गर्भाशय कैंसर सयंमित जीवन शैली सबसे बड़ा बचाव

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सरे तमाम कैंसरोंकी तरहगर्भाशय कैंसरकी वजहभी एचपीवीहै. यूटरसमहिला कारिप्रोडक्टिव ऑर्गेन होता है. यहवह जगहहै, जहांबच्चा विकसितहोता है. दरअसल, यूटरसमें दोपर्त होतीहैं, मायमेट्रियम(बाहरी पर्त) और एंडोमेट्रियम(आंतरिक पर्त). जब कोईमहिला गर्भवतीहोती है, तो एंडोमेट्रियमदिनोंदिन मोटीहोने लगतीहै. एगफर्टाइल नहींहोता, तबवह पीरियडके दौरानबाहर निकलजाता है. जब महिलाओवरी सेएग रिलीजकरती है, तो वहफैलोपियन ट्यूबसे यूटरसमें चलाजाता है, जहां वहफर्टिलाइज होकर बच्चे के रूपमें बड़ाहोता है. हालांकि, मेनोपॉजके बादपीरियड नहींआते औरमहिला उसकेबाद मांनहीं बनपाती, तबयूटरस दिनोंदिनछोटा होताचला जाताहै औरएंडोमेट्रियम पतला और निष्क्रिय होताजाता है. यही वहसमय होताहै, जबमहिलाओं मेंगर्भाशय कैंसरकी आशंकाबढ़ जातीहै

वजह : आम तौरपर शरीरमें पुरानेसेल्स मरतेऔर नएसेल्स बनतेरहते हैं. सामान्यत: शरीर की ज़रूरतों केअनुसार सेल्सबनते हैं, विकसित होतेहैं, पुरानेहोते हैं, डैमेज होतेहैं औरमर जातेहैं. फिरनए सेल्सउनकी जगहले लेतेहैं. कईबार यहप्रक्रिया गलत हो जाती है. शरीर कोज़रूरत नहींहोती, फिरभी नएसेल्स बनजाते हैंऔर पुरानेडैमेज सेल्सभी ख़त्मनहीं होपाते. येअधिक सेल्सट्यूमर कारूप लेलेते हैं. कई बारएंडोमेट्रियम में सेल्स की असामान्यतरीके सेवृद्धि होनेलगती है. एस्ट्रोजन आवश्यकता से अधिक बननेके कारणमहिलाओं मेंएंडोमेट्रियम हाइपरप्लाज्मिया की समस्याहोती है. यूटरस कीदीवार परअसामान्य तरीकेसे सेल्सकी वृद्धिगर्भाशय कैंसरकी वजहबन सकतीहै. यूटरसकी दीवारपर हाइपरप्लाज्मिया काबनना हमेशाकैंसर नहींहोता, लेकिनकई बारयह कैंसरका रूपले लेताहै. महिलाओंमें हाइपरप्लाज्मिया कीसमस्या 40 साल की उम्र केबाद शुरूहोती है. ऐसे मेंडॉक्टर यूटरसको रिमूवकरने कीसलाह देतेहैं. इसकेअलावा पीरियड्सके दौरानअत्यधिक ब्लीडिंगहोना, मेनोपॉजके बादभी ब्लीडिंगहोना, दोपीरियड्स केबीच मेंब्लीडिंग होनाभी इसकीवजह है.
इसके अलावा जोमहिला कभीमां बनी हो, जिसने कभीहार्मोन थेरेपीली हो, एस्ट्रोजन लिया हो बिना प्रोजेस्टेरॉनके, जिसकेपरिवार मेंगर्भाशय कैंसर, ओवरियन कैंसर, एंडोमेट्रियल और बे्रस्ट कैंसर काइतिहास रहाहो, उसेभी गर्भाशयकैंसर कीआशंका बढ़जाती है. 60 साल कीमहिलाओं मेंइस बीमारीका प्रभावज़्यादा देखागया है, लेकिन अब40 साल कीमहिलाओं मेंभी यहसमस्या आमहै. हाईब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन एवं डायबिटीज के मरीजोंमें भीगर्भाशय कैंसरकी आशंकाज़्यादा होतीहै. जिनमहिलाओं मेंज़्यादा मात्रामें एस्ट्रोजनका स्रावहोता है, उनमें भीएंडोमेट्रियल कैंसर की आशंका होतीहै. ओवरवेटमहिलाएं, जोफिजिकल वर्कआउट नहींकरतीं, उनमेंज़्यादा मात्रामें लगातारएस्ट्रोजन का स्राव होता है. ज़्यादा वसायुक्तभोजन भीगर्भाशयस कैंसरके जोखिमकोबढ़ाता है.
लक्षण
नब्बे प्रतिशत महिलाओंमें गर्भाशयकैंसर कीशुरुआती अवस्थामें ब्लीडिंगहोती हैऔर कोईलक्षण सामनेनहीं आता. इसके अलावामेनोपॉज केबाद भीलगातार ब्लीडिंगहोना (हालांकिकुछ महिलाओंको ब्लीडिंगनहीं होती, डिस्चार्ज होता है), एब्डोमेन मेंदर्द होना, यूरिन मेंदर्द होना, शारीरिक संबंधबनाने केदौरान दर्दहोना आदिगर्भाशय कैंसरके लक्षणहैं. एडवांसस्टेज मेंपेल्विक पेन, वजन कमहोना औरएब्डोमेन मेंदर्द इसकेलक्षण हैं.
जांच
पेल्विक एक्जाम: इसकेतहत गर्भाशय, गुप्तांग औरउसके आसपासकी कोशिकाओंकी जांचकी जातीहै किकहीं आकारऔर आकृतिमें कोईबदलाव तोनहीं आयाहै.
पैप स्मियर टेस्ट: इस टेस्टसे यूटरसकैंसर डिटेक्टनहीं कियाजा सकता. इसकी बनावटऐसी होतीहै किइससे सर्विक्सके कैंसरका तोपता लगायाजा सकताहै, परगर्भाशय केकैंसर कानहीं. कईबार इसटेस्ट सेगर्भाशय कैंसरके बारेमें पताचल जाताहै, परकई बारयह असफलभी होजाता है.
ट्रांसवजायन अल्ट्रासाउंड: एकछोटेसीडिवाइस, जिसेट्रांसड्यूसरकहते हैं, गुप्तांग केअंदर डालीजाती है. इससे गुप्तांगकी आंतरिकस्थिति पताचल जातीहै. इसमेंओवरीज एवंयूटरस केआकारआकृतिऔर एंड्रोमेट्रियमकी मोटाईका पताचल जाताहै. गड़बड़ीमहसूस होनेपर डॉक्टरबायोप्सी कीसलाह देतेहैं.
हिस्टोरोस्कोपी और बायोप्सी: हिस्टोरोस्कोपी में डॉक्टर गर्भाशय कीआंतरिक स्थितिका जायजालेते हैं. टेलिस्कोप जैसी एक डिवाइस होतीहै, जिसेहिस्टोरोस्कोप कहते हैं. इसके द्वारागर्भाशय सेकुछ कोशिकाएंनिकाल करलेबोरेटरी में जांच के लिएभेजी जातीहैं. बायोप्सीमें भीगर्भाशय सेकुछ कोशिकाएंनिकाली जातीहैं. इसमेंकई बारएनेस्थेसिया भी देना पड़ता है. इस दौरानकुछ घंटेअस्पताल मेंरुकना पड़सकता है. इस टेस्टके बादकुछ दिनोंतक हल्कीब्लीडिंग भीहो सकतीहै. इसकेअलावा, कैंसरकी आशंकाहोने परसीटी स्कैन, एमआरआई औरपेट (पॉजिट्रानएमीशन टोमोग्राफी) स्कैन भीकिया जाताहै.
अवस्थाएं
पहले अवस्था मेंकैंसर सेस़िर्फ गर्भाशय(यूटरस) प्रभावितहोता है. दूसरी अवस्थामें यहसर्विक्स तकफैल जाताहै. तीसरीअवस्था मेंयह ओवरिज, फैलोपियन ट्यूब्स, वजायना एवंलिम्फ नोड्सतक पहुंचजाता है. चौथी अवस्थामें यहब्लैडर, रेक्टम, एब्डोमेन औरशरीर केअन्य हिस्सोंमें फैलजाता है.
इलाज
हिस्टेरेक्टॉमी: एंडोमेट्रियल कैंसरमें यूटरसरिमूव करदिया जाताहै. इसमेंभी सर्जरी, रेडिएशन थेरेपीएवं किमोथेरेपीद्वारा इलाजकिया जाताहै. इलाजके दौराननौसिया, एब्डोमिनलपेन जैसीसमस्या आमहै. रेडिएशनके बादवजायना कापेल्विक एरियासिकुड़ता चलाजाता है. इससे शारीरिकसंपर्क केदौरान दर्दहो सकताहै. इसकेअलावा, इलाजके बादमहिला मांनहीं बनसकती.
कैसे बचें
गर्भाशय कैंसर सेकाफी हदतक बचाजा सकताहै. इसकेलिए ज़रूरीहै किआपकी जीवनशैली काफीसंयमित हो. शराब एवंसिगरेट कासेवन अन्यकैंसरों कीतरह गर्भाशयकैंसर केजोखिम कोभी बढ़ाताहै. संतुलितएवं पौष्टिकआहार लें. अत्यधिक वसायुक्तआहार सेपरहेज करें. इसके अलावाफिजिकल वर्कआउट भीबेहद ज़रूरीहै.
  
मानसिक सुरक्षा औरहम :
  कहतेहैं किमानसिक सुरक्षाउतना हीप्राकृतिक कार्य है, जितना किसुबह उठकरशरीर परकपड़े डालना, मोबाइल फोनकी बैटरीचेक करनाऔर यहदेखना किआपने अपनाटिकट एवंदैनिक खर्चके पैसेरख लिएहैं अथावानहीं. आपकीयात्रा मेंदेरी यापरेशानियां हों, लेकिन फिर भीयदि आपनेअग्रिम तैयारीकर रखीहै, तोआप खुदको असुरक्षितमहसूस करते हुए, दुर्घटनाओं से बचते हुए औरबिना किसीहड़बड़ी याजल्दबाजी केवहां पहुंचजाएंगे.
आज की भागदौड वालीज़िंदगी मेंआत्मसुरक्षाहर शख्सके लिएअत्यंत महत्वपूर्णकार्य हैऔर जबयह सुरक्षानकारात्मकता के विरुद्ध हो, तबतो काफीआवश्यक है. नकारात्मकता नामक गंदगी का हमारेबीच होनासोचने योग्यविषय है. लोगों केलिए यहतो काफीआसान हैकि वेअपना संतुलनबिगाड़ लेंऔर सोचनेलगें किउन्हें बाह्यनकारात्मक शक्तियां नियंत्रित कर रहीहैं यावे मानसिकआघात केशिकार हैं. उदाहरण स्वरूपदेखें, तोगुस्से कीअवस्था मेंलोग बड़ीमात्रा मेंनकारात्मकता उत्सर्जित करते हैं. साथही जबवे आपपर गुस्साहोते हैं, तो नकारात्मकऊर्जा कासंचार सीधेआपकी ओरकरते हैं. कई बारएक याअधिक लोगआपके बारेमें नकारात्मकसोच रखतेहैं औरशारीरिक रूपसे आपकेनज़दीक रहतेहैं, तबवे वातावरणको प्रभावितकरते हुएउसे नकारात्मकबना सकतेहैं. ज़्यादाशराब पीनेया नशेका सेवनकरने वालेलोगों केलिए यहसमस्या अतिगंभीर होसकती है. मानसिक मजबूतीके आधारपर इसऊर्जा काप्रभाव अलगअलग लोगोंपर भिन्नहो सकताहै.
बहुत से लोगोंका कहनाहै किमानसिक सुरक्षाकी कोईआवश्यकता नहींहै, परंतुयह मानाजाता हैकि जबआप खुदको ऊंचीअवस्था (खुशियोंकी अवस्था) में रखतेहैं, तोपूरे समयनकारात्मक शक्तियां आपको आकर्षित नहींकर पातीं. यह ऊंचीअवस्था भीमानसिक सुरक्षाका एकहिस्सा है. मानसिक सुरक्षाके ढेरसारे तरीकेहैं. अबयह आपपर निर्भरकरता हैकि आपकौनसातरीका अपनानाचाहते हैं. मानसिक सुरक्षाके कुछबुनियादी क़दमहैं, जैसेरोपण तकनीक, अपनी ऊर्जाजड़ों काविकास, जमीनीकार्य अपनानाएवं ध्यानलगाना अर्थातमेडिटेशन आदि. प्रार्थना एवं दृढ़ इच्छा शक्तिभी सकारात्मकऊर्जा केनिर्माण, अन्यसुरक्षा बढ़ानेऔर मानवऊर्जा प्रणालीके लिएरक्षा कीपरतें जोड़नेमें सहायकहै. प्रार्थनाके संदर्भमें देखें, तो कोईभी शख्सप्रार्थना मजबूती के लिए इनमेंसे किसीएक विधिका प्रयोगकरेगा. दृढ़इच्छा शक्तिके लिएयह सोचनाचाहिए किमेरे इर्दगिर्द स़िर्फप्यार कावास है, लोग मुझेबहुत पसंदकरते हैं, मेरी ऊर्जामजबूत होरही हैऔर निरंतरबढ़ रहीहै. ऐसाकरने सेऊर्जा एवंबचाव तकनीकविकसित होतीहै. जबभी किसीप्रतिज्ञा को लिखें, तो ध्यानरहे किउसे वर्तमानमें रखें, उसे प्रथमव्यक्ति कीसोच सेलिखें औरउसमें नकारात्मकतथ्य (नहीं, असंभव, नामुमकिनइत्यादि) काप्रयोग करें.

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