निर्देशन और अभिनय दोनों में माहिर

0
516
views

बॉलीवुड में कई ऐसे हीरो हैं, जो स्क्रीन पर अस़फल होने के बाद कैमरे के पीछे चले गए. इनमें से कुछ सफल रहे, तो कुछ असफल. दूसरी ओर इंडस्ट्री में कुछ ऐसे फिल्म निर्देशक भी हैं, जो अपने निर्देशन का लोहा मनवाने के  बाद अभिनय में उतरे और जिन्होंने पर्दे के आगे भी अपनी बेहतरीन अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया. दरअसल, उन्होंने यह प्रूव किया कि वे अगर अभिनय करा सकते हैं, तो वे खुद बेहतर अभिनय कर भी सकते हैं. 

बॉलीवुड के कई ब़डे सितारे, जिनके लाखों-करोड़ों फैन्स हैं, वे अपने करियर के शरुआती दौर में फिल्म अभिनेता नहीं, बल्कि फिल्म निर्देशक  बनना चाहते थे. केएल सहगल, गुरुदत्त, राजकपूर, सुनील दत्त, रंजीत जैसे कई फिल्मकारों ने निर्देशन और अभिनय दोनों में हाथ आजमाया और उन्हें दर्शकों ने भी बेहद सराहा. अब यदि आज के फिल्मकारों की बात करें, तो ऐसे कई कलाकार हैं, जो कैमरे के पीछे रह कर काम करना ज़्यादा पसंद करते हैं. सच तो यह है कि लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड के दबंग सलमान खान फिल्म अभिनेता नहीं बल्कि निर्देशक बनना चाहते थे, लेकिन उनकी पर्सनैलिटी की वजह से उन्हें फिल्मों के ऑफर्स मिलने लगे और इसीलिए वह लगातार फिल्में करते गए. अब देखिए, आज वे सुपरस्टार हैं. ठीक इसी तरह अजय देवगन ने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के साथ उनके सहायक के रूप में काम करना शुरू कर दिया.

इसी दौरान उनकी मुलाकात कुक्कू कोहली से हुई. कुक्कू उन दिनों अपनी फिल्म फूल और कांटे के निर्माण में व्यस्त थे. दरअसल, उन्हें एक ऐसे अभिनेता की तलाश थी, जो न केवल रोमैंटिक हो, बल्कि ऐक्शन भी कर सके. स्क्रीन टेस्ट के बाद अजय उनकी पसंद पर खरे उतरे. फिल्म के हीरो का रोल उन्होंने अजय को ऑफर किया. फिल्म सुपरहिट हुई और उनकी डिमांड भी बढ़ गई और आज वह स्टार हैं. वहीं दूसरी ओर इश्कजादे में अपनी बेहतरीन अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता अर्जुन कपूर भी फिल्म निर्देशक बनना चाहते थे. गौरतलब है कि उन्होंने असिस्टेंट डाइरेक्टर बन कर कल हो ना हो और सलाम-ए-इश्क जैसी फिल्में भी निर्देशित की. तभी एक मुलाकात के दौरान सलमान ने उनसे कहा कि वह फिल्मों में बतौर हीरो क्यों नहीं ट्राई करते. इसी बीच इश्कजादे के कास्टिंग डाइरेक्टर शानू शर्मा की उन पर नज़र प़डी और उन्होंने अर्जुन को फिल्म ऑफर किया, जिसे अर्जुन नकार न सके. इस तरह वह निर्देशक बनते-बनते एक अभिनेता बन गए.

हालांकि ये तो वे अभिनेता हैं, जिन्हें अपने करियर के शुरुआती दौर में ही फिल्में मिलती गईं और उन्होंने अभिनय की दुनिया में भी एक अलग पहचान बना ली. जबकि बॉलीवुड में कुछ ऐसे निर्देशक भी हैं, जो न स़िर्फ बेहतरीन निर्देशक हैं, बल्कि जब मौक़ा मिला, तो उन्होंने फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा भी मनवाया. उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे यदि अभिनय करा सकते हैं, तो वे स्वयं बेहतर अभिनय भी कर सकते हैं. हम सब जानते हैं कि निर्देशक से अभिनेता बने तिग्मांशु धुलिया ने हासिल, चरस, साहब बीवी और गैंगस्टर, पान सिंह तोमर सहित कई अच्छी और ऑफबीट फिल्मों का निर्देशन किया है. दर्शकों ने उन्हें एक अभिनेता के रूप में गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म में देखा. फिल्म के दोनों पार्ट्स में तिग्मांशु की महत्वपूर्ण भूमिका थी. फिल्म की कहानी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है. रामाधीर सिंह की उनकी भूमिका को दर्शकों ने खूब पसंद किया. तिग्मांशु जल्द ही केतन मेहता की फिल्म माउंटेन मैन में अभिनय करते दिखेंगे. कहानी बिहार के दशरथ मांझी की ज़िंदगी पर आधारित है, जिन्होंने अपने गांव से शहर की तरफ एक सड़क बनाने के लिए पहाड़ को तोड़ डाला था. मेहता की इस फिल्म में तिग्मांशु एक बार फिर नकारात्मक किरदार में नज़र आएंगे. इस फिल्म की कहानी बीआर चोपड़ा की फिल्म नया दौर से मिलती है.

निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप लीक से हट कर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि अनुराग ने कुछेक फिल्मों में अभिनय भी किया है. तिग्मांशु के निर्देशन में बनी फिल्म शागिर्द में न केवल अनुराग डॉन बने नज़र आए, बल्कि उनके अभिनय और डायलॉग्स की खूब सराहना भी हुई. वह एक अन्य मल्टीस्टारर फिल्म आईएम में भी नज़र आए. फिल्म निर्देशक अमोल गुप्ते कितने अच्छे अभिनेता हैं, यह उनकी फिल्म कमीने और स्टेनली का डिब्बा देखने पर पता चल जाता है. जहां कमीने में वह मुंबईया डॉन की भूमिका में थे, तो वहीं स्टेनली का डिब्बा में वह एक टीचर के रोल में थे. ज़रा गौर फरमाइए वर्ष 2010 में आई फिल्म फंस गए रे ओबामा में वह एक नेता की भूमिका में थे. गौरतलब है कि अमोल कई मराठी फिल्मों के साथ ही साथ तारे जमीं पर और स्टेनली का डिब्बा जैसी फिल्में भी निर्देशित कर चुके हैं. इन फिल्मों में वह निगेटिव किरदार में भी दर्शकों का मनोरंजन करते नज़र आए. बॉलीवुड के एक और डायरेक्टर हैं फरहान अख्तर, जो कि एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी टैलेंट के मालिक हैं. फरहान स्क्रिप्ट लिखते हैं, निर्देशित करते हैं, गाने लिखते हैं, गाते हैं और अभिनय भी करते हैं. न स़िर्फ कैमरे के पीछे, बल्कि कैमरे के आगे भी वह स्टार हैं. फरहान फिल्म दिल चाहता है से निर्देशन में उतरे. इसके बाद उन्होंने लक्ष्य, डॉन, डॉन 2 जैसी स़फल फिल्मों का निर्देशन किया. दरअसल, उन्होंने फिल्म रॉक ऑन से अभिनय की दुनिया में क़दम रखा. हाल ही में निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा की फिल्म भाग मिल्खा भाग में वह लीड रोल में नज़र आए.

महेश मांजरेकर को क्या कहें, अभिनेता या निर्देशक! उन्होंने कई सफल फिल्में बनाईं, तो कई सफल फिल्मों में शानदार अभिनय भी किया. उन्होंने वास्तव, कुरुक्षेत्र, अस्तित्व जैसी कई सफल फिल्में दी. धीरे-धीरे उनका रुझान अभिनय की तऱफ ब़ढा और उसके बाद उन्हें अभिनय ही रास आने लगा. पहली बार वह 2003 में फिल्म कांटे में दिखे थे. बाद में वह प्लान, रन, वांटेड, तीन पत्ती, दबंग, रेडी, बॉडीगॉर्ड समेत कई फिल्मों में भी बेहतरीन अभिनय करते हुए दिखे. उन्होंने फिल्मों में हर तरह का रोल किया.

कालिया, शहंशाह, मैं आजाद हूं और मेजर साहब जैसी स़फल फिल्मों का निर्देशन करने वाले टीनू आंनद कैमरे के आगे भी का़फी सफल हैं. हालांकि अब उनकी पहचान एक अभिनेता के रूप में ही बन गई है. उन्होंने हर तरह की भूमिकाएं कीं. एक तरफ वह सामाजिक भूमिका वाली फिल्मों में नज़र आए, तो वहीं दूसरी ओर नकारात्मक भूमिका में भी दिखे.

सुधीर मिश्रा की वर्ष 2006 में एक फिल्म आई थी, हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी. इस फिल्म को अपार सफलता मिली और इसके बाद सुधीर को उम्दा निर्देशकों में गिना जाने लगा. यह बहुत कम लोग जानते हैं कि सुधीर अच्छे अभिनेता भी हैं. गौरतलब है कि मधुर भंडारकार की फिल्म ट्रैफिक सिग्नल में वह अभिनय करते नज़र आए थे. इस फिल्म में उनकी भूमिका माफिया डॉन की थी, जिसे काफी सराहा गया.

निर्देशक निशिकांत कामत ने कुछ ही हिंदी फिल्में बनाई हैं, लेकिन वह साउथ के जाने माने निर्देशक हैं. उन्होंने हिंदी में मुंबई ब्लास्ट पर एक फिल्म बनाई थी. इस फिल्म का नाम था मुंबई मेरी जान. कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने फिल्मों में अभिनय भी किया है. कामत  प्रवाल रमन की साईकोलॉजिकल फिल्म 404 एरर में प्रोफेसर अनिरुद्ध की भूमिका में दिखे. इसके अलावा, बॉलीवुड के एक और प्रसिद्ध निर्देशक रोहित शेट्ठी भी यदा-कदा फिल्मों में अभिनय करते नज़र आ जाते हैं. रोहित हास्य फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. वे  गोलमाल, गोलमाल रिटर्न्स, ऑल द बेस्ट, सिंघम, बोल बच्चन जैसी उम्दा कॉमेडी फिल्मों के निर्देशक के रूप में जाने जाते हैं. वे कई फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाओं में भी दिखे. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में आई उनकी फिल्म में भी वह अभिनय करते दिखे थे.

Leave a Reply