घर से बाहर रहना परेशानियां और फूल एंज्वायमेंट भी

0
507
views

बड़े शहरों में करियर की अपार संभावनाएं होने के कारण लड़कियां यहां ज्यादा तादाद में आती हैं. इनमें से काफी लड़कियों मीडिल क्लास परिवारों की होती हैं. जहां मां बाप के साथ रहते वो घर परिवार की तमाम जिम्मेदारियों से दूर रहती हैं, वहीं घर से बाहर रहने पर उनपर करियर, पढ़ाई और नौकरी के साथ घर की जिम्मेदारियों का भी बोझ उठाना पड़ता है. इन शहरों की अलग समस्याएं हैं.  बड़े शहरों में घर मिलना सबसे बड़ी परेशानी हैं, हर कदम पर पैसे की जरुरत होती हैं. यहां तक कि मेट्रोज में पानी के भी पैसे लगते हैं. हर चीज के दोगुने पैसे लगते हैं. हालांकि लड़कियों की एक खास बात होती है कि वो किसी भी नए माहौल में खुद को एडजस्ट कर लेती हैं.


घर से बाहर रहना स्वच्छंदता से जीवन जीना भी उनके लिए एक नया एक्सपीरिएंस होता है. वो अपनी मर्जी के अनुसार जीवन जीती हैं और दोस्तों के सााथ जीवन के हर पल को एंज्वाय करती है. भारतीय समाज में पुरू षों को काफी हद तक अपने इच्छानुसार जीवन जीने या कहीं आने-जाने की स्वतंत्रता मिल जाती है, लेकिन कई परिवार चाहे कितना ही आधुनिक और खुले विचार वाला क्यों ना हो, बेटियों को ज्यादा स्वतंत्रता देने से बचता ही है. पुरुषों की अपेक्षा युवतियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं. ऐसे में जब उन्हें कोई रोकने टोकने वाला ना हो किसी तरह का प्रतिबंध ना हो तो घर से बाहर मिलने वाली तमाम परेशानियों के साथ एडजस्ट कर लेती हैं. महानगरों में सबसे बड़ी समस्या घर की होती है, एक तो यहां जल्दी घर मिलते नहीं और मिल भी जाए तो उसका किराया किसी अकेले दे पाना किसी एक लड़की के वश की बात नहीं होती. ऐसे में दो-तीन या चार के समूह में लड़कियां रहती हैं. इससे इतने बड़े शहर में अकेलापन तो दूर हो ही जाता है, साथ ही उनकी पैसे में भी शेयरिंग भी हो जाती है. लेकिन अलग अलग माहौल और जगहों से निकलकर आई इन लड़कियों को साथ रहते कई तरह की परेशानियां भी उठानी पड़ती हैं. 


आदतों में भिन्नता भी परेशानी की वजह 
कई बार लडकियों में अच्छी तालमेल बैठ जाता है तो कई बार इसका अभाव होता है जिससे उनके बीच की परेशानियां बढ़ जाती हैं. लडकियां जब साथ रहती हैं तो उनकी आदतें और व्यवहार अलग अलग होता है, ऐसे में कई बार एडजस्ट करना काफी मुस्किल हो जाता है. ममता दिल्ली जैसे शहर में अकेले रुम लेकर रहती थी उसकी सैलरी का काफी हिस्सा रुमरेंट में ही चला जाता था. एकदिन उसकी स्कूल फ्रेंड अंकिता का फोन आया कि उसकी नौकरी दिल्ली के  किसी मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई है तो ममता की खुशी का ठिकाना न रहा कि अंकिता के आ जाने से उसका अके लापन तो दूर हो ही जाएगा साथ ही उसके साथ शेयरिंग भी हो जाएगी.  लेकिन अंकिता के आने के बाद उसके व्यवहार और तौर तरीकों से ममता की उम्मीदों पर पानी फिर गया. अंकिता अपने मां बाप की लाडली बेटी थी. घर के किसी काम को भूलकर भी हाथ नहीं लगाती थी. अपना सामान और अपने कपड़े बिखेर कर रखती. वहीं ममता सफाई पसंद थी और अंकिता की आदत थी कई बार बिना स्लिपर पहने बिस्तर पर बैठ जाना. यह सब देखकर ममता अंदर ही अंदर कुढ़ जाती. इन सब बातों से कई बार ममता का मुड काफी खराब हो जाता. 

रहन-सहन और शौक दूसरों की परेशानी की वजह
 एक साथ रहने वाली ये लड़कियां अलग अलग माहौल और परिवेश से होती है. जिसके वजह से उनके विचारों में काफी असमानता होती है. नताशा और अंजली साथ साथ रहती हैं. अंजली उत्तर प्रदेश की रहने वाली है तो नताशा नॉर्थ इस्ट की. दोनों में अच्छी सहेलियां हैं, लेकिन कई बार रहन सहन में अंतर के कारण एक का शौक दूसरे की परेशानी की वजह बन जाता है. नताशा के देर रात तक बाहर रहने, एल्कोहल लेने की और देर रात तक फोन पर बातें करने की आदत है. जबकि अंजली वक्त की पाबंद है. मारिया की इन आदतों की वजह से कई बार उसके शांति में खलल पैदा हो जाता है. 

पैसा से भी बढ़ती हैं दुरियां 
प्राची और विनीता रूममेट हैं. जहां प्राची एक नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती हैं वहीं विनीता एक मीडिया हाउस में कार्यरत है. प्राची अपने मां-बाप की इकलच्च्ती संतान है, उसपर किसी भी तरह की कच्ई जिम्मेदारी नहीं है. प्राची की सैलरी भी काफी अच्छी है, ऐसे में वह खुले हाथों खर्च करती है. वहीं विनीता की सैलरी काफी कम है, जिसमें वह दिल्ली जैसे बड़े शहर में मुश्किल से गुजारा कर पाती है. इसमें भी वह क ोशिश करती है की अपने पिता की मदद कर पाए. वहीं प्राची विकेंड पर कभी घर में नहीं रूकती, ढ़ेर सारी शॉपिंग करना, बाहर खाना और फिल्म देखना उसका शौक है. वह विनीता को भी साथ चलने को कहती है और उसके ना कहने पर लंबा सा भाषण दे देती है कि यही तो  उम्र है उनके  घुमने फिरने के . क्या करेगी इतने पैसे बचाकर. ऐसे में विनीता कई बार दुखी हो जाती है. 

दो से ज्यादा रूममेट साथ रहे तो समस्याएं 
महानगर की महंगाई को देखते हुए कई अलग अलग शहरों से आई लडकियां दो तीन या चार के गु्रप में रहती है. सूची और अर्चना मिडिल क्लास फैमली से हैं. दोनों नोएडा में रहकर एमसीए कर रही हैं. पहले वो पीजी में रहती थी, लेकिन वहां का रहन सहन और खान पान उन्हें पसंद नहीं आया. इसलिए उन्होंने फ्लैट लेकर रहने का फैसला किया. लेकिन फ्लैट का रेंट दोनों के शेयरिंग के  बाद भी ज्यादा था, ऐसे में उन्होंने तीसरी रुममेट रखने का फैसला लिया. स्नेहा के  रुप में उन्हें नई रूममेट मिली. वह दोनों में जल्दी ही घूलमिल गई. दोनों की नजर में उसने अच्छी इमेज बना ली, लेकिन वह काफी शातिर थी. फुट डालो और राज करो की नीति पर दोनों में झगड़े कराती और खुद मजे करती. एक दूसरे के पीठ पीछे झगडे लगाती, दोनों की बुराई एक दूसरे से करती और सामने एक दूसरे के सामने तारीफ करती. वह दोनों के झगड़े पर अलग अलग झुठी सहानुभ्ूति दिखाती. जिससे दोनों एक दूसरे से कटी कटी सी रहने लगी. एकदिन सूची और अर्चना के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था, उस दौरान उन्हें पता चला कि उन्हें तो एक दूसरे से इतनी शिकायतें तो थी ही नहीं. 

शौक पूरे करने के लिए चोरी भी 
कई बार जब तीन या चार लड़कियां साथ रहती हैं तो चोरी का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. पढ़ाई या नौकरी के  लिए छोटे शहर से बडेÞ शहरों में आई लडकियां को महानगर की चकाचौंध काफी प्रभावित करती है. कभी मैक्डी तो कभी पिज्जा हट, ढेÞर सारी शॉपिंग और डिस्क का शौक पूरा करने के  लिए उनके  पास पैसे कम पड़ते हैं. इस शौक को पूरा करने के  लिए वह चोरी तक कर बैठती हैं. निशा, प्रिया, शालिनी और नव्या एक साथ रहती थी. उनके  घर में अचानक चोरियां होने लगी. २00. 400 और कुछ सामान तक की चोरी तक तो किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन हद तो तब हो गई जब नव्या के  घर से आए रूमरेंट और उसक  महीने के खर्चें के पैसे गायब हो गए. सबने अपनी अपनी सफाई दिए कि उन्होंने पैसे नहीं लिए, शालिनी ने अपनी सफाई में कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं हैं और घर से भी पैसे आने में भी 8.10 दिन लगेंगे. उसके पास बहुत कम पैसे बचे हैं, जिससे वह अपने खर्चें चला रही है. प्रिया और शालिनी एक ही कॉलेज में पढ़ती थी. प्रिया के फ्रेंड्स ने जब बताया कि शालिनी ने सबको पार्टी दी थी और वह उनके साथ क्यों नहीं आई तो उसे लगा कि यह कारनामा शालिनी की ही हो सकती है. 

Leave a Reply