दलालों को अस्पताल में ढूँढ़नेवाले प्रशानिक गुंडा महोदय खुद ही निकले दलालों के सरदार: dr om shankar (bhu)

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अभी कुछ दिन पहले एस0 एस0 हॉस्पिटल के एक उच्च अधिकारी महोदय ने अपनी रोटी सेंकने या यूँ कह दें कि अपने राह के सबसे बड़े रोड़े को रस्ते से हटाने के लिए कुलपति महोदय से अस्पताल में छापा मरवाकर अपने आप को सबसे बड़ा ईमानदार और अपने राह में खड़े प्रतीत होनेवाले प्रतिस्पर्धी एक अतिसम्मानित व्यक्ति को निचा दिखाने का बहुत ही घिनौना कार्य किया था। जिसकी भनक तक कुलपति महोदय को नहीं लगने दी और एक तीर से कई शिकार कर डाले।

यही नहीं असली दलाल को भगाकर निर्दोष मेडिकल रिप्रजेंटेटिव को न सिर्फ बेइज्जत किया बल्कि कुलपति महोदय के समक्ष अपना चरित्र चमकाने के लिए उनलोगों की पहले तो पिटाई की और फिर उनके ऊपर ही फर्जी केस भी डलवा दी।

परंतु आज इस महोदय की एक काली करतूत सामने आई है जो इनको पुरे हमाम में नंगा करने के लिए काफी है।

निचे की तीन बोतलों को जरा गौर से देखिये।

सबसे बायीं वाली बोतल को रंगीला बनाकर (असल में दावा का रंग ब्राउन होना चाहिए था जो हलके पिले रंग की है क्योंकि ये नकली है ,छुपाने के लिए बोतल का रंग ब्राउन करके बेवकूफ बनाने की कोशिश की गयी हैें) किस तरह इस महाशय ने हॉस्पिटल की दवाइयों में गरबर झाला मचाने का प्रयास किया है इसका पोल तब खुलता नज़र आएगा जब आप बीच वाली बोतल (ये पहली वाली डुप्लीकेट रंगीले बोतल की ही दावा है जिसकी सच्चाई को आपलोगों के सामने लाने के लिए मैंने एक पारदर्शी बोतल में तुलनात्मक अध्ययन के लिए डाला है) पर गौर फरमाएंगे।

दरअसल इन साडी बोतलों के अंदर एक ही तरह की दावा है जिसको “पोविडोने आयोडीन” कहते हैं।जो एंटीसेप्टिक होता है और जिनका कार्य इन्फेक्शन रोकना होता है।

ये असल में ब्राउन रंग का होता है (जैसा की आप जब तीसरी बोतल को देखेंगे तो खुद ब खुद समझ आ जायेगा)।

ब्राउन रंग ही इसके असली होने की पहचान है क्योंकि आयोडीन का रंग ब्राउन होता है जो की एंटीसेप्टिक का काम करता है। इसके बारे में प्रकाशित शोध भी इसकी पुष्टि करता है।

Previously, the toxic effects of iodine limited its use to preparation of the skin for surgery. When bound to the pyrrolidine molecule, iodine becomes water soluble and markedly less toxic. As a result, the broad antimicrobial spectrum of iodine may be used topically to control wound sepsis. It can be applied to mucosal surfaces without producing burns.

The brown color acts as an indicator of its clinical effectiveness.

तीसरी बोतल/सबसे दहीनेवाली बोतल में भरी दवा असली है जबकि पहलीवाली दोनों बोतलों में रक्खी दवा नकली है।

इस नकली दवा को दलालों के सरदार,रक्तपिचाश अथवा प्रशासनिक गुंडे जी ने जन औषधि केंद्र से, हॉस्पिटल सप्लाई के लिए खरीदी है खुद दलाली खाकर ।

इस नकली दवा को एस0 एस0 अस्पताल में खुले आम आजकल हर शल्य विभाग को सप्लाई भी किया जा रहा है।

इससे न सिर्फ मरीजों को शल्यक्रिया के तत्पश्चात इन्फेक्शन होने का डर है बल्कि कुछ की तो जान भी जा सकती है।

क्या मौत के ऐसे सौदागर तथा इस प्रशासनिक गुंडे महोदय का अब भी अपने पद पर बना रहना न्यायोचित है????
dr .om shankar post 

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