कैंसर के रोकथाम के लिए सरकार हुई जागरूक

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कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। कोई भी कभी भी इसकी चपेट में आ सकता है। पूरी दुनिया में इस बीमारी से होने वाली मौतों का आकड़ा बेहद भयावह है। अभी तक इस बीमारी का कोई कारगर उपाय नहीं ढुंढा जा सका है।

राज्य सभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्रीपद येस्सो नाइक ने हाल ही राज्य सभा में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार मुख कैंसर के लिए पुरुषों और स्तन कैंसर के लिए महिलाओं को अधिक खतरा है। आईसीएमआर के आंकड़ों की माने तो 14.7 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर से पुरूषों की मृत्यु होती है। वहीं महिलाओं में गायनोलॉजिकल कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा 24.1 प्रतिशत, जबकि स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु का 16.3 प्रतिशत है। इसमें दुखद यह है कि भारतीय महिलाएं अपने स्वास्थ को लेकर जागरूक नहीं होतीं। कैंसर जैसी बीमारी के बारे में जागरूकता न होने के कारण वह तकलीफ सहती रहती हैं। जब तक वे डॉक्टर के पास जाती हैं या बीमारी के बारे में पता चलता है, लास्ट स्टेज तक पहुंच चुकी होती हैं। गायनोलॉकजकल कैंसर के अंतर्गत सर्वाइकल कैंसर, यूटेराइन कैंसर, ओवरीअन कैंसर, वल्वर कैंसर और वजायनल कैंसर आता है। ये कैंसर महिलाओं के पेल्विक रीजन की विभिन्न जगहों पर हो सकते हैं, जैसे पेट और हिप बोन्स के बीच, कहीं भी।

सिगरेट, सिगार, तंबाकू, एल्कोहल वगैरह के इस्तेमाल से माउथ कैंसर होता है। 25 फीसदी से ज्यादा माउथ कैंसर एल्कोहल के इश्तेमाल के कारण होता है। महिलाओं की तुलना में यह पुरुषों को ज्यादा होता है। आनुवांशिक कारण भी इसके लिए जिम्मेदार है। जिनकी फैमिली में किसी को माउथ कैंसर हो चुका हो, ऐसे लोगों को इस कैंसर का ज्यादा खतरा होता है। सन एक्सपोजकर के कारण भी यह कैंसर हो सकता है। मुख कैंसर में खाने पीने में असहनीय दर्द होता है और थकावट महसूस होती है।

हालांकि कैंसर यह किसी भी उम्र में हो सकता है। इससे होने वाली मृत्यु की दर विश्व में सबसे अधिक है। केंद्र और राज्य सरकारें कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन अभी भी इस जानलेवा बीमारी के निदान की दिशा में कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई है। सरकार द्वारा इस समय राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं हृदयघात कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत चलाया जा रहा है ताकि लोगों में कैंसर, उसकी रोकथाम और उपचार के बारे में जागरुकता पैदा हो। राज्य सरकारों को कार्यान्वयन के लिए कैंसर की जांच संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और कैंसर मरीजों को विभिन्न जांचों के लिए उपयुक्त स्थान पर भेजे जाने की व्यवस्था की गई है।

केंद्र सरकार ने 2013-14 में एनपीसीडीसीएस के तहत “त्रिस्तरीय कैंसर सेवा” योजना मंजूर की है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार देश के विभिन्न भागों में 20 राज्य में कैंसर संस्थान (एससीआई) और 50 त्रिस्तरीय कैंसर सेवा केंद्र (टीसीसीसी) बनाएगी। एससीआई के लिए राज्यों के हिस्से को समाविष्ट करते हुए अधिकतम सहायता 120 करोड़ रुपये और टीसीसीसी के लिए 45 करोड़ रुपये है। इसके लिए धन की उपलब्धता और योजना की दिशा-निदेर्शों के अनुसार फैसला किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में कैंसर का उपचार निशुल्क है। राज्य सरकारों के स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा कैंसर के निदान और उपचार के अलावा केंद्र सरकार के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, सफदरजंग अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, जेआईपीएमईआर पुदुचेरी, चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान कोलकाता जैसे संस्थानों में भी कैंसर के उपचार की सुविधा हैं। राष्ट्रीय आरोग्य निधि के अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे के मरीजों को वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा 2009 में राष्ट्रीय आरोग्य निधि के दायरे में स्वास्थ्य मंत्री कैंसर पीड़ित निधि का गठन किया गया, जबकि 27 क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों को सहायता दी जा रही है ताकि वे बीपीएल कैंसर मरीजों को तुरंत 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान कर सकें।

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