कभी दिल की भी तो सुनें

बदलते वक्त के साथ महिलाओं की जीवनशैली में कई तरह के बदलाव आए हैं। महिलाएं घर परिवार के लिए ज्यादा जिम्मेदार होती हैं। कहा भी गया है कि घर को घर महिलाएं ही बनाती हैं। वह हर जगह कुष्लतापूर्वक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं। इन जिम्मेदारियों को निभाने में कई बार उनमें तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा उनमें शराब और सिगरेट लेने का चलन भी इन दिनों काफी बढ़ा है। स्वास्थ्य विषेशज्ञों का मानना है कि इससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। अब तक माना जाता रहा है कि दिल की बीमारियां महिलाओं में कम ही होती हैं, लेकिन बदलते वक्त के साथ उनका दिल भी अब सुरक्षित नही रह गया है। आजकल महिलाओं में दिल की बीमारियां आम बात हो गई है। मेट्रो हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉक्टर पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि महिलाओं में रजोनिवृति से पूर्व एस्ट्रोजेन एवं प्रोजेस्ट्रॉन नामक दो हार्माेन्स बनने हैं। ये हार्मोंस हृदय रोगों से उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन रजोनिवृति के बाद उनमें भी हृदय रोगों का खतरा पुरुषों के बराबर ही बढ़ जाता है। आजकल 35 से 40 साल के बीच में भी महिलाओं में रजनोवृति होते हुए देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विषेशज्ञ कहते हैं कि वर्षों से महिलाओं को हृदय रोग के अभिशाप से मुक्त माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में हुये अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि दिल के रोग महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत जैसे विकासशील देश की तुलना में विकसित देशों की महिलाओं में हृदय रोग अधिक होते हैं और इसका कारण यह है कि वहां की महिलायें काफी पहले से पुरुषों की तरह तेज एवं व्यस्त जिंदगी जीती रही हैं। वहीं भारत में अधिकतर महिलायें आमतौर पर सिगरेट, शराब एवं नशीली वस्तुओं का बहुत कम सेवन करती हैं और नौकरी तथा व्यवसाय के दबाव एवं तनाव से मुक्त होती हैं, लेकिन आधुनिक समय में आर्थिक दबावों एवं अन्य कारणों से महिलायें घर के साथ-साथ दफ्तर की जिम्मेदारियां भी उठाने लगी हैं जिससे उन्हें पुरुषों की तरह बल्कि कई स्थितियों में उनसे अधिक तनाव एवं दबाव में रहना पड़ता है। ऐसे में यहां की महिलाओं के बीच हृदय रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है। हालांकि अभी भी हमारे देष की महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हृदय रोगों का कहर काफी कम है।

डॉ. पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि महिलाओं में रजोनिवृति से पूर्व एस्ट्रोजेन एवं प्रोजेस्ट्रॉन नामक दो हार्माेन उत्सर्जित होते हंै। ये हार्मोंस रक्त धमनियों में कालेस्ट्रॉल के जमाव को रोकते है। इसलिये रजोनिवृति के पूर्व महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा कम होता है। वह कहते हैं कि इस वजह से सामान्य महिलाओं के हृदय रोगों से ग्रस्त होने का खतरा पुरुषों की तुलना में चार गुना कम होता है, लेकिन कामकाजी और दषे की आदि रहने वाली महिलाओं में हृदय रोगों का प्रकोप अधिक होता है। अमेरिका में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कराए गए एक सर्वे के मुताबिक वहां हर नौ महिलाओं में से एक महिला को किसी न किसी प्रकार का हृदय वाहिका (कार्डियोवैस्कुलर) रोग होता है। रजोनोवृति की अवस्था पार कर लेने वाली हर चार महिलाओं में से एक महिला को यह रोग होता है तथा 65 साल से अधिक उम्र वाली दो महिलाओं में से एक महिला को यह रोग होता है। रजोनिवृति की अवस्था किसी महिला के जीवन का निर्णायक मोड़ होता है। हार्ट सर्जन डॉक्टर उपेंद्र कॉल कहते हैं कि रजोनिवृति के बाद महिला को कोरोनरी रोगों से बचाने वाले हार्मोन्स का बनना बंद हो जाता है जिससे उनके हृदय रोगों की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि अभी तक स्पष्ट तौर पर यह पता नहीं चला है कि एस्ट्रोेजेन और प्रोजेस्ट्रॉन किस तरह से कार्य करते हंै, लेकिन इतना साबित हो चुका है कि ये हार्मोन महिलाओं को हृदय रोगों की चपेट में आने से निश्चित रुप से बचाते हंै। डॉ. कौल बताते हैं कि रजोनिवृति के बाद एस्ट्रोजेन एवं प्रोजेस्ट्रॉन रुपी सुरक्षा कवच के उतर जाने के बाद महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने और उनके कोरोनरी समस्याओं से ग्रस्त होने की आशंका बढ जाती है, लेकिन जो महिलायें सिगरेट पीती हैं और गर्भ-निरोधक गोलियों का सेवन अधिक करती हैं उन्हें रजोनिवृति से पूर्व भी हृदय रोगों का अधिक खतरा होता है, क्योंकि इनसे उनके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक हो जाता है।

एक तरफ जहां पश्चिमी देशों में धूम्रपान की प्रवृति घट रही है, वहीं भारत सहित विकासशील देशों में पुरुषों और महिलाओं में धूम्रपान का प्रचलन बढ़ रहा है। इसके अलावा, फिजीकल एक्सरसाइज न करने के प्रवृति के कारण भी हृदय रोग बढ़ रहे हैं। जो महिलाएं फिजीकल एक्सरसाइज नहीं करती और प्रेगनेंसी पिल्स का इस्तेमाल करती हैं, धुम्रपान करती हैं और तनावपूर्ण जीवन जीती हैं। उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा 40 प्रतिशत अधिक हो जाता है। आम तौर पर भारतीय महिलाओं का उम्र के साथ वजन बढ़ता जाता है। औसतन भारतीय महिलाओं का वजन सामान्य वजन से करीब 20 प्रतिशत अधिक होता है। चिकित्सकों के अनुसार मोटापा और स्थूलता भी हृदय रोगों का एक बड़ा कारण है। भारतीय परिवारों में खान-पान में असली घी, तेल और मांस आदि पर अधिक जोर दिया जाता है। ये खाद्य पदार्थ मोटापा बढ़ाते हैं। इसके अलावा, महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर अवेयर भी नहीं होती और इलाज के लिए अस्पताल तभी आती हैं, जब उनमें रोग गंभीर हो चुका होता है। डॉ. उपेंद्र कहते हैं। जबकि विकसित देषों की औरतें अपने स्वास्थ को लेकर काफी अवेयर होती हैं। समय रहते बीमारी का पता लग जाने पर उनकी इलाज हो जाता है। डॉ. लाल कहते हैं कि गलत रहन-सहन के कारण महिलाओं में हृदय रोग आज गंभीर त्रासदी बनते जा रहे हंै। जैविक एवं शारीरिक कारणों से महिलाओं में हृदय रोग बहुत तेजी से बढ़ते हैं और इसलिये महिलाओं में हृदय रोगों के लक्षण प्रकट होने पर किसी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

               

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Shubha Shivam

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