घुटनों की परेशानी से छुटकारा पाएं

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बदलते वक्त के साथ चिकित्सा के क्षेत्र में रोज नए प्रयोग हो रहे हैं, जिससे बढ़ते उम्र के साथ स्वास्थ संबंधी मुश्किलों को कम किया जा सकता है। आम तौर पर माना जाता है कि बढ़ते उम्र के साथ लोगों को चलने फिरने में तकलीफ होने लगती है। लेकिन अब आप इस तकलीफ से छुटकारा पा सकते हैं।

अपके बेकार हो चुके घुटने नी रिप्लेसमेंट (बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी) के बाद फिर से काम कर सकते हैं। इसका फायदा पुरूष और महिला दोनों समान रूप से उठा रहे हैं। 70 – 75 साल की उम्र में भी आप यह सर्जरी करा सकते हैं।  पिछले दिनों इंदौर की एक सास और बहु दोनों ने एक अपने दोनों घुटने की सर्जरी कराई। नयी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ आथोर्पेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लसमेंट सर्जन डॉ. राजू वैश्य दोनों सास बहु की सर्जरी की। डॉ. राजू वैश्य ने बताया कि वक्त के साथ अब लोगों के नजरियां में काफी बदलाव आया है। पहले जहां लोग वक्त  से पहले ही खुद को बुढ़ा मान लेते थे, वहीं अब लोग बुढापे में भी स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं।  इंदौर की 85 वर्षीय गिरिजा देवी और उनकी 61 वर्षीय बहू दोनों ही घुटनों की गंभीर ओस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थी। दोनों की सर्जरी एक साथ अपोलो अस्प्ताल (इंदौर) में हुई। सर्जरी के एक सप्ताह बाद दोनों को अस्पताल से अब छुट्टी दे दी गई है। अब दोनों अपने पैरों पर चल फिर सकती हैं।

डॉ. वैश्य कहते हैं कि गिरिजा देवी अपने उम्र की महिलाओं के लिए एक मिशाल हैं कि 85 साल की उम्र में भी आप आपने पैरों पर आसानी से चल फिर सकते हैं। राजु वैश्य कहते हैं कि अगर बहुत अधिक उम्र के मरीज चिकित्सकीय तौर पर पूरी तरह से फिट हों तो वे घुटना बदलवाने की सर्जरी का लाभ ले सकते हैं। डॉ. राजू इससे पूर्व 2011 में 93 वर्ष के मरीज – श्री एस. एन. भट्ट के दोनों घुटनों को बदलने की सर्जरी की थी। यह आॅपरेशन सिंगल सिटिंग में एक ही एनेस्थिसिया में पूरा किया गया। इस सर्जरी को जनवरी, 2012 में लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इसके छह माह बाद, डॉ. राजू वैष्य ने श्री भट्ट की 86 वर्षीय पत्नी श्रीमती विजय लक्ष्मी भट्ट के दोनों घुटनों को बदलने की सर्जरी की। श्री एस. एन. भट्ट एवं उनकी पत्नी विजय लक्ष्मी भट्ट ने सिंगल सिटिंग के आॅपरेशन में अपने दोनों घुटनों को बदलवाने वाले देश के सर्वाधिक बुजुर्ग दंपति बनने का गौरव हासिल किया। डॉ. राजू वैश्य कहते हैं कि हालांकि अभी भी बहुत से लोग नी रिप्लेसमेंट के लाभ से वंचित हैं, क्योंकि अभी भी लोगों में इसे लेकर काफी कम जागरूकता है।

बदलती जीवनशैली के कारण लोग वक्त से पहले ही कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उनमें से घुटने की समस्या भी एक है। आजकल लोगों के घुटने कम उम्र में ही बेकार हो रहे हैं। इसकी वजह है उनकी जीवनशैली। आजकल काफी कम उम्र में लोगों को नी रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ रही है। इसका कारण है आर्थराइटिस जैसी बीमारी। डॉक्टर राजू कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज भी आजकल इस बीमारी की वजह बन रही है। और इसका आखिरी विकल्प नी रिप्लेसमेंट ही है।

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