एक साल में ही फिकी पड़ने लगी ब्रैंडिंग

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बनारस कला और संस्कृति के लिए भी पूरी दुनिया में जानी जाती है। अब तक यहां जितनी भी सरकारें रहीं, किसी ने भी यहां के विकास के लिए कुछ खास पहल नहीं की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तब यहां के लोगों में एक उम्मीद जगी थी कि बनारस अब विश्व स्तरीय शहर बन जाएगा। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनें एक साल से ज्यादा हो गया, अब यहां के लोगों को लग रहा है कि वादे वादे ही रह गए। यहां के लोग अब पुछ रहे हैं कहा है विकास। एक साल में मूलभूत समस्याओं के निवारण में भी यह सरकार असफल रही है।

क्या कहा था मोदी ने
मोदी ने काशी के लोगों से वादा किया था कि इसे जापान के सांस्कृतिक शहर क्योटो जैसा बनाएंगे। हालांकि यह संभव होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि किसी अन्य शहर की नकल की परिकल्पना को किसी दूसरे स्थान पर साकार करना मुश्किल ही है। दरअसल बनारस के लोगों की मानसिकता, जनसंख्या, क्षेत्रफल वगैरह क्योटो शहर की परिकल्पना को बनारस में साकार करने में मुश्किलात पैदा कर रही हैं। ऐसे में यहां के लोगों का कहना है कि मोदी जी समय और पैसा बर्बाद करने के बजाए बनारस को बनारस की तर्ज पर ही विकसित करें तो बेहतर हैं।

अस्सी की सफाई, अन्य घाट उपेक्षित
भारतीय जनता पार्टी पार्टी के नेता काफी सफाई पसंद हैं। बडेÞ नेता भी कभी भी खुद ही सफाई अभियान पर निकल पड़ते हैं। मोदी जी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे यहां केअस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर सफाई में में जुट गए, लेकिन अन्य घाट सफाई के लिए आज भी इंतजार कर रहे हैं। चूंकि बनारस की अस्सी काफी प्रसिद्ध है, तो वहां जिला प्रशासन ने सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम शुरू किया है, लेकिन और घाटें गंगा महल घाट, रीवा घाट और तुलसी घाट, राजा घाट, पांडेय घाट  प्रह्लाद घाट वगैरह बदहाल हैं। और मनमंदिर घाट समेत एक दर्जन से अधिक घाटों के सौंदर्यीकरण की कोई समग्र योजना अभी तक नहीं बन पाई है।

बुनकर कि किसी ने ना सुनी
बनारस साडियों और कालीन के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। सरकारें आई गई पर किसी ने यहां के बुनकरों की सुध नहीं ली। मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बनारस में बुनकरों के लिए बहुत कुछ करने की बात कही थी। उनमें एक आश की किरण जगी थी कि मोदी जी जरुर उनके लिए कुछ करेंगे, वो वादे किसी नेता के झुठे आश्वासन ही साबित हुए।

शहर की सफाई
सच तो यह है कि यहां अबतक छोटी छोटी समस्यओं का भी निवारण नहीं हो पाया है।  यहां काफी सारे सीवर्स के मेनहोल खुले हुए हैं। बनारस को स्वच्छ और साफ -सुथरा बनाने के लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की जरूरत है, लेकिन यहां एक ही प्लांट करसड़ा में है। वह भी बंद है।

मोदी जी कब मिलेगा रोजगार
जी हां अराजीलाइन ब्लॉक के गांव जयापुर की महिलाएं आजकल यहीं पुछ रही हैं। मोदी जी ने इस गांव को गोद लिया और इस गांव पर उनकी विशेष दया दृष्टि के तहत छह महीने के भीतर ही इस गांव में पीने का स्वच्छ पानी मिलने लगा।  बैंक खुल गए, सड़कें दुरुस्त हो गर्इं। हर परिवार को सोलर लैंप बांटा गया। दलितों के लिए अत्याधुनिक आवास बन गए। ी गांव में ‘कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र’ शुरू किया गया। महिलाएं कालीन बुनाई का प्रशिक्षण लेने लगीं। यहां के लोगों का कहना है कि केंद्र तो चल रहा है पर खानापूर्ति ही हो रहा है। जिस तरह के डिजाइनर कालीन की डिमांड मार्केट में है उस स्तर की ट्रेनिंग नही है। ट्रेनिंग ले चुकी महिलाओं के मन में आजकल मोदी जी से यही सवाल है, आखिर कब मिलेगा रोजगार।

दुनिया के सबसे बडी पार्टी बनने के लिए हर किसी को मिस्ड कॉल देकर पार्टी मेम्बर बनाने लिए भी भरतीय जनता पार्टी हंसी का पात्र बन रही है। हर ऐरा गैरा व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी से जुडकर खुद कार्यकर्ता बताता है। काफी सारे ऐसे लोग भारतीय जनता पाटीर् से जुड रहे हैं जिनकी व्यक्तिगत छवी खराब है और उनकी दवी के कारण पार्टी की छवी भी धूमिल हो रही है। ऐसे लोगों को पार्टी की विचारधारा से कोई सरोकार नहीं होता। वे महज अपनी नीजि हित पूरा करते हैं। ऐसे दलबइलू लोग जिस पाटीर् की सरकार हो उसी में जाने की होड में रहते हैं।

छल्ला गया सर सुंदर लाल चिकित्सालय को 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने से पहले बनारस की पहचान सर सुंदर लाल चिकित्सालय को एम्स बनाने को कहा था। यहां के डॉक्टर्स में तब काफी उत्साह जगा था क्यों कि वर्तमान में मरीजों के लिए उच्च स्तरीय व्यवस्था इस अस्पताल में नहीं है। लेकिन हमारी उम्मीदों पर तब पानी फिर गया जब इसे गोरखपुर ले जाने प्लानिंग चलने लगी। बनारस की जनता के साथ ही हम डॉक्टर्स भी छले गए।
डॉक्टर ओम शंकर
हÞृदय रोग विशेषज्ञ, सर सुंदर लाल अस्पताल

बैंडिंग में विशेषज्ञता हासिल है मोदी जी को 
भारतीय जनता पार्टी  की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। बनारस की पहचान लोग अस्सी घाट से समझते हैं। अस्सी घाट की सफाई की गई है, पर सफाई की समस्या का समाधान तब तक नहीं हो सकता जब तक इसक ा स्थाई बंदोस्त न किया जाए। साीवर का पानी सीधा गंगा में जाता है। ायहां मुख्य रूप से ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की आवश्यकता है। सडके अभी भी टूटी फूटी हैं। ज्यादातर यहां बीजेपी के ही सांसद रहे। स्वर्गीय राजीव गांधी ने यहां मृतकों को जलाने के लिए बिजली स्वचालित संयत्र लगवाया था, अब तक उसी से काम लिया जा रहा है। अब तक तो मोदी जी का विकास हवा में ही दिख रहा है।
शैलेंद्र मधुकर पांडे
स्टेट सेक्रेटरी, उत्तर प्रदेश 

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