पहले परखें फिर कॉलेज का चयन करें

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जनसंख्या की दृष्टि से भारत पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर आता है। यहां सबसे ज्यादा यूथ पॉपुलेशन है। उच्चतर शिक्षा की बात करें तो अमरीका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर आता है। वैसे तो यहां स्कूल कॉलेजेज की भरमार है, पर  सवाल यह है की इन खूबसूरत चमचमाते हुए इमारतों वाले स्कूल कॉलेजेज में अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती भी है? इस सावल का जवाब तलाशने के लिए हमने दिल्ली -एनसीआर के कुछ कॉलेजेज का जायजा लिया और उनके संचालकों से बात करने की कोशिश की। इसके लिए हमने कुछ बच्चों और संस्था के संचालकों से बात की। पेश है एक रिपोर्ट:

एडमिशन का समय शुरू होने वाला है। यही वो वक्त होता है जब एक छात्र अपने करियर का सही चुनाव करता है। एक छात्र अपनी क्षमता के अनुसार अपने विषय व प्रोफेशनल करियर में अपना भविष्य तलाशने की ओर एक कदम बढ़ाता है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने विषय का बेहतर चुनाव करें। लेकिन जितना महत्व किसी विषय के चयन का होता है, उतना ही महत्वपूर्ण है कि हम उस विषय की पढ़ाई किस संस्थान से कर रहे हैं। आज कल मार्केटिंग के तड़क-भड़क समय में कई ऐसे बिचौलिए मिल जाते हैं जो छात्रों तो बड़ी-बड़ी बातें और वादे कर एक खास संस्थान (जहां उनका वित्तिय फायदा होता है) में नामांकन करवा देता है। परेशानी तब होती है जब छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर संस्थान पर इस विश्वास में रहता है कि उसका प्लेसमेंट हो जाएगा, लेकिन अक्सर छात्रों को निराशा ही हाथ लगती है। ऐसी परिस्थिति में या तो वह अपने एप्रोच से चुने हुए विषय की ओर करियर बनाता है या रोजी-रोटी के लिए परेशान होकर दूसरी दिशा की ओर दिग्भ्रमित हो जाता है। ऐसे में छात्रों को ऐसे बिचौलिए से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
क्या-क्या रखें ध्यान
संस्थान में लाइब्रेरी की क्या स्थिति है
प्लेसमेंट के लिए कंपनियां आती हैं या नहीं
प्लेसमेंट सेल है या नहीं
पुराने बैचेज में कितने छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है
फेकल्टीज में टीचर्स का क्या बैकग्राउंड रहा है
वेब पर कॉलेज के बारे में पुराने छात्रों की क्या राय है
वादों पर ना जाए
ग्रेटर नोएडा के मैनेजमेंट कॉलेज के छात्र रजत का कहना है कि उन्होंने यहां से साल 2009 में एमबीए किया। कॉलेज ने फीस और तमाम अन्य एक्टिवीज के नाम पर उनसे कई लाख रुपए वसूल कर लिए। एडमिशन के समय उनसे खुब लुभावने वादे किए गये। प्लेसमेंट के लिए बड़ी बड़ी कंपनियों की लिस्ट दिखाई गई, लेकिन ये वादे हवा हवाई साबित हुए। यहां तक कि पढ़ाई के दौरान ट्रेनिंग तक किसी कंपनी में नहीं कराई गई। जब उन्होंने और उनके सहपाठियों ने इस बारे में वहां के मैनेजमेंट और शिक्षकों से बात की तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया और यहां तक कि छात्रों से बदसलूकी भी की गई। नोएडा स्थित एक नामी नीजी कॉलेज के छात्र अमन ने बताया कि चंूकि इस कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी अच्छा है। अपने पीआर बै्रडिंग और प्रोमोशन पर यह कॉलेज काफी रकम खर्च करता है, यही देख कर उनके जैसे छात्र छांसे में आ जाते हैं कि उनका यहां से अच्छी जगह प्लेसमेंट होगा। उन्होंने यहां से कई लाख रुपए खर्च कर के एमबीए किया। लास्ट सेमेस्टर तक कुछ कंपनियां आई तो जरूर लेकिन एक दो बच्चों का ही अच्छी जगह प्लेसमेंट हुआ और उनके हिस्से में आया इंश्योरेंस कंपनी में मार्केटिंग एग्जीक्यूटीव की नौकरी। नोएडा 62 स्थित एक फैशन इंस्टीचयूट की एडमिशन हेड ने बताया की हमारी मार्केट्रिंग स्ट्रेटजी काफी स्ट्रॉन्ग होती है। हम स्कूल कॉलेजेज में वर्कशॉप या क्विज शो कंडक्ट कराते हैं, बच्चों को फीड करने के लिए एक सीट देते हैं। उससे हमारा डेटाबेस तैयार हो जाता है। क्वीज में पूछा गया सवाल तो सिर्फ एक खाना पूर्ति होता है, जो हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं होता। हम छात्रों से लगातार संपर्क  में बने रहते हैं, उनका माइंडवॉश करते हैं की उनके करियर को हम ऊंचाई देंगे। उनका प्लेसमेंट नामी गिरामी कंपनी में होगा। ज्यादातर छात्र उत्तर प्रदेश और बिहार से आते हैं। उनके लिए यहां का चमक दमक नया होता है, ऐसे में उन्हें कनवींस करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता। हालांकि हमें यह पता होता है कि ज्यादातर बच्चों में फैशन की समझ नहीं होती, लेकिन फिर भी हमें अपना सीट भरना होता है। उक्त एडमिशन हेड कहती हैं की हालांकि हमें बुरा लगता है, क्योंकि इन छात्रों के माता पिता मेहनत की कमाई खर्च करते हैं कुछ बच्चों के घरवालें तो खेती की जमीन बेच कर भी उन्हें पढ़ाते हैं, इसके बावजूद नौकरी की कोई वारंटी नहीं होती।
क्या है असलियत
गली-मुहल्लों में उगे इन स्कूल कालेजों की हकीकत बयां काफी अलग है। इनका मकसद मात्र छात्रों से मोटी रकम वसूल करना है, जबकि पढ़ाई का स्तर बेहद निम्न होता है। छात्र का भविष्य तो भाग्य भरोसे समझिए। प्लेसमेंट के नाम पर भी बच्चों को एडमिशन के समय गुमराह किया जाता है। इन विश्वविद्यालयों में छात्रों से लाखों रुपए विभिन्न पाठ्यक्रम के लिए उसूलने के बावजूद ना तो उसके लिए उचित शिक्षक और ना ही कोई विशेषज्ञ कि समुचित व्यवस्था है। योग्य शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा माफिया का जाल पूरे देश में फैला हुआ है जो गुमराह कर के इन संस्थानों में बच्चों का दाखिला कराते हैं और अच्छा खासा कमीशन खाते हैं।
कैसे करें कॉलेज का चयन
अभी एडमीशन का सेशन चल रहा है। छात्र दुविधा में हैं संस्था के चयन को लेकर। लेकिन अच्छे संस्था का चुनाव करना एक मुश्किल प्रक्रिया है। छात्रों को कॉलेज की एक सूची तैयार करनी चाहिए, जहां उनका मनपसंद कोर्स पढ़ाया जाता हो। बजट को ध्यान में रखते हुए आप अच्छे कॉलेज का चुनाव करें। जो भी कोर्स आप करने जा रहे हैं उससे संबंधित सुविधाएं देख लें जैसे लाइब्रेरी, इंटरनेट, हॉस्टल, प्ले ग्राउंड, प्रयोगशालाएं, आदि। संस्थान की वेबसाइट को ठीक से देखें।

संस्थान चयन में पीआर और ब्रैंडिंग के मकड़जाल से बचें। संस्थान की मान्यता, उसकी संबद्धता किस आधार पर मिली है, उस पर वह कितना खरा उतरता है देख लें। इससे गुमराह होने के चांसेज काफी कम हो जाते हैं। फैकल्टी भी देख लें, फैकल्टी को पहली प्राथमिकता दें। इसके अलावा, टीचर्स का बैक ग्राउंड उसकी योग्यता भी देख लें।
शैलेंद्र कुलकर्णी शिक्षाविद्

संस्थानों को चाहिए कि वह छात्रों के प्लेसमेंट के विषय में निष्पक्षता बरते। एक बैच में स्टूडेंट्स की संख्या और उनमें से जिन छात्रों का प्लेसमेंट होता है, उसे आॅनलाइन करें। ऐसा करने से छात्र उस संस्थान के रिकॉर्ड के बारे में बेहतर जान सकते हैं। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन के मद्देनजर अर्जुन कहते हैं कि छात्रों का बड़ा हुजूम नामांकन की ख्वाहिश में रहता है। ऐसे में वहां भी शीर्ष प्रबंधन को चाहिए कि जिन छात्रों का सेलेक्शन हो, उन्हें मोबाइल मैसेज भेजने की सुविधा हो।

अर्जुन दत्ता
(चीफ आॅपरेटिंग आॅफिसर इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ कुलीनरी आर्ट्स, दिल्ली)

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