लक्षणों की पहचान बहुत ज़रूरी

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कुछ खास तरहके कैंसरस़िर्फ महिलाओंको होतेहैं, जिन्हेंगायनॉलोजिकल कैंसर कहते हैं औरजो जननअंगों सेसंबंधित होतेहैं. महिलाएंइनके शुरुआतीलक्षणों कोपहचान नहींपातीं. येकैंसर महिलाओंके पेल्विकरीजन कीविभिन्न जगहोंपर होसकते हैं, जैसे पेटऔर हिपबोन्स केबीच, कहींभी.

गायनॉलोजिकल कैंसर
1. सर्वाइकल
2. यूटेराइन
3. ओवरीअन
4. वल्वर
5. वजायनल

लक्षण
पीरियड के अलावाअन्य दिनोंमें भीब्लीडिंग एवंडिस्चार्ज होना, वल्वा की त्वचामें बदलाव, हमेशा बुखारमहसूस करना, पेल्विक एरियामें दर्दऔर दबावमहसूस करना, वजायनल इचिंगएवं बर्निंग, बैक एवंएब्डोमेनल पेन, हमेशा थकान महसूसहोना, युरिनमें परेशानी, फाउल स्मेलिंगऑफ डिस्चार्ज, मैनोपॉज केबाद रक्तस्राव. इनमें स्क्रीनिंगस़िर्फ सर्वाइकलकैंसर कीहो पातीहै.
सर्वाइकल कैंसर
दुनिया में सर्वाइकलकैंसर सेहोने वालीमौतों केआंकड़े सबसेज़्यादा हैं. 80 प्रतिशत मामले विकासशील देशों कीमहिलाओं सेसंबंधित हैं. अकेले भारतमें इसबीमारी सेहर 7वेंमिनट मेंएक महिलाकी मौतहो जातीहै. दुनियाभर मेंहर सालइस गंभीरबीमारी केकारण 2.73 लाख महिलाओं की मौतहो जातीहै.
क्यों होता हैसर्वाइकल कैंसर
गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर गर्भाशयके प्रवेशद्वार काकैंसर है. इस बीमारीकी मुख्यवजह हैह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी). सर्वाइकल कैंसरकिसी भीसेक्सुअली एक्टिव महिला को होसकता है, लेकिन इसबीमारी काख़तरा 40 वर्षसे ज़्यादाकी महिलाओंमें बढ़जाता है. एशियन स्कूलऑफ मेडिकलसाइंस केडॉ. एनके पांडेके मुताबिक, सर्वाइकल कैंसरबदलती जीवनशैली कीदेन है. पिछले कुछसमय सेमहिलाओं केबीच सिगरेटऔर शराबका चलनबढ़ा है, जो कैंसरका जोखिमबढ़ाता है. बारबारहोने वालीप्रेग्नेंसी, मल्टीपल पार्टनर्स और जेनेटिककारणों सेभी यहबीमारी होतीहै. यदिकोई व्यक्तिएचपीवी सेसंक्रमित है, तो उसकेसाथ यौनसंबंधों सेभी यहबीमारी होसकती है. कैंसर विशेषज्ञकहते हैंकि एचपीवीइंफेक्शन सेबचाव केलिए वैक्सीनऔर नियमितस्क्रीनिंग बेहद ज़रूरी है, लेकिनआंकड़ों केमुताबिक, प्रत्येक3 साल में18 से 69 वर्षकी सभीभारतीय महिलाओंमें सेमात्र 2.6 प्रतिशत की स्क्रीनिंग होपाती है.
टीकाकरण
इस बीमारी सेबचाव केलिए दोतरह केटीके उपलब्धहैं:-
सर्वारिक्स : यह एचपीवी-16 और एचपीवी-18 के संक्रमणको काफीहद तकरोकता है. 70 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के लिएयही दोनोंवायरस ज़िम्मेदारहोते हैं(डोज शेड्यूल-0, 1, 6 माह केअंतराल पर).
गार्डसिल : यह टीकाएचपीवी-16, एचपीवी-18, एचपीवी-6 और एचपीवी-11 के संक्रमणसे बचाताहै (डोजशेड्यूल-0, 2, 6 माह के अंतराल पर).
इन्हें 9 से 26 सालकी लड़कियोंको दियाजा सकताहै. 45 सालतक कीमहिलाएं भीइन्हें लगवासकती हैं. ये सर्वाइकलकैंसर काजोखिम कमकरते हैं, लेकिन ज़रूरीहै किजिन्होंने टीकाकरण करा लिया हो, वे भीसाल मेंएक बारपैप टेस्टकराएं.
कंडोम सुरक्षा कवचनहीं
आम तौर परलोग मानतेहैं किकंडोम काइस्तेमाल करकेवे किसीभी तरहके इंफेक्शनसे बचसकते हैं, पर असलमें वहउसी भागको सुरक्षितरखता है, जिसे कवरकरता है. जबकि एचपीवीशरीर केकिसी भीभाग मेंहो सकता है.

नियमित जांच जरूरी
पैप स्मियर टेस्ट: सर्वाइकल कैंसर की जांच केलिए महिलाओंको पैपस्मियर टेस्टकराना चाहिए. इस टेस्टमें सर्विक्समें कैंसरसऔर प्रीकैंसरस सेल्सके बारेमें पतालगाया जाताहै. इससेविभिन्न तरहके इंफेक्शंसऔर ट्रांसमिटेडडिजीज केबारे मेंभी पताचल जाताहै. सेक्सुअलीट्रांसमिटेड एचपीवी 8 से 10 वर्ष बादअपना प्रभावदिखाता है. यह टेस्टपहले रिलेशनशिपके तीनसाल बादकराना चाहिए. आईसीएमआर(इंडियनकांउसिल ऑफमेडिकल रिसर्च) गाइड लाइनके मुताबिक, किसी भीसेक्सुअली एक्टिव महिला को सालमें एकबार यहटेस्ट करानाचाहिए. इसकेअलावा डीएनएटेस्टिंग औरलिक्विड वेस्टसाइटोलॉजी भी कराई जा सकतीहै. पैपस्मियर टेस्ट600-800 रुपये में हो जाता है.
पैप स्मियर करानेसे पहलेनिम्नलिखित बातों का ध्यान रखें
पीरियड के दौरानया उससे4-5 दिन बादतक यहटेस्ट नहींकराना चाहिए.
टेस्ट कराने से24 घंटे पहलेफिजिकल रिलेशनशिपमें रहें.
इस टेस्ट सेपहले प्राइवेटपार्ट मेंकिसी तरहका कोईलोशन याक्रीम लगाएं.
उपचार
सर्जरी : कैंसर केप्रारंभिक अवस्था में होने परगर्भाशय निकालनेके लिएसर्जरी (हिस्टेरेक्टॅमी) की जातीहै. हिस्टेरेक्टॅमीगर्भाशय ग्रीवाऔर गर्भाशयनिकालने केलिए कीजाने वालीएक सर्जरीहै, जबकिरैडिकल हिस्टेरेक्टॅमीमें गर्भाशयग्रीवा, गर्भाशय, दोनों अंडाशय, योनि काभाग औरउस क्षेत्रमें लिम्फनोड्स कोसर्जरी केजरिये हटायाजाता है.
कीमो थेरेपी: कीमोथेेरेपी ड्रग्सवेन्स द्वारादिए जातेहैं. इनकाइस्तेमाल कैंसरके सेल्सख़त्म करनेके लिएकिया जाताहै. इन्हेंएंटी कैंसरड्रग्स याकीमो थेरेपीएजेंट भीकहा जाताहै. किमोथेरेपीके विशेषज्ञडॉक्टरों कोओंकोलॉजिस्ट कहा जाता है. किमोथेरेपी सेकैंसर सिकुड़जाता हैऔर शरीरके दूसरेभागों मेंनहीं फैलपाता. येड्रग्स इंजेक्शनया दवाइयोंके रूपमें लिएजाते हैं.
रेडिएशन: इस थेरेपीमें कैंसरकोशिकाओं कोनष्ट करनेऔर ट्यूमरहटाने केलिए एक्सरे काप्रयोग कियाजाता है. रेडिएशन थेरेपीको सर्जरीएवं किमोथेरेपी केसाथ सम्मिलितरूप सेभी इस्तेमालकिया जाताहै. किमोथेरेपी केअंतर्गत कैंसरकोशिकाओं कोनष्ट करनेके लिएदवाओं काइस्तेमाल कियाजाता है.
साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट 
कैंसर के मरीजअसहनीय पीड़ासहते हैं, मानसिक पीड़ासे भीगुजरते हैं. इलाज केदौरान महिलाओंके कईअंग रिमूव करनेपड़ते हैं, जो भावनात्मकरूप सेएक महिलाके लिएकाफी कष्टप्रदस्थिति होतीहै. कॉस्मोसइंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल हेल्थ एंडबिहेवियरल साइंसेस के निदेशक डॉ. सुनील मित्तलकहते हैंकि मानसिकतनाव कोशारीरिक याभावनात्मक दबाव के रूप मेंमहसूस कियाजा सकताहै. डॉक्टरमित्तल कहतेहैं किऐसे समयमें तनावसे कईअन्य स्वास्थ्यसमस्याएं उत्पन्नहो सकतीहैं. कैंसरके मरीजोंको भावनात्मकसहारा मिले, तो वेइस बीमारीसे बखूबीलड़ सकतेहैं. इलाजके साथसाथ उन्हेंरिलैक्सेशन, ध्यान, व्यायाम और स्ट्रेसमैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जानाचाहिए. उनकीकाउंसलिंग या टॉक थेरेपी भीकराई जानीचाहिए.
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