फिल्म इंडस्ट्री को भा रही है बनारस की मस्ती

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बहुत लोगों कामानना हैकि बनारसतंग गलियोंका शहरहै. लेकिनजो इसकीआत्मा कोसमझता हैवह यहींका होकररह जाताहै. यहांआने वालेविदेशी पर्यटकजो स़िर्फयहां घूमनेके उद्देश्यसे आतेहैं, लेकिनबनारस कीमस्ती उन्हेंइतना प्रभावितकरती हैकि वेयहीं केहोकर रहजाते हैं. यहां केशोर शराबेमें भीएक अलौकिकशांति औरदिव्य अनुभूतिहै.

शिव की नगरीकाशी धार्मिकदृष्टि सेका़फी महत्वपूर्णहै. इसेवाराणसी औरबनारस नामसे भीजाना जाताहै. प्राचीनमान्यता केअनुसार यहांशरीर त्यागनेसे मोक्षकी प्राप्तिहोती है. आध्यात्मिक शहर के रूप मेंप्रसिद्ध इसशहर कीमस्ती औरशांति विदेशीपर्यटकों कोही नहीं, बल्कि फिल्मनिर्माता, निर्देशकों को भी आकर्षितकरती है. यहां केघाटों परविदेशी सैलानीसालों भरनज़र आतेहैं. यहांकी कलासंस्कृति, रहनसहन को हमेशासे फिल्मकारोंने फिल्माया. याद कीजिएअमिताभ कावह गानाखाई केपान बनारसवालाअमिताभको इसगाने परगाते हुएऔर ठुमकेलगाते हुएदेखकर सभीने कभी कभीयह गानागुनगुनाया ही होगा. बनारस शहरआध्यात्म औरमस्ती कामिला जुलारूप है. एक तऱफइसे आध्यात्मिकशहर केरूप मेंख्याति प्राप्तहै तोदूसरी तऱफबनारसी ठगोंके किस्सेभी कममसहूर नहींहै. यहांकी मस्ती, कला, संस्कृतिऔर राजनीतिसभी फिल्मोंके विषयबनते रहेहैं. मस्तीयहां कीफिजाओं मेंघुली है. पिछले कुछदिनों सेबनारस मेंलगातार फिल्मोंकी शूटिंगहो रहीहै.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालयके प्रोफेसरडॉ. काशीनाथसिंह कीविवादास्पद पुस्तक काशी की अस्सीपर फिल्मबन रहीहै. इसफिल्म मेंबनारस केरहनसहनऔर मस्तीको फिल्मायागया है. फिल्म यमलापगला दिवानाकी कामयाबीके बादसन्नी देओलको बनारसइस क़दरपसंद आयाकि वहअगली फिल्ममें भीबनारस कीपृष्ठभूमि पर बन रही फिल्ममोहल्ला लाइवमें अभिनयकर रहेहैं. इसफिल्म मेंसन्नी  धर्मनाथ पांडे की भूमिका मेंहैं. बनारसीपंडे केरूप मेंसन्नी काशीके अस्सीघाट परगंगा नहानेआए श्रद्धालुओंको टीकाचंदन करेंगेऔर फिरसंस्कृत पाठशालामें विद्यार्थियोंको प़ढातेनज़र आएंगे. इस फिल्ममें प्रमुखभूमिका मेंरवि किशन, सौरभ शुक्लाऔर संजयमिश्र हैं, जिन्होंने डॉ. काशीनाथ सिंह कीपुस्तक काशीका अस्सीको प़ढाहै. उनकाकहना हैकि इसमेंगालियों कीभरमार हैतो दूसरीतऱफ लोगोंका यहभी कहनाहै किकाशी मेंप्रचलित गालियांबोलचाल काहिस्सा हैं. इसलिए फिल्मसे गालियोंको हटायानहीं जासकता. गालियोंको हटाएजाने सेफिल्म मेंवह यथार्थभाव नहींआएगा जोयहां कीपहचान है. ये गालियांअश्लील होनेसे कहींज़्यादा बनारसकी भाषाईसंस्कृति काबोध करातीहैं. इसफिल्म मेंसमय केबदलाव कोलेकर नएऔर पुरानेसंघर्ष कोदर्शाया गयाहै. फिल्ममें गंभीरविषय वस्तुको भीसरल औरमनोरंजक ढंगसे फिल्मायागया है.
बहुत से लोगोंका माननाहै किबनारस तंगगलियों काशहर है. लेकिन इसशहर कीविशेषता हैकि यहांकुछ समयगुज़ारने केबाद इसेछोड़ने कीइच्छा नहींहोती. इसबात कोइसी सेसमझा जासकता हैकि यहांआने वालेविदेशी पर्यटकजो स़िर्फयहां घूमनेके उद्देश्यसे आतेहैं, परबनारस कीमस्ती उन्हेंइस क़दरप्रभावित करतीहै किवे यहींके होकररह जातेहैं. यहांके शोरशराबे मेंभी एकअलौकिक शांतिऔर दिव्यअनुभूति है. बनारस केबारे मेंलोगों काकहना हैकि यहशहर भगवानशंकर के  त्रिशूलपर टिकाहुआ है. इसीलिए यहदिव्यआध्यात्मिकशहर है. सुबहेबनारसको लोगमहादेव सेजोड़ करदेखते हैं. बनारस के  लोगोंका कहनाहै किसुबह सूर्यकी किरणेंबाबा विश्वनाथके मंदिरसे टकराकर लोगोंतक पहुंचतीहैं, तोएक ऊर्जामयवातावरण कानिर्माण होताहै, जोलोगों कोऊर्जावान बनाताहै. पुराणोंके मुताबिक़बनारस भगवानशंकर कानिवास स्थानहै. मान्यताहै किजो लोगबनारस मेंप्राण त्यागतेहैं उन्हेंमोक्ष प्राप्तिहोता है, यहां मर्णकर्णिकाघाट (श्मशानघाट) परकभी चिताकी राखठंडी नहींहोती. काशीतुलसी, कबीरऔर रैदासजैसे महानसंतों कीजन्मभूमि भीरही है, तो अघोरकीनाराम औरतैलंगास्वामी को यहां लोग महादेवका अवतारमानते हैं. ऐसा नहींहै किबनारस फिल्मकारोंकी पसंदआज बनाहै. वर्ष1956 में बंगलाफिल्म पाथेरपांचाली कीशूटिंग केलिए सत्यजीतरॉय यहांआए. यहींपर उन्होंनेअपराजिता, अपूर संसार जैसी फिल्मोंकी शूटिंगकी. तपनसिन्हा, मृणालसेन, ऋत्विकघटक जैसेकई बंगलाफिल्म जगतके बड़ेनिर्देशकों ने भी यहां शूटिंगकी. कुछसाल पहलेऋतुपर्णों घोष भी अपनी फिल्मचोखरेबाली की शूटिंग के लिएऐश्वर्या रायके साथबनारस आईथीं. वहींअपनी विवादास्पदऔर ग्लोबलफिल्म वाटरकी शूटिंगके लिएदीपा मेहताभी सीमाविश्वास, लीजारे औरजॉन अब्राहमके साथबनारस आईथीं, लेकिनफिल्म कीस्क्रिप्ट को लेकर हुए विवादके कारणउन्हें अपनीशूटिंग यहांरोकनी पड़ी. स़िर्फकला फिल्मोंके लिए, बल्कि व्यवसायिकफिल्मों कीशूटिंग केलिए भीबनारस फिल्मकारोंको का़फीपसंद रहा है. राजकुमार संतोषीने यहांअपनी फिल्मघातक  की शूटिंग की तो अभिषेकबच्चन नेभी अपनेकरियर केशुरुआती दौरमें  बस इतना सा ख्वाब हैकि शूटिंगबनारस मेंकी. यहफिल्म भलेही कमर्शियलहिट हुई हो, पर अभिषेकबच्चन कोतारी़फ ज़रूरमिली. अमिताभऔर अभिषेककी फिल्मबंटी औरबबली कीशूटिंग भीयहीं हुईऔर यहफिल्म कमर्शियलहिट रही. वहीं का़फीहद तककला फिल्मोंकी श्रेणीमें आनेवाली रानीमुखर्जी कीतीसरी फिल्मलागा चुनरीमें दाग़की शूटिंगभी बनारसमें हुई. ऐसे मेंपंकज पराशरने तोबनारस केनाम परही बनारस मिस्टिकलव स्टोरीनाम कीफिल्म बनाडाली. इसफिल्म मेंकलाकार डिंपलकपा़डिया, राज बब्बर, उर्मिला मातोंडकरऔर अस्मितपटेल थे. इन बड़ेबजट कीफिल्मों केअलावा भोजपुरीफिल्मों, धारावाहिकऔर एलबमकी शूटिंगतो लगातारबनारस औरइसके आसपासके क्षेत्रोंमें होरही है. गंगा मइयातोहे पियरीचढ़इबो, नदियाके पार, ससुरा बड़ापइसा वाला, दरोगा बाबूआई लवयू, गंगाऔर कईहिट भोजपुरीफिल्मों कीशूटिंग बनारसमें हीहुई है.

आस्कर में भीबनारस
फिल्म इंडस्ट्री केलिए ऑस्करका़फी मायनेरखता है, लेकिन वाराणसीकी पृष्ठभूमिपर बनीफिल्म कोआस्कर भीमिल चुकाहै. डाक्यूमेंट्रीफिल्म स्माइलपिंकी मेंमणिकर्णिका घाट पर शवदाह काकाम करनेवालों कोफिल्म मेंदेखकर लोगहैरान थे. इस फिल्मको मांट्रियलब्ल्ड फिल्मफेस्टिवल, सॉपलो पुरस्कार ब्राजील, लॉसएंजिलिस इंडियनफिल्म फेस्टिवलऔर इंडियनडाक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर एसोसिएशन पुरस्कार भीमिल चुकाहै.
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