मन की आंखों से शह-मात का अनोखा खेल

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शतरंज एक ऐसा खेल है जिसमें सामने वाले की चाल देखकर प्रतिद्वंदी रणनीति बनाता है। पर अगर ये कहा जाए कि मन की आंखों से आभास कर कोई शह-मात के इस खेल को अंजाम तक ले आता है तो इसे आप क्या कहेंगे ? सुनने में थोड़ा अटपटा सा लगता है, लेकिन है ये सच। दिल्ली विश्वविद्यालय के पास स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी फॉर ब्लाइंड ब्यॉयज में ऐसे दो दर्जन शतरंज खिलाड़ी हैं जो दृष्टिहीन हैं, लेकिन इनके शतरंज खेलने का अपना तरीका है कि विपक्षी खिलाड़ी की चाल को अल्फाबेट के उच्चारण के साथ महसूस कर अपनी चाल
चलाते हैं।

इन बच्चों के सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठाया है श्रद्धा शिरोमणि पाउंडेशन की अध्यक्षा रजनी शाही ने। वह कहती हैं कि हाल ही में डॉ. हेडगेवार शतरंज प्रतियोगिता के दौरान केंद्रीय मंत्री विजेंद्र सिंह ने इन बच्चों की प्रतिभा को देखते हुए कहा था कि वह सरकार के सामने इसका प्रस्ताव रखेंगे। शाही बताती हैं कि उन्हें भरोसा है कि सरकार का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट होगा।

बनारस से इस प्रतियोगिता में भाग लेने आए 9वीं कक्षा के छात्र सत्यप्रकाश ने बताया कि उन्हें शतरंज का शौक बचपन से है, जब उसके मामा ने उसे शतरंज लाकर दिया था। सत्यप्रकाश की आंखों में भले रौशनी न हो, लेकिन वह अच्छे-अच्छे रौशनी वाले खिलाड़ियों को मात दे सकता है। रेटेड प्लेयर शशांक बीए का छात्र है। वह बताता है कि उसने हाल ही में डॉ. हेडगेवार शतरंज प्रतियोगिता ने भाग लिया और पुरस्कार जीता। शशांक बताता है कि उन्हें और उनके सहयोगियों को अगर उचित प्रशिक्षण मिले तो वह इसमें बेहतर करियर बना सकता है। वहीं सातवीं कक्षा का छात्र राकेश कहता है कि वह अपने सीनियर्स से धीरे-धीरे शतरंज के गुर सीख रहा है और उसे इतना आत्मविश्वास है कि वह जल्द ही नेशननल लेवल पर खेलेगा।

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