महिला इंजिनीयर्स की चुनौतियां

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इन दिनों कैंपस में एडमिशन को लेकर काफी चहल पहल है। जब हमने इंजीनियरिंग कॉलेजज का रूख किया तो काफी हैरान करने वाली बात नजर आई वह यह थी कि इंजीनियरिंग में दाखिला के लिए लड़कियां काफी कम नजर आई। वह भी तब जब हर साल10वीं और12वीं की परीक्षा में लड़कियां अधिकतम अंकों से पास होती हैं। महिला इंजीनियर्स की पूरी दुनिया में क्या है स्थिति, आइए जानते हैं…..

यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका में पै्रक्टिकल इंजीनियरिंग में मात्र ग्यारह प्रतिशत महिलाए ही हैं। वर्ष 2009 के आकड़ों के मुताबिक कनाडा में मात्र 10 प्रतिशत ही महिला इंजीनियर्स हैं, वहीं इंग्लैंड में मात्र 8.7 प्रतिशत महिला इंजीनियर्स हैं। वैसे तो पूरी दुनिया में महिला इंजीनियर्स की संख्या काफी कम हैं, पर पूरे यूरोप में ब्रिटेन में सबसे कम महिला इंजीनियर्स हैं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग में काफी लड़कियां जाना पसंद करती हैं, यह हैंरानी की बात है। इस संबंध में सैन फ्रांसिस्कों के इंजीनियर डेबी स्टर्लिंग कहते हैं कि दरअसल ज्यादातर लडकियां इंजीनियरिंग में जाना ही नहीं चाहती। स्टर्लिंग कहते हैं कि बात इंटरेस्ट की बात है। दरअसल बचपन से ही लड़के लिगो, काइनेक्स, इरेक्टर जैसे गेम्स खेलना पसंद करते हैं, जबकि लडकियां डॉल्स और प्रिंसेस ड्रेसेज के साथ खेलती हैं। वहीं यूनिवर्सिटी आॅफ बीसी में एप्लायड साइंस के डीन डॉक्टर तीसीर के मुताबिक महिलाओं में सेवा की भावना ज्यादा होती है। इसलिए वो ऐसा करियर चुनना पसंद करती हैं, जिसमें वो समाज को सुंदर बनाने में अपना योगदान दे सकें। इसके अलावा, इंजीनियरिंग में अधिकतर पुरूषों का वर्चस्व है, ऐसे माहौल में काम करने में वे खुद को थोड़ा असहज महसूस करती हैं। हालांकि यह भी सच है कि अब इंजीनियरिंग में सिर्फ थ्योरिटीकल या प्रैक्टिकल नॉलेज काफी नहीं। अब अच्छा कम्यूनिकेशन स्कील और व्यवहारकुशलता भी जरूरी है, जोकि महिलाओं में होता है। इसके अलावा, महिलाएं टीम वर्क में भी यकीन करती हैं। यह महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में जाने के लिए एक सकारात्मक पहलू है।

क्या है कारण
भारत जैसे देश की बात की जाए तो सामाजिक और पारिवारिक स्थिति के कारण भी महिलाएं इंजीनियरिंग में काफ ी कम जाती हैं। करियर काउंसलर मयंक के मुताबिक एक तो महिलाओं का रूझान इंजीनियरिंग में काफी कम होता है और दूसरी बात हमारे देश में लड़कियों के माता पिता उनके करियर को लेकर कुछ खास जागरूक नहीं होते। बहुत से माता पिता तो उन्हें पढ़ने के लिए अलाउ ही नहीं करते। शादी के बाद महिलाओं की जिम्मेदारी सबसे पहले घर के लिए मानी जाती है, करियर उनके लिए सेकेंडरी हो जाता है। ऐसे में वही करियर लड़कियों को चुनने के लिए प्रेरित किया जाता है जो फ्लैक्सिबल हो। लोगों की
सोच यह है कि लड़की डिसेंट सा जॉब करें और शादी करे। इसके अलावा काफी लड़कियां स्कूल के बाद  ही पढ़ाई छोड़ देती हैं, या बहुत सी लड़कियों के माता पिता मेल डोमिनेटिंग सोसाइटी होने के नाते साथ पढ़ने या काम करने के खिलाफ होते हैं। लड़कियों की परवरिश काफी संकिर्ण वातावरण में होने के कारण पुरूषों के साथ काम करने में वे खुद भी सहज महसूस नहीं करती हैं।

हमारा सामाजिक और पारिवारिक परिवेश काफी रूढ़ीवादी है, जिसके कारण लड़कियां इंजीनियरिंग में दाखिला लेना कम पसंद करती हैं। हालांकि पिछले कुछ साल के आकड़ों को देखें तो लड़कियों का रूझान इंजीनियरिंग की तरफ काफी बढ़ा है। हमारे देश में लडकियां काफी प्रतिभाशाली हैं। तमाम अवरोध के बावजूद छोटे शहरों और कस्बों की लड़कियां भी अपने करियार को लेकर अब काफी जागरूक हो रही हैं।
डॉक्टर अखंड प्रताप सिंह (डारेक्टर)
राजा वलवंत सिह इंजीनिरिंग टेक्निकल कैंपस, बिचपुरी, आगरा

लड़के जब इंजीनियरिंग की तैयारी करते हैं तो वो 2 या 3 अटैंप्ट देते हैं और लड़कियां और उनके माता पिता भी एक अटैंप्ट के बाद हार मान लेते हैं और दूसरे विकल्प के बारे में सोचने लगते हैं, क्योंकि एक से ज्यादा अटैंप्ट देना उन्हें पैसे और टाइम की बर्बादी लगता है। हमारे देश में लड़की कितनी भी पढ़ी लिखी हो, पर शादी में मां बाप को अच्छा खासा दहेज भी देना होता है। ऐसे में पेरेंट्स लड़की की पढ़ाई पर ज्यादा राशि खर्च करना पसंद नहीं करते।
शुभा (टेक्निकल सपोर्ट एग्जीक्यूटीव )

लड़की की शादी में ज्यादातर इन लॉज की डिमांड होती है कि लड़की कामकाजी ना हो। घर परिवार चलाने में बस दझ हो। कितनी भी पढ़ी लिखी हो पर अच्छा खाना ना बनाती हो तो सब बेकार। इंजीरियरिंग के टेस्ट के लिए काफी पढ़ाई करनी पड़ती है और पर इसी दौरान लडकियों शादी का भी काफी दबाव होता है।  इसेक अलावा, सामाजिक तौर पर भी लड़कियों को अपने लुक्स, क्लॉथिंग, सामाजिक परिवारिक वजहों से  कई तरह के डिस्ट्रैक्शन से गुजरना पड़ता है।
प्रियंका प्रजापति (एसइओ एक्जीक्यूटीव)

मैंने 12वीं के बाद इंजीनियरिंग करनी चाही तो मेरे माता पिता काफी खुश हुए। पेरेंट्स की सोच काफी बदली है। वो अपनी बेटियों को स्वावलंबी बनाना चाहते हैं, लेकिन मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज भी लड़के शादी करने के लिए एक घरेलू लड़की चाहते हैं। लड़कियां ज्यादा पढ़ जाती हैं तो उनकी शादी में भी अड़चने आती हैं।
शारदा सिंह इंजीनियर टीसीएस

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