आज कल के बच्चे काफी टैलेंटेड हैं – मंदिरा बेदी

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सोनी टीवी के सबसे लोकप्रिय रियलिटी शो इंडियन आइडल जूनियर का नया सीजन जून में शुरू होने वाला है. इंडियन आइडल के  जूनियर सीजन में मंदिरा ऐंकरिंग करती नज़र आएंगी और उनका साथ देंगे अभिनेता और एंकर करण वाही. इस सीजन के जज हैं विशाल, शेखर और श्रेया घोषाल. इससे पहले मंदिरा आ़िखरी बार स्टार प्लस पर म्यूजिकल शो को होस्ट करती नज़र आई थीं. कुछ समय पहले तक महिलाएं खेल जगत में नहीं दिखती थीं, लेकिन मंदिरा ने एक नया इतिहास रचा. वह फिल्ड में क्रिकेट कमेंट्री करती दिखीं. यह वाकई सुखद अनुभव था. हालांकि मां बनने के बाद उन्होंने ब्रेक ले लिया था, लेकिन एक लंबे अंतराल के बाद वह एक बार फिर से अपने अंदाज़ में इंडियन आइडल जूनियर को होस्ट करती नज़र आएंगी. कहते हैं कि मां बनना औरत को पूर्ण बनाता है. यह मंदिरा को देखकर वाकई सच लगता है. खुद को लाइमलाइट में रखने के लिए कभी हॉट फोटोशुट, तो कभी अजीबोगरीब स्टाइल रखने वाली मंदिरा आजकल सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चे के बारे में बातें करती हैं. उनकी बातें सुन कर यही लगता है कि वह चाहे कितनी भी बिंदास हों, लेकिन उनके अंदर भी एक मां का दिल है. मां का जज्बा है. वह अपनी बेबी को लेकर काफी पजेसिव हैं. वह इन दिनों मातृत्व का पूरा सुख उठा रही हैं. उन्हें हर बच्चे में अपना बेबी नजर आता है. शायद यही वजह है कि बच्चों के रियालिटी शो को होस्ट करने के लिए सोनी ने उन्हें चुना है. पिछले दिनों इंडियन आइडल जूनियर के ऑडिशन के लिए मंदिरा दिल्ली में थीं. पेश है चौथी दुनिया की संवाददाता प्रियंका तिवारी की उनसे हुई बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश:

इस सीजन में नया क्या है?
इंडियन आइडल का फॉर्मेट इस बार थो़डा अलग है. इस बार बच्चों को मौक़ा दिया गया है. यह शो अब एक ब्रांड बन गया है. दरअसल, जो बच्चे यहां तक पहुंचेंगे और सफल होंगे, वे बच्चे बेहद खास होंगे.

बच्चों के साथ शो करके कैसा लग रहा है?
मैं कुछ दिन पहले ही मां बनी हूं, इसलिए बच्चों के साथ शो कर के मुझे बेहद मजा आ रहा है. मैं उन्हें समझ सकती हूं, महसूस कर सकती हूं. मैं खुद एक मां हूं, इसीलिए अब बच्चों की साइकोलॉजी समझने लगी हूं. पहले जब कभी मैं पब्लिक प्लेसेज पर जाती थी और मां को बच्चे के साथ स्ट्रगल करते देखती थी, बच्चे को रोते हुए देखती थी, तो सोचती थी कि यह कैसी मां है जो अपने बच्चे को चुप नहीं करा सकती, लेकिन अब मेरा नजरिया बदल गया है, इसीलए अब मैं कहती हूं, मे आई हेल्प यू मैम.
 
ऑडिशन के दौरान अनुभव कैसा रहा ?
शो में सेलेक्शन के दौरान जजेज जोन अंदर होता है और पैरेंट्‌स बाहर प्लाज्मा स्क्रीन पर अपने छोटे चैंपियंस की परफॉर्मेंस देख रहे होते हैं. उन्हें देखकर वे न केवल स्माइल करते हैं, बल्कि एंज्वॉय भी करते हैं. तब मैं भी वैसा ही फील करती हूं. मेरा बेबी अभी छोटा है, अभी से ही मैं उसे महसूस करती हूं. सच कहूं, तो यकीन नहीं होता कि इतने छोटे बच्चे इतना अच्छा गा सकते हैं! दिल्ली में हमारे पास एक बहुत ही प्यारा बच्चा आया, उसकी आवाज़ का़फी अच्छी थी. वह सा़ढे पांच साल का था. चूंकि इस शो में 15 साल तक के बच्चों का सेलेक्शन होना है, ऐसे में वह कंपटीट नहीं कर पाया. लेकिन मुझे पता है कि वह आगे बहुत अच्छा करेगा. उसने बहुत अच्छा गाया, लेकिन अफसोस!  उसका सेलेक्शन अंतत: नहीं हुआ. ऐसी बहुत सारी अमेजिंग टैलेंट से हम रूबरू होते हैं. कई बार तो जजेज भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं.

आपको शो के लिए किस तरह की तैयारी करनी पड़ी?
मैंने शो के लिए किसी भी तरह की तैयारी नहीं की. मैं अच्छा गा नहीं सकती. जब मुझसे कोई गाने के लिए कहता है, तो मैं कहती हूं, माफ कर दो, मैं किसी को अपनी वीकनेस नहीं सुनाना चाहती. हालांकि एक ऐंकर के तौर पर आपकी एक पर्सनैलिटी होनी चाहिए, क्योंकि आपको यहां बच्चों के साथ रहना है. और यदि आपको उनसे इन्टरैक्ट करना है, तो उनके साथ आपको कंफर्टेबल होना ही पड़ेगा. इसके लिए किसी तैयारी की ज़रूरत नहीं. यदि आप बच्चों को प्यार नहीं करेंगे, तो आप ऐसा नहीं कर पाएंगे. हां, तैयारी की बात है, तो मेरी तैयारी यही है कि चूंकि अब मैं खुद भी मां बन चुकी हूं, इसलिए अब मैं खुद को बच्चों से रिलेट कर पाती हूं. शायद यही वजह है कि सोनी ने इस शो का ऑफर मुझे ही दिया. यही शो दो साल पहले हुआ होता, तो शायद मेरे बारे में वे सोचते भी नहीं.

शो में आए बच्चों को देख कर आपको क्या लगा?

बच्चे गॉड गिफ्टेड होते हैं. कई बार उनको देखकर ऐसा लगता है कि इतनी कम उम्र में इतना अच्छा गाना वाकई हैरत की बात है! लगता है जैसे ये बच्चे इस टैलेंट के साथ ही दुनिया में आए हैं. टैलेंट के साथ-साथ वे कड़ी मेहनत भी करते हैं. इस शो में जो बच्चे आए हैं, उनकी उम्र 12-13 साल ही है, लेकिन वे 3-4 साल की उम्र से संगीत सीखते रहे हैं. हर दिन कई सरप्राइजेज सामने आते रहते हैं. कई बार तो बच्चों का टैलेंट देखकर आखें नम हो जाती है.

इस तरह के शो पर आक्षेप भी लगते रहे हैं कि बच्चों पर अपने पैरेंट्स का का़फी दबाव होता है. इस बात में कितनी सच्चाई है ?
मैं इससे सहमत हूं कि माता-पिता अपने सपने को बच्चों पर थोपते हैं. कई बार इस बात का उन पर का़फी दबाव भी होता है, लेकिन यह ग़लत है. माता पिता को दबाव नहीं डालना चाहिए. इसे हार या जीत की भावना से नहीं लेना चाहिए. मां बाप को बच्चों की मासूमियत से नहीं खेलना चाहिए. ये बच्चे हैं. अभी तो उनकी ज़िंदगी शुरू हुई है. बहुत मौक़े मिलेंगे. दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है, जो ज़िंदगी में कभी असफल नहीं हुआ हो. फेल होना ज़िंदगी का अंत या दुनिया का अंत नहीं है.

आपकी स्लिम-ट्रिम काया का राज क्या है?
फिटनेस को लेकर का़फी कॉन्सस हूं. बेबी होने के दौरान मेरा वजन 22 किलो बढ़ गया था. बेबी के होने के बाद मैंने वजन कम किया. अब मैं जो भी पहनती हूं, वे सभी कपड़े मेरे शरीर पर फिट हो जाते हैं.

टीवी सीरियल कर के आपको कैसा लगा ?
डेली सोप ओपेरा शांति में मेरा किरदार था लीडिंग गर्ल शांति का. उस दौरान हमें सुबह नौ से शाम को छह बजे तक काम करना पड़ता था. सच तो यह है कि पूरे दिन में सिर्फ 3-4 सीन ही हो पाते थे. पहले एक-डेढ़ महीने का बैंक होता था, लेकिन मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस युग में सबकुछ कम समय में ही हो जाता है. अगर कल कोई एपिसोड प्रसारित होने वाला है, तो आज उसकी शूटिंग होती है और शाम को लिंकअप कर दिया जाता है.

इन दिनों क्या आप फिल्म और थिएटर कर रही हैं?
हां, इन दिनों मैं अभिनेता से निर्देशक बने अतुल अग्निहोत्री के साथ एक फिल्म कर रही हूं. अब तक  मुझे अधिकतर वे फिल्में मिलीं, जिनमें मेरी भूमिका बहन या मां की थी. मैं थिएटर से का़फी समय से जु़डी रही हूं और मैंने कुछ फिल्में भी की हैं, लेकिन अब मैं कुछ नया करना चाहती हूं.

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