खास विवाह के लिए खास सजावट

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विवाह किसी की भी जिंदगी के लिए यादगार पल होता है जिसे वह सदा कक् लिए अपनी स्मृति में संजोकर रखना  चाहता है. लेकिन अब वो समय नहीं है रहा जब दूल्हा और दुल्हन कक् रिश्तेदार दोस्त मिलकर इस आयोजन की जिम्मेदारी संभालते थे. बदलते परिवेश में लोगों की जिंदगी में सबसे ज्यादा अभाव समय का है. आजकल दूल्हा और दुल्हन के परिवार वालों के लिए शादी का आयोजन आसान नहीं रह गया है. यह एक बडा और महत्वपूर्ण आयोजन होता है. शादी की भागदौड में थोडी सी भी मिस मैनेजमेंट के चलते कई बार ऐसी चूक हो जाती है,  जो पूरे आयोजन पर पानी फेर देती है. ऐसे में विवाह की तमाम तैयारियां सही समय पर बेहतर तरीके से करने में मैरिज प्लानर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है. लेकिन इसमें आपकी सुझबुझ, समझ और पसंद भी जरूरी है.
एप्स इवेंट की प्रीति कहती हैं कि आजकल हर वर्ग की शादियों में वेडिंग प्लानर्स की भूमिका अहम हो गई है. मध्यम वर्गीय परिवार भी इसमें पीछे नहीं है. जब दूल्हा दुल्हन दोनों कामकाजी हो या फिर जब क्रॉस कल्चर शादियां होती हैं तो लोग आमतौर पर प्लानर से शादी के बारे में सलाह लेते हैं. ऐसी शादियों में प्लानर इस बात को सुनिश्चित कर सकता है कि शादी में दोनों संस्कृतियो का रंग नजर आए. इसके अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग और थीम वेडिंग में भी प्लानर की अहमियत बढ़ जाती है. प्लानर्स के पास हर रेंज का पैकेज उपलब्ध होता है. ताकि हर वर्ग तक वो अपनी पकड बना सकें. प्रीति कहती हैं कि आमतौर पर कम से कम पांच लाख बजट का पैकेज रखा गया है. जिसमें शादी का स्थान बुक कराने से लेकर, फूलों की सजावट, टेंट, शादी का खाना, कैटरिंग, साउंड सिस्टम से लेकर आतिशबाजी आदि सभी कुछ शामिल हैं. इस अलावा आजकल थीम पर आधारित सजावट कक् साथ ही स्पेशल स्टेज आदि कई तरह की सुविधाएं भी दी जाती है. 
सजावट 
भारतीय शादियों में डेकोरेशन को खास तवज्जों दी जाती है. शादियो में रश्मों के अलावा फूलों की सजावट पर भी काफी ध्यान दिया जाता है. विवाह समारोह किसी पार्क में हो रहा है, या फिर फार्म हाउस या बैंक्वेट हॉल में, सभी जगह डेकोरेशन में फूलों का इस्तेमाल खूब किया जाता है. 
विवाह स्थल की सजावट 
विवाह स्थल को सजाने के लिए कट फ्लावर का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें भी देशी और विदेशी फूलों का इश्तेमाल समान रुप से किया जाता है. गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा, कारनेशन, गुलदावरी, जरबेरा के अलावा आॅर्किड, लिली और टयूलिप वगैरह का प्रयोग किया जाता है. हालांकि यह आपकक् बजट पर डिपेंड करता है कि आप किन फूलों की सजावट चाहते हैं. पहले एक ही तरह के फूलों से डेकोरेशन किया जाता था जबकि आजकल इसमें कई फूलों को मिक्स किया जाने लगा है. 
गेट की सजावट
सजावट वेडिंग प्लानर से ज्ञानेश कहते हैं कि विवाह में गेट की सजावट पर भी आजकल खास ध्यान दिया जाता है. गेट पर बुके स्टाइल में फूल लगाने का चलन इन दिनों बहुत बढ़ा है. समारोह स्थल के दरवाजे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए जाली बांधकर गेट पर फूलों के बुके लटकाए जाते हैं. इसके अलावा, गेंदे के फूलो की लड़ियां भी गेट पर बांधी जाती हैं. बुके की खूबसूरती बढ़ाने के लिए घास का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. 
थिम बेस्ड सजावट
आजकल थीम के हिसाब से फूलो की सजावट होती है. यानी राजस्थानी, रोमन, ओरिएंटल,मोरक्कन लुक भी काफी पसंद किया जा रहा है. इसके अलावा अलग अलग धर्म और संस्कृति के अनुसार भी विवाह की थीम रखी जाती है, उसी तरह के फूलों का उपयोग  किया जाता है. इसमें कलर्स का भी ध्यान रखा जाता है. अगर सारा मंडप पिंक बेस है, तो  फूल भी इसी रंग के होते हैं. दूसरा आजकल लोग फ्लॉवर्स स्ट्रक्चर्स यानी प्रॉप्स को 
भी खूब पसंद कर रहे हैं. ऐसे में पिलर, गेट, मंडप इत्यादि कपड़े कक् साथ फूलों से सजाए जाते हैं. अगर उसमें टेंपल थीम चाहिए तो उसमें कार्नेशन्स, गुलाब, गेंदे के फूलो के साथ लाल और नारंगी रंग के फूलो को सजाया जाता है. अगर मुगल या कुंदन हार थीम हो तो इसमें लिली और आॅर्किड के फूलों को सजाया जाता है.
बजट में हो सजावट 
फ्लावर अरेंजमेंट पैकेज की शुरूआत पंद्रह हजार से लाखों रुपये तक होती है. यह आपकी जेब पर डिपेंड करता है कि आप शादी में किस तरह के फूलों से सजावट करना चाहते हैं. फूल अलग अलग रेंज में उपलब्ध होते हैं. इनमें आॅर्किड थाइलैंड से आता है और इसका दाम 6 से 8 रुपये प्रति पीस है. इस फूल खूबी यह है कि यह देर तक ताजा रहता है. लंबी स्टिक वाले इस फूल का इस्तेमाल गेट की सजावट में ज्यादा होता है . लंबी स्टिक कक् कारण यह लटका रहता है, जो काफी खूबसूरत लगता है. अन्य इम्पोर्टेड फूल लिलियम है. यह फूल काफी महंगा होता है और यह लगभग 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मिलता है. अगर आप शादी की सजावट को कुछ अलग रंग देना चाहते हैं, तच् फिर आप बर्ड आॅफ पैराडाइज फूल का इस्तेमाल कर सकते हैं. पक्षी की चच्ंच की तरह के इस फूल की कीमत 20 रुपये प्रति पीस कक् आसपास है. आजकल शामियाने यानी टेंट में कारपेट के अगल-बगल फूलों के गमले लगाने का भी चलन है. वरमाला बनाने कक् लिए गुलाब, रजनीगंधा, गुलदावरी आदि का इस्तेमाल होता है.

कैटरर्स 

अच्छा और स्वादिष्ट खाना-पीना विवाह समारोह का अहम हिस्सा होता है. एप्स वेडिंग की प्रीति कहती हैं कि खाने में वेज और नॉनवेज दोनों ही तरह के डिसेज हम देते हैं. स्टार्टर के तौर पर अजकल लोग ओरिएंटल कुजीन चुनते हैं. इसमें ढेर सारा वैराइटी मिल जाता है. ग्राहकों की डिमांड के अनुसार हम हर स्टेट के कुछ खास कुजीन को भी अपने मेन्यू में रखते हैं. हम इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि हमारे लंच या डिनर का प्रेजेंटेशन पार्टी की थीम से भी मैच करता है. अगर किसी पार्टी का थीम अरेबियन है तो वहां हम दूसरी डिशेज के अलावा लेबनीज डिशेज भी सर्व करते हैं. 
कॉन्टिनेंटल डिसेज भी हैं पसंद 
आजकल की शादियों में पारंपरिक भारतीय व्यंजन के अलावा लोग कॉन्टिनेंटल डिशेज जैसे-थाई, पैन एशियन, जैपनीज और इटैलियन फूड को भी शामिल करना बहुत पसंद करते हैं.
मल्टी कुजीन ज्यादा पसंद  
वेडिंग प्लानर प्रीति कहती हैं कि शादियों में मल्टी कुजीन फूड भी पसंद किया जा रहा है. आजकल लोग ऐसा मेन्यू पसंद करते हैं, जिसमें कई तरह के व्यंजन शामिल हों. 
डेजटर्स
डेजटर्स के बिना खाना पूरा ही नहीं होता. इसमें किसी एक तरह का डेजर्ट रखने के बजाए कई तरह का डेजर्ट शामील करें. अलग अलग रेंज में अलग अलग डेजर्ट रखने से आपको ढेर सारा वैराइटी भी मिल जाएगी. इसके अलावा किसी खास महंगे डेजर्ट पर ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं होंगे. 
बजट
शादियों का खानपान काफी खचीर्ला होता है. इसलिए ऐसा मेन्यू चुनना चाहिए जो सभी को पसंद आए. मनीष कैटरिंग सर्विस से मनीष कहते हैं कि हमारे यहां मेन्यू में हर तरह का डिस उपलब्ध है. यह आप पर निर्भर करता है कि आप क्या चुनते हैं. 3.50 रुपए पर प्लेट से शुरू होकर 1200 सौ रुपए पर प्लेट तक हमारे यहां उपलब्ध है. 
वेन्यू 
वेन्यू का चयन गेस्ट की संख्या के आधार पर करना चाहिए. वेडिंग वेन्यू के तौर पर आजकल कम्यूनिटी हॉल, मैरिज हॉल, बैन्क्वेट हॉल और पार्क वगैरह का इश्तेमाल किया जाता है. एप्स इवेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की प्रीति कहती हैं कि अगर आप मेन शहर में वेन्यू का लोकेशन चुनते हैं तो यह आपको थोडा महंगा पड सकता है, लेकिन आप कई तरह के भागदौड से बच सकते हैं लेकिन दूसरी तरफ आाप आने जाने में वाहनों पर व्यय करने से भी बचेंगे. वेडिंग प्लानर संजीव कहते हैं कि कहते हैं कि बैंक्विट मेंडेकोरेशन का खर्च फार्महाउस या बड़े पार्क के मुकाबले 30 फीसदी तक कम होता है. पार्क, फार्महाउस में थीम वेडिंग की सजावट में 4-5 लाख रुपए का खर्च आता है वहीं बैंक्विट हॉल में यही खर्च 1.50 से 2 लाख रुपए तक होता  है. बैंक्विट मालिको के मुताबिक उनके वेंडर्स पहले से तय होते हैं और थीम लिए ज्यादातर सामान उनके पास ही होता है इसलिए खर्च कम हो जाता है. थीम वेडिंग का कॉन्सेप्ट भी आजकल जोरों पर है. ऐसे में बैंक्विट में लोग थीम के मुताबिक भी डेकोरेशन करवा रहे हैं. बैंक्विट में फ्लावर बेस थीम पर वेडिंग ज्यादा पसंद की जा रही हैं. इनमें एलईडी बेस्ड लाइट की मदद से कलर कॉम्बिनेशन तैयार किया जाता है. इंपर्च्टेड फूलच्ं की बेहतरीन क्वॉलिटी की वजह से आजकल जोड़े क्लासिकल लुक्स में शादी करना पसंद करते हैं. क्लासिकल में रॉयल और मुगल थीमहोती है और इसमें डेकोरेशन खर्च मॉडर्न थीम की तुलना में अधिक है. क्लासिक थीम में डेकोरेशन का खर्च 1.50 लाख से 2 लाख रुपए कक् बीच है, वहीं मॉडर्न थीम में 50 से 75 हजार रुपए का खर्च आता है. पार्क, फार्म हाउस में इसी डेकच्रेशन पर 4-5 लाख रुपए तक खर्च हच्ते हैं क्यच्ंकि ओपन स्पेस में जगह को भरना होता है और लाइटें भी अधिक लगती है. इसके अलावा मॉडर्न थीम में कलर, फ्लॉवर थीम चलन में है. कलर थीम में वाइट और गोल्डन लोग अधिक पसंद करते हें, इस थीम में बैंक्विट को लिली और आॅर्किड जैसे फूलों से सजाया जाता है. झूमर भी सफ़ेद और गोल्डन रंग में होते हैं. 

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