मांक्षी द माउंटेन मैन

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मांक्षी  द माउंटेन मैन आम मुंबईया फिल्मों से हट कर है। यह फिल्म एक आदमी और उसके पहाड़ तोड़ने के अनुभव की कहानी है। जो अकेले अपने दम पर लगातार 22 साल तक पहाड़ तोड़ता रहा। यह बिहार के गहलौर गांव के दशरथ मांक्षी की वास्तविक कहानी है। यह गांव काफी पिछड़ा है। यहां के लोग के मारे शाम छ बजे ही खुद को घरों में बंद कर लेते हैं। इस गांव में नक्सलियों का काफी प्रभाव था। यह फिल्म ग्रामीण परिवेश पर बना है। इस फिल्म में गैंग आॅफ वासेपुर के कलाकार लिए गए हैं। उच्च जाति के ठाकुर सरपंच की भूमिका में हैं तिगमांशू धूलिया। मांक्षी एक दलित व्यक्ति हैं।  एक बड़ा पहाड़ उनके गांव और बाकी दुनिया के बीच में खड़ा है, जिसके कारण लंबी दूरी तय करके लोगों को आना जाना पड़ता है। लेकिन इसके लिए यहां शक्ति संपन्न लोग कुछ करना नहीं चाहते। मांक्षी से जाते हुए हादसे में अपनी पत्नी को खो देता है। ऐसे में वह प्रतिज्ञा करता है पहाड़ तोड़ने का। इस फिल्म में प्रथाओं से जकड़े हुए लोग दिखेंगे। वहीं मांक्षी की भूमिका में खुशी, आनंद, हताशा, पागलपन और ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से भरे नवाजुद्दीन दिखेंगे। यह फिल्म निर्देशक केतन मेहता की तिसरी फिल्म है जो किसी व्यक्ति के जीवन पर आधारित है। इससे पहले वह मंगल पांडे- द राइजिÞंग (2005), राजा रवि वर्मा पर बनी रंगरसिया (2014) बना चुके हैं। दशरथ मांझी पर कई और कॉक्यूमेंट्रीज भी बन चुकी हैं। हालांकि यह फिल्म भारत के उस हिस्से की कहानी बताती है जो विकास से कोसो दूर है जहां आज भी लोगों के जीवन में अंधेरा है। बॉलीवुड की मसाला फिल्मों की दीवानी पब्लिक का कहना है कि यह फिल्म शुरू से अंत तक बहुत निरस है, जबकि एक खास वर्ग के लोगों को यह फिल्म काफी पसंद आ रही है।

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