यह विशुद्ध देवासुर संग्राम जैसा है कुछ आसुरी शक्तियां नहीं चाहती काशी में एम्स

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एम्स की स्थापना के लिए मन-प्राण से जुटे बीएचयू अस्पताल के ह्रदय रोग के एक्सपर्ट डां ओम शंकर से , जो इस मुद्दे पर आमरण अनशन तक कर चुके हैं, मैंने पिछले दिनों अनुरोध किया था कि जिस डाक्टर नें आपको चौदह माह के वनवास पर भिजवाने में जयचंदी भूमिका निभायी थी, तीन दिन पहले ही संयोगवश उसी का आपने प्राण दान किया ….यह सब कैसे हुआ, क्या किया आपने कि वह शख्स परिजनों के बीच तेजी से स्वास्थ्य लाभ कर रहा है ? इसका पूरा विवरण मांगा था. परंतु जुनूनी ओम की महानता और सदाशयता देखिए कि उन्होंने जवाब में उस दिन की घटना का आंखों देखा हाल भेजने की बजाय हमें यह पोस्ट भेज दी जिसमें उन्होंने यह बताने की चेष्टा की है कि एम्स क्यों गोरखपुर की तुलना में काशी में स्थापित हो….? मजा यह कि इस मनीषी से अभी तक मेरा देखा तक नहीं हुआ है. कल सोचा था कि गंगा महासभा वाले कार्यक्रम के बाद उनसे मिलूंगा. मगर देर हो गयी और बिजली न रहने से उमस ने बेहाल कर रखा था. इसलिए उनसे भेंट नहीं हो सकी पर उनकी आवाज के साथ अपनी आवाज भी जुड़ चुकी है. इस पोस्ट को मित्रों सिर्फ पढ़िए ही नहीं, ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे पहुंचाने की कोशिश भी कीजिए. विश्वास कीजिए, मामला देवासुर संग्राम जैसा ही हो गया है जहां कुछ बलशाली आसुरी शक्तियां सक्रिय हैं लोकहित अनुष्ठान विध्वंस में.

डा. ओम शंकर : मित्रो ! किसी भी समाज या राष्ट्र का निर्माण वहां पर रहने वाले मानव समूहों से होता है। इन मानव समूहों की अलग अलग सोच /विचारधारा होती है जिनके हिसाब से हम लोग हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख और इसाई में जन्म के हिसाब से बंट जाते हैं।
परंतु यह एक कटु सत्य है कि चाहे हम किसी भी पार्टी के समर्थक या विचारधारा के मानने वाले हों हम सब मानव हैं और कभी न कभी बीमार भी अवश्य ही पड़ते हैं। और जब ऐसा होता है तब किसी न किसी अस्पताल में हमें इलाज हेतु जाना ही पड़ता है। अस्पताल ही इस दुनिया में एक ऐसी जगह है जहाँ एक ही छत के नीचे अल्लाह ,ईश्वर ,भगवान और गॉड सभी रहने को मजबूर है, अन्यथा हमने तो उनको भी अलग अलग मकानों में बाँटने में कभी कोई कोताही नहीं की है जैसी कि हमने अपने आपको हज़ारों जातियों में विखंडित करने में।
मानवता के इस मंदिर ,मस्जिद और गिरजाघर यानी “एम्स” के निर्माण में , जहाँ सभी को बराबर मानते हुए(चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, समुदाय, संघ और पार्टी के हों) बिना किसी द्वेष और भेदभाव के चिकत्स मानवधर्म का पालन करके सबकी जान बचाने की हरचंद कोशिश करते हैं, इसलिए हम सबको भी एक साथ मिलकर अहम् भूमिका निभानी चाहिए।

जब मैं पहली बार 15 दिन के आंदोलन और आमरण अनसन पर था तो भाजपा के सांसद, विधायक ,संघ और अन्य हिन्दू संगठनो के अलावा सभी पार्टियों और धर्मो के लोगों द्वारा इस मुद्दे का समर्थन किया गया था और मैंने अपना आमरण अनशन भी आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी हाथों जूस पीकर तोड़ा था, जो संघ, भाजपा और मोदीजी के अति करीबी माने जाते हैं। उन्होने खुद अपने स्तर से अपनी पूर्ण सहभागिता का भी भरोसा दिलाया था।

यही नहीं BJP ने एम्स को अपने इलेक्शन मैनिफेस्टो में डालते हुए पिछले दो बजटों में 8 नए एम्स के निर्माण की स्वीकृति भी दी है।

अगर इस देश के अन्य हिस्से में बननेवाला एम्स संघ /भाजपा विरोधी नहीं है तो फिर काशी में बननेवाला एम्स कैसे संघ/हिन्दू विरोधी हो सकता है ?

उस समय सरकार में आने के बाद श्री जेतली जी और श्री अमित शाह जी ने खुद काशी में एम्स के निर्माण का न सिर्फ आश्वासन दिया था बल्कि पहले ही बजट में पूर्वांचल में एक एम्स की घोषणा भी कर दी थी।
जिसको अब कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा काशी से गोरखपुर ले जाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है वो भी बेहद ही दिमागी बुखार के इलाज जैसी थोथी दलील के आधार पर जो सर्वथा गलत है। क्योंकि एम्स किसी संक्रमित बीमारी के निराकरण का अस्पताल नहीं होता है और न ही संक्रमण की बीमारी को ज्यादा अस्पताल खोलकर रोकना संभव है। जिसका जीता जागता प्रमाण यह है कि दिल्ली में एम्स सहित हज़ारों अस्पताल होने के बावजूद आजकल हज़ारों लोग डेंगू से मर रहे हैं।

यही नहीं गोरखपुर एक कोने में बसा शहर है जहां पर एम्स बनाये जाने की स्थिति में इसका फायदा कुछ सीमित क्षेत्र को ही हो पायेगा। जिससे हमारे अल्प संसाधनों का सिर्फ और सिर्फ दुरूपयोग ही होगा। काशी और आसपास की जनता तब भी अपने समुचित इलाज के लिए पहले ही की तरह दिल्ली और अन्य शहरों में जाकर भटकती रहेगी जो कि प्रधानमंत्री महोदय की गरिमा के भी अनुरूप नहीं होगा।

जहाँ तक गोरखपुर के आस पास में फैले मस्तिष्क ज्वर के इलाज और रोकथाम का सवाल है तो इसके लिए आवश्यक टीकाकरण तथा 500 बेड का अलग से एक अस्पताल और रिसर्च सेंटर वहां स्थापित करने की जरुरत है न कि एम्स की।

हम तो सिर्फ इतना चाहते हैं कि जिस चीज की जहाँ जरुरत हो वहां बने ,जिससे कि पीड़ित जनता को उसका सही से लाभ भी मिल सके और सीमित सरकारी संसाधनों के दुरूपयोग को भी रोक जा सके!

काशी मांगे एम्स!
एम्स से कम कुछ भी मंजूर नहीं!

कृपया इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि ये प्रधानमंत्री महोदय तक पहुँच जाये!

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