प्रदूषण से नदी जहरीली हुई

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भारत में नदियोंकी स़फाईबहुत ब़डामुद्दा हैलेकिन आजतक इनकीस़फाई परराजनीतिक रोटियांही सेकीगई हैं. वक्तवक्तपर स़फाईका मुद्दाउठा, का़फीशोर शराबाहुआ लेकिनअपना हितसाधते हीस़फाई कामुद्दा भीदब कररह गया. गंगा कीस़फाई केनाम परही हरिद्वारके संतनिगमानंद कीमौत होगई. उनकीमौत परहो रहीराजनीति मेंगंगा पृष्ठभूमिमें चलीगई. गंगानिरंतर अपनेअस्तित्व केलिए संघर्षकर रहीहै. यहहाल स़िर्फगंगा कानहीं है, देश कीसभी नदियोंकी स्थितिका़फी गंभीरहै. कईछोटी नदियांविलुप्त होगई हैंऔर कईविलुप्त होनेके कगारपर हैं. पूरे देशमें बहनेवाली गंगाजैसी बड़ीनदी कीजब यहहाल हैतो छोटीनदियों कीदर्देदास्तां कोईसुनने वालाहै नादेखने वालाहै.
उत्तर प्रदेश केगोरखपुर मेंएक नदीहै आमीनदी. यहपूर्वांचल के तीन ज़िलों सिद्धार्थनगर, बस्ती औरगोरखपुर सेहोकर बहतीहै. इसनदी मेंआसपासकी फैक्ट्रियोंका केमिकलयुक्त पानीसीधा नदीमें प्रवाहितकर दियाजाता है. इससे इसनदी कापानी इतनाज़हरीला होगया हैकि उसेपीकर कईजानवर मरचुके हैं. यही नहींनदी केकिनारे बसीआबादी कईतरह कीबीमारियों की शिकार हो रहीहै.इस नदी परबौद्ध धर्मके कुछसाक्ष्य मिलतेहैं. इसनदी केकिनारे बौद्धधर्मावलंबियों की आबादी के होनेके सुबुतमिलते है. इस ऐतिहासिकनदी केप्रदूषित होनेका कारणगोरखपुर औद्योगिकविकास प्राधिकरण, और कईअन्य इकाइयोंमें शोधनसंयंत्र नहींहोना औरसीधा औद्योगिककचरे कोइसमें बहायाजाना है. आमी नदीप्रदूषण केकारण खत्महोने केकगार परहै. इसनदी कोप्रदूषण सेबचाने केलिए कईबार जनआंदोलन शुरुतो हुआलेकिन उसकीआवाज़ कहींदब सीगई. इसनदी काऐतिहासिक महत्वहै. हिंदू, मुस्लिम आडंबरके आलोचकसंत कबीरने इसीनदी केकिनारे मगहरमें समाधिली थी. बांसगांव कीगंगा केनाम सेजानी जानेवाली यहनदी प्रदूषणके कारणअब एकपतली कालीरेखा केरूप मेंदिखाई देतीहै. इसपानी केइस्तेमाल सेआस पासके लोगोंमें त्वचारोग कीशिकायत आमहो गईहै. स्थानीयलोगों काकहना हैकि सरकारकी प्रदूषणनियंत्रण सेजु़डी संस्थाओंने इसदिशा मेंअभी तककोई पहलनहीं कीहै. व़क्तव़क्त परइस नदीकी स़फाईकी बाततो उठीउसके बावजूदइस नदीकी हालतदिनोंदिनदयनीय होतीजा रहीहै. योगीआदित्यनाथ ने कहा कि एकतऱफ तोहम नदीको मांका दर्जादेते हैंऔर दूसरीतऱफ उसमेंकचरा बहारहें हैं. आने वालेसमय मेंइसकी क़ीमतहमें चुकानीपड़ेगी. आमीनदी कोप्रदूषण मुक्तकराने के  लिए उन्होंने चरणबद्धआंदोलन कासुझाव दिया. उन्होंने उनउद्यमियों को भी चेतावनी दी, जो नदीमें कचराबहा रहेहैं. राज्यके पूर्वकैबिनेट मंत्रीएवं भाजपाके वरिष्ठनेता शिवप्रतापशुक्ल नेआमी नदीको प्रदूषणसे मुक्तकराने के  लिए शुरु हुएसंघर्ष मेंपूरापूरासहयोग देनेको कहा. बहुजन समाजपार्टी केवरिष्ठ नेताएवं गोरखपुरसंसदीय क्षेत्रसे पार्टीके उम्मीदवारविनय तिवारीने भीआश्वासन दियाकि औद्यौगिकसंस्थानों को शोधन संयंत्र लगानेके लिएमजबूर कियाजाएगा औरआमी नदीको प्रदूषणसे बचानेके लिएहर संभवप्रयास कियाजाएगा. सपाके वरिष्ठनेता राजेशसिंह काकहना हैकि सरकारकी उपेक्षापूर्णनीति केकारण यहसमस्या पैदाहुई है. शोधन संयंत्रलगाए बिनाउद्योगों कोचलाने कीअनुमति क्योंदी गईऔर प्रशासनइतने ब़डेमुद्दे परखामोश क्योंहै. कांग्रेसके वरिष्ठनेता विजेंद्रत्रिपाठी नेकहा हैकि जोनदी जीवनदायिनीथी, उसनेअब जनजीवनको बेहालकर दियाहै. औद्योगिकइकाइयों के  कचरे को नदीमें जानेसे रोकाजाए. इसनदी कीस़फाई कोलेकर बड़ीबड़ी बातेंकरने वालेलोग इसमुद्दे परभी राजनीतिकरोटियां हीसेक रहेहैं. आमजनों मेंइस बातका रोषहै. यहीवजह हैकि अबवो खुदही इसनदी कोप्रदूषण मुक्तकरना चाहतेहैं. आमीनदी केतटवर्ती गांवोंके ग्रामीणोंने इसेप्रदूषण मुक्तकरने केलिए समितियांबनाई हैं.
नदियों के प्रदूषणसे खेतीप्रभावित 
पूरे विश्व केआबादी काएक बड़ाहिस्सा मुख्यआहार केरूप मेंचावल लेताहै. भारतके लोगोंका चावलपसंदीदा आहारहै साथही भारतचावल काबहुत ब़डानिर्यातक देशभी है. भारतीय धानपर वैज्ञानिकोंद्वारा शोधकरने परआर्सेनिक कीभारी पायागया, जोमानव स्वास्थके लिएबेहद नुक़सानदायकहै. आर्सेनिककी मात्राअधिक होनेकी वजहयह हैकि य्हांफसल केसिंचाई कामुख्य साधननदियां है, जिनका पानीआर्सेनिक युक्तहै. 91 प्रजातिके धानजर्मप्लास्म के अध्ययन से पताचला हैकि उनमेंसे 52 किस्मेंकम आर्सेनिकस्तर केकारण 60 किलोवजन केव्यक्ति केलिए सुरक्षितहै जबकिबाकी मनुष्योंके सेवनके लिएअसुरक्षित है. दो विभिन्न आर्सेनिकवाली धानकी किस्मेंजीनोटाइप मेंसे छांटीगई है. निम्न आर्सेनिकसंचयक पर्याप्तसिलेनियम स्तरऔर उच्चआवश्यक अमीनोएसिड संचयकजीनोटाइप कोमध्यम आर्सेनिकप्रदूषित मिट्टीमें उगानेऔर मनुष्यके प्रयोगके लिएउपयुक्त पायागया है. ये निम्नफलित होनेवाली आर्सेनिककिस्में आणविकब्रीडिंग केमाध्यम सेउच्च उत्पादकताकी सुरक्षितधान किस्मेंबनाने मेंसहायक होसकती हैं.

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