खुला पत्र प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी के नाम

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डॉ ओम शंकर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी  के असिस्टेंट प्रोफेसर होने के साथ साथ एक समाजसेवी भी हैं , हालाँकि समाजसेवी मेरा कहना है ,क्योंकि अगर आप उनसे मिलेंगे तो आप भी यही कहेंगे, और ये  बात उनके मरीज़ आपको ज्यादा बेहतर तरीके से बता सकतें हैं, लगभग 3 सालो से बनारस में AIIMS की मांग कर रहें हैं और वो इसके पीछे कारण भी बतातें हैं , जो आप उनके ब्लॉग पर यहाँ क्लिक करके पढ़ सकतें हैं , इन 3 सालो में उन्होंने क्या-क्या झेला, उनके आसपास रहने वाले लोग ही बता सकतें हैं जिसमे उनका 18 महिने का निलंबन भी शामिल है. उनकी ये मांग कई बार बनारस के अख़बारों में निकली और फिर पुरानी हो गयी , लेकिन फिर भी वो आज भी वही कोसिस कर रहें हैं के वाराणसी स्थित Sir Sunderlal Hospital (BHU) को AIIMS का दर्ज़ा दिया जाये, क्योंकि इस हॉस्पिटल पे पूर्वांचल की २५ करोड़ लोगों की स्वास्थ्य सेवाए निर्भर करती हैं.

 

अब बात ये रह जाती है के क्या उनकी बात सुनने के लिए नयी नरेन्द्र मोदी सरकार बहरी हो गयी है? और खास तौर पे ये सवाल तब और भी लाजमी हो जाता है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी खुद बनारस के सांसद है और उनकी छवि एक ऐसे पुरुष की है जो विकास की बात करतें है, और हमने उनका परिणाम भी देखा है उनकी उर्जा देखी है. मानतें है की पिछली सरकार ने उनकी नही सुनी लेकिन क्या नई सरकार भी ?
बनारस के कई लोगों ने सोंचा के नरेन्द्र मोदी साहब तो बनारस से ही चुने गए हैं और हम अपनी बात उनतक पंहुचा पाएंगे लेकिन 1.5 बितने के बात भी कोई परिणाम नही आया तो क्या?
कृपया निचे दिया गया उनका पत्र पढ़े और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ….धन्यवाद्.

सेवा में ,
श्री नरेंद्र मोदी महोदय,
सांसद वाराणसी,उत्तर प्रदेश

विषय: बी0 एच0 यू0,वाराणसी में एम्स की तर्ज पर “महामना इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस के निर्माण के सम्बन्ध में प्रस्ताव।

महाशय!
सविनय निवेदन है कि काशी जिनका आप इस समय संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं अनादि काल से ही इतिहास के सुनहरे पन्नों में धार्मिक और सांस्कृतिक
राजधानी के साथ-साथ चिकित्सा जगत की जननी के तौर पर दर्ज है। परंतु आज यहाँ की चिकित्सा सेवा बिलकुल चरमरा गयी है। महामना द्वारा स्थापित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित सर सुन्दर लाल चिकित्सालय ही आज यहाँ एक ऐसा चिकित्सालय उपलब्ध है जिनपर पूर्वांचल,पष्चिमी बिहार, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड और बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि नेपाल तक की 25 करोड़ जनता अपने उच्चतम
स्वास्थ सेवा के लिए निर्भर है।परंतु दुःख की बात ये है कि संसाधनों के आभाव में वर्तमान में ये चिकित्सालय अपेक्षित सेवा देने में पूर्णतया असक्षम है जिनके कारण पूर्वांचल और आसपास की जनता अपने विशिष्ठ इलाज के लिए पुरे देश के विभिन्न अस्पतालों में दर-दर की ठोकरें कहते फिर रहे हैं निन्म से कई तो रस्ते में ही अपना दम तोड़ देते है।
स्वास्थ और शिक्षा ऐसे दो आयाम हैं जिनके बगैर
कोई भी राष्ट्र अपने पैरों पर खडा नहीं हो सकता जैसा कि कोई भी व्यक्ति बिना पैरों के।इस सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है विश्व स्वास्थ संगठन 2008 का है जिनके हिसाब से इस दुनिया में प्रति वर्ष लगभग 10 करोड़ व्यक्ति इसलिए गरीब हो जाते हैं क्योंकि वो या उनके परिवार के किसी न किसी सदस्य को कोई न कोई गंभीर बीमारी अपनी चपेट में ले लेते हैं।
अतः अगर हमें इस देश के समग्र विकाश की
परिकल्पना को लेकर आगे बढ़ना है तो स्वास्थ को सबसे अहम् मुद्दा मानते हुए अपने संसदीय क्षेत्र काशी में एम्स दिल्ली से भी बेहतर “महामना इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस” की स्थापना के दिशा में जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करनी होगी।
अगर हम ये मानते हैं कि जहाँ भगवन राम का जन्म हुआ था वहां पर भगवान श्री राम जी का मंदिर बनना चाहिए तो फिर क्यों नहीं जहाँ पर चिकित्सा जगत की उत्पत्ति हुई थी वहां भगवन धन्वंतरि का मंदिर यानि “महामना इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल स एजेंसीज” यानि की एम्स वाराणसी का निर्माण होना चाहिए।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के अवसर पर महामना को इससे बड़ी कोई सच्ची श्रधांजलि नहीं हो सकती!

 

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आपका आभारी
डॉ ओम शंकर
असिस्टेंट प्रोफेसर
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
वाराणसी।

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