बदल गई कॉमेडी

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indian-cinemaकॉमेडी बॉलीवुड फिल्मों का खास हिस्सा होती है. बदलते समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री में कई प्रयोग हुए हैं, ऐसे में कॉमेडी को लेकर भी फिल्मकारों के नज़रिए में का़फी बदलाव आया है. पुरानी हिंदी फिल्मों में कॉमेडियन का एक किरदार होता था, जो कहानी के साथ-साथ चलता था. उस जमाने में कॉमेडियन और मुख्य अभिनेता के डायलॉग अलग-अलग होते थे. कॉमेडियन का रोल अभिनेता का दोस्त या आसपास के लोग करते थे, पर अब फिल्म का नायक ही कॉमेडियन अंदाज़ में उतर आया है.अब बॉलीवुड में फुल टाइम कॉमेडियन की जगह खत्म सी हो गई है. मौजूदा दौर के नायकों में का़फी परिवर्तन आया है. बदलते व़क्त के साथ उन्होंने खुद को कॉमेडियन के रोल में भी फिट कर लिया है. वे गाना, डांस, रोमांस और एक्शन तो करते ही हैं, साथ ही कॉमेडी करना भी बख़ूबी सीख गए हैं. गोविंदा के बाद अक्षय कुमार एवं अजय देवगन जैसे कलाकारों ने मुख्यधारा में कई सफल कॉमेडी फिल्में की हैं. एक जमाना था, जब फिल्मों में कॉमेडियन का रोल नायक से कम नहीं होता था. उस दौर में महमूद, जॉनी वाकर, असरानी, जगदीप, राजेंद्र नाथ एवं केस्टो मुखर्जी जैसे कॉमेडियन हुए, जिन्होंने हिंदी फिल्मों में कॉमेडी के बल पर अपना अलग मुकाम बनाया. महमूद की कुछ प्रमुख फिल्में थीं-पड़ोसन, गुमनाम, प्यार किए जा, भूत बंगला, बॉम्बे टू गोवा, सबसे बड़ा रुपैय्या, पत्थर के सनम, अनोखी अदा, नीला आकाश, नील कमल एवं कुंवारा बाप आदि. वह अपनी कई फिल्मों में तो फिल्म के नायक के किरदार पर भी भारी नज़र आए. अभिनेता और गायक किशोर कुमार ने एक नई ही शुरुआत की. चलती का नाम गाड़ी, झुमरू, हाफ टिकट और पड़ोसन जैसी हिट फिल्मों में नायक के रोल के साथ-साथ वह कॉमेडी करते भी नज़र आए. कॉमेडियन जॉनी वाकर ने सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए, ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, ऑल लाइन क्लीयर, जंगल में मोर नाचा किसी ने न देखा, ये दुनिया गोल है और मेरा यार बना है दूल्हा जैसे गानों पर बेहतरीन कॉमेडी पेश की थी. कादर खान और गोविंदा की जोड़ी ने कई हिट कॉमेडी फिल्में दीं. फिर बॉलीवुड में कॉमेडी को ही आधार बनाकर कई फिल्में बनीं. कई बड़े सितारों ने कॉमेडी फिल्मों की तरफ रु़ख किया. अक्षय कुमार ने भी अपनी एक्शन हीरो की इमेज तोड़कर कॉमेडी की तरफ रुख किया और उन्हें कामयाबी भी मिली. हेराफेरी, आवारा पागल दीवाना, गरम मसाला, फिर हेराफेरी, भागमभाग, भूल भुलैया, वेलकम एवं सिंह इज किंग उनकी सफल कॉमेडी फिल्में हैं. अक्षय कुमार ने एक्शन के साथ-साथ कॉमेडी की नई शुरुआत की. चांदनी चौक टू चाइना और कमबख्त इश्क जैसी सफल कॉमेडी फिल्मों में अक्षय का काम ब़खूबी झलकता है. विलेन की सशक्त भूमिका के बाद परेश रावल ने भी कॉमेडी में किस्मत आजमाई. फिल्म हेराफेरी में बाबू भाई के रोल में दर्शकों को उन्होंने खूब हंसाया. अभिनेता संजय दत्त ने भी मुन्ना भाई सीरीज की फिल्मों से कॉमेडी में अपना हाथ आजमाया और सफल रहे. बॉलीवुड में मुख्य धारा के अभिनेताओं की एक लंबी सूची है, जो कॉमेडी की डगर पर चल पड़े हैं. अजय देवगन गोलमाल रिटर्न्स और ऑल द बेस्ट में कॉमेडी करते नज़र आए, वहीं खान तिकड़ी भी कॉमेडियन की भूमिका में नज़र आए. नायिकाएं पीछे कैसे रहती. वो भी कॉमेडी की डगर पर चलकर दर्शकों को हंसाती नज़र आई. अन्य देशों की तरह भारत में भी अब स्टैंडअप कॉमेडी को पहचान मिलने लगी है. ऐसे कई कॉमेडियन थे, जिन्हें फिल्मों में रोल नहीं मिला. तब उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडी और मिमिक्री में अपना हुनर दिखाना चाहा. इसकी शुरुआत भारत में जॉनी लीवर ने की. बड़े-बड़े स्टारों, गायकों एवं संगीतकारों के स्टेज शो होते तो इन स्टैंडअप कॉमेडियनों या मिमिक्री करने वाले कलाकारों को बतौर फ़िलर यानी बीच-बीच में टाइम पास के लिए बुलाया जाता. भारत में चार साल पहले शुरू हुए लाफ़्टर चैलेंज कार्यक्रम को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया. राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल एवं एहसान क़ुरैशी जैसे कलाकारों ने खूब ख्याति बटोरी. अब तो लगभग हर चैनल पर कॉमेडी के कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं. चूंकि अब मुख्यधारा में कॉमेडी फिल्में बनने लगी हैं, नायक खुद कॉमेडियन की भूमिका भी अदा करने लगे हैं, साथ ही लगभग हर चैनल पर स्टैंडअप कॉमेडी कार्यक्रम प्रसारित होने से दर्शक इस कॉमेडी की तुलना फिल्मों में दिखाई जाने वाली कॉमेडी से करने लगे हैं. पहले कॉमेडियन की छोटी से छोटी हरकत भी उन्हें हंसा देती थी, लेकिन अब वह बात नहीं है. पहले और अब में फर्क़ यह है कि पहले के दौर की कॉमेडी शुद्ध होती थी, कॉमेडी का मतलब मात्र दर्शकों को हंसाना होता था. लेकिन अब इसका स्तर गिरता जा रहा है. कॉमेडी में डबल मीनिंग का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. जिसे परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता. कॉमेडी के सरताज खयाली लाफ्टर चैलेंज शो में अपने पतला होने पर कहते नज़र आए कि पतला होने में उनका कोई कसूर नहीं है, क्या करे मां-बाप ने किस्तें ही पूरी नहीं की. यह तब की कॉमेडी में देखने सुनने को नहीं मिलता था. लेकिन दर्शक कर भी क्या सकते हैं, वो तो वहीं देखेंगे जो उन्हें दिखाया जाएगा.

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