉक्टर देता है, आम आदमी भ्रमित क्यों हो
तीसरे जहाँ तक नाम परिवर्तन की बात है, ये कोई बच्चो का खेल है क्या, कि ये वाला खिलौना पसंद नहीं आया तो दूसरा ले लो
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ये तो वो ही बात हो गयी ना की नाच ना जाने आँगन टेढ़ा
भाई आपको अगर संस्कृत और आयुर्वेद की जानकारी नहीं है तो
आप अपना ज्ञान बढ़ाओ ना की स्थापित परम्पराओं को बदलने की मांग करो
वनस्पतियों के नाम बदलने की बात को एक बार स्वीकार किया गया तो कल ये ना जाने क्या क्या बदलने को कहेंगे तो भैया क्या पूरा आयुर्वेद आप दोबारा लिखना चाहते है वो भी अपनी पसंद का
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अब कल को त्यागी जी संसद में हॉट डॉग पर ऑब्जेक्शन करें की भाई इसमे गरम कुत्ता बेचा जा रहा है तो कौन सी समझदारी की बात होगी
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