क्षेत्रीय फिल्में ज़्यादा इंज्वाय करती हूं: सीमा पांडे

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अभिनेत्री सीमा पांडे दर्जनों हिंदी फिल्मों में बतौर नायिका काम कर चुकी हैं. मस्ती, आगाज, तपिश, अनुभव, कुछ तुम कहो कुछ हम कहें उनकी कुछ चुनिंदा फिल्में हैं. टेलीविजन के ब़ढते प्रभाव को देखते हुए उन्होंने छोटे पर्दे की तरफ़ रुख किया. उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों सुराग, खोज, जय माता दी, मीरा, कुमकुम, सीआईडी शोभा सोमनाथ की और कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक रिश्तों से बड़ी प्रथा में भी काम किया. आजकल वह जीटीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल सपने सुहाने ल़डकपन के में दिखाई दे रही हैं. टेलीविजन के अलावा, वह क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में भी काफ़ी सक्रिय हैं. भोजपुरी, गुजराती और राजस्थानी फिल्मों में वह बतौर मुख्य नायिका काम कर रही हैं. सीमा ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी. इंटेल कंप्यूटर्स, ब्रिटानिया नूरी च्वाइस, मैक्डोनॉल्डस, लिबर्टी शूज, इनवर्टर वगैरह के एडवर्टिजमेंट में भी वह दिखीं. 

फैशन डिजाइनिंग की प़ढाई की आपने, फिर फैशन डिजाइनर क्यों नहीं बनीं.
हां, मैंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था, लेकिन अभिनेत्री बन गई. दरअसल, एक शो के दौरान मेरा वॉक कोरियोग्राफर्स को काफ़ी अच्छा लगा. उन्होंने मुझे मॉडलिंग के लिए ऑफर दिया, जिसे मैंने स्वीकार कर लिया. इसके बाद ऐडफिल्मों के ऑफर आए और फिर फिल्मों के.
आपने बॉलीवुड, क्षेत्रीय फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में भी काम किया है. इन तीनों में क्या फर्क पाया आपने.
तीनों ही माध्यमों में एक अभिनेत्री के रूप में मेहनत तो उतनी ही करनी पड़ती है. हां, तीनों में बजट को लेकर अलग-अलग क्राईटेरिया ज़रूर है. बॉलीवुड के बजाए क्षेत्रीय फिल्मों में बजट, फैसिलिटी और पैसे के साथ थोड़ा कंप्रोमाइज करना प़डता है. जहां तक मेरी बात है, तो मैं क्षेत्रीय फिल्में ज्यादा इंज्वाय करती हूं, क्योंकि मुझे वहां के कल्चर के बारे में बहुत क़रीब से जानने का मौक़ा मिलता है. मैंने कुछ समय पहले छत्तीसग़ढ की एक फिल्म की थी. तब मुझे वहां के गांव में जाने का मा़ैका मिला था. मैं वहां के लोगों से मिली. वहां का क्षेत्रीय डांस, वहां के गहने, कप़डे और जीवन देखा, जो मेरे लिए बिल्कुल अलग तरह का अनुभव था.
बतौर अभिनेत्री ग्लैमर वर्ल्ड में सर्वाइव करना कितना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि एक उम्र के बाद संभावनाएं काफ़ी कम तो हो ही जाती हैं.
यह सच है कि यहां काफ़ी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन आपके काम और मेहनत को यहां तवज्जो ज़रूर मिलती है. मेरे लिए रोल महत्वपूर्ण कभी नहीं रहा. मैने अपने करियर में हर तरह के रोल किए हैं. जो भी काम मुझे मिला है, मैंने उसे पूरी ईमानदारी से करने की कोशिश की. मैंने ख़ुुद को बांधकर नहीं रखा. मुश्किलें तब आती हैं, जब आप वक्त को थामकर रखना चाहते हैं. वक्त के साथ बदलाव स्वाभाविक है. अब मैं यह चाहूं कि आज से १० साल बाद भी मुझे नायिका का रोल मिले, तो यह मेरी बेवकूफी ही होगी. बदलाव स्वभाविक है. मुझे अभिनय से मतलब है, रोल मेरे लिए मायने नहीं रखता.
जीटीवी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक सपने सुहाने ल़डकपन के में आप राजीव और विहान की मां बनी हैं. क्या ख़ास है इस रोल में. 
हां, इस सीरियल में मेरा रोल राजीव और विहान की मां का है. यह रोल मेरे लिए काफ़ी चैलेंजिंग इसलिए था, क्योंकि अभी तक मैंने इतने लाउड कैरेक्टर वाला रोल नहीं किया था. यह मां कुछ अलग हट के है. लेकिन इस चैलेंज को मैंने स्वीकार किया, क्योंकि मैं हमेशा कुछ नया करने में विश्‍वास रखती हूं. मेरे लिए यह ख़ुशी की बात थी कि लोगों ने मेरे काम को सराहा.
आप एक बच्चे की मां हैं. आज के दौर में बच्चे का परवरिश काफ़ी मुश्किल है. एक कामकाजी महिला के लिए तो यह और बड़ी चुनौती है.
हां, आजकल के परिवेश में बच्चे की परवरिश थोड़ा मुश्किल ज़रूर हो गया है, लेकिन बच्चे को जो संस्कार दिया जाएगा वह वैसा ही बनेगा. आज के बच्चे पहले से ज़्यादा इनडिपेंडेंट हुए हैं. बच्चे को प्यार के साथ उसे उसकी ज़िम्मेदारी का अहसास भी दिलाना ज़रूरी है. हमेशा एक संतुलन बना कर चलें. आज की लाइफ स्टाइल काफ़ी फास्ट है, इसलिए बच्चे भी वक्त से पहले बड़े हो रहे हैं. ऐसे में उनसे जोर-जबरदस्ती करना ठीक नहीं. उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा दें. उनमें सेल्फ डिसिप्लिन की भावना का विकास करें.
ख़ुद को फिट रखना आपके प्रोफेशन की डिमांड है. आप ख़ुद को फिट कैसे रखती हैं.
मैं फिटनेश के लिए कुछ ख़ास नहीं करती. मैं स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही स्पोर्ट्स में काफ़ी एक्टिव रहती थी. नेशनल लेवल पर परफॉर्म भी किया है. यही वजह है कि आज भी मेरी बॉडी स्पोर्टी है. और वैसे भी अब मैं सप्ताह में पांच दिन नियमित तौर पर योग करती हूं. इसके अलावा, डायट पर ख़ास ध्यान देती हूं. पेय और फ्रुट्स ज़्यादा लेती हूं और बाहर खाने से परहेज करती हूं. इसके अलावा, भरपूर नींद भी लेती हूं.
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