अब महिलाएं भी होंगी कुशल ड्राइवर

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महिला हो या पुरूष कारों का शौक सभी को होता है, लेकिन कार चलाना काफी चुनौतिपूर्ण कार्य है। भारतीय सड़कों पर तो यह और भी मुश्किलों भरा है। हालांकि अब कारों में ऐसे सेफ्टी फिचर्स आ गए हैं जो आपके लिए न सिर्फ ड्राइविंग को आसान बना देंगे, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी ये वूमेन फ्रेंडली होंगे। अब की कारें मॉडर्न टेक्नोलॉजी से युक्त है। इसका फायदा खास तौर पर महिलाओं को होगा। ये फिचर्स ड्राइविंग को आसान बनाने के साथ ही महिलाओं को सुरक्षित भी रखेंगे। कार डिलर्स का कहना है कि कार खरीदते समय जहां युवा माइलेज पर ध्यान देते हैं, वहीं आॅटो मोबाइल में गर्ल्स की सबसे बड़ी डिमांड सेफ्टी फीचर्स की है। आॅटो वर्ल्ड में रोज नई-नई तकनीकआ रही हैं। जब आप कार खरीदने जाते हैं तो आपको कारों के ढेरों फिचर्स के बारें मेंं बताया जाता है। ऐसे में यह फैसला करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि कौन सा कार खरीदना आपके लिए फायेदमंद रहेगा। ऐसे में कार खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि ये फीचर्स कैसे और किस तकनीक पर काम करते हैं, जिससे आप अपने लिए सही कार का चुनाव कर सकें।

आजकल सभी रेंज की कारों में माइक्रोप्रोसेसर इंजन लगा होता है। इसके अलावा, आटो कंपनियां सेफ्टी के लिए एंटी लॉकिंग ब्रेकिंग सिस्टम, सिक्योरिटी सिस्टम, सेफ्टी एयरबैग दे रही हैं। हालांकि इसके नुकसान भी हैं। इन सुविधाओं से एक्सीडेंट का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में आॅटो कंपनियां इस कोशिश में हैं कि कैसे उपभोक्ता को आधुनिक सुविधाएं दी जाएं जो सुरक्षित भी हों। आॅटो निर्माता ऐसे विकल्प पर काम कर रहे हैं, जिनमें किसी स्मार्टफोन को कार के इन्फोटेनमेंट सिस्टम से जोड़ दिया जाता है। यह टच, आवाज या स्पीड सेंसर के जरिए काम करता है। जीपी मोटर्स के मनीष कहते हैं कि कंपनियां आजकल गाड़ियों में सेफ्टी फीचर्स पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। हर रेंज की गाडियों में लोगों की पहली डिमांड एडवांस सेफ्टी फीचर्स की है।

मॉडल कौन सा चुनें
गाड़ी चुनते समय देखें कि परफॉर्मेंस, मेंटेनेंस, रीसेल वैल्यू व आरामदायक सफर किस में है। अगर आपको शानदार सवारी करनी हो और बजट की कोई समस्या नहीं है तो आप होंडा सिटी जैसी लग्जरी कारों को भी चुन सकते हैं। अगर आपको स्मॉल कार खरीदनी हो तो इसमें डीजल कारों में फॉक्सवैगन की पोलो, इंडिका डी और पालियो डी आदि खरीद सकते हैं, जबकि डीजल सेगमेंट में इंडिका आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। वहीं पेट्रोल सेगमेंट में स्मॉल कार चुननी हो तो मारुति 800, इंडिका पेट्रोल सेंट्रो, आॅल्टो, वैगन आर, पालियो, गेट्ज, शेवरले एवियो, स्पार्क, मारुति स्विफ्ट, डिजायर वगैरह चुन सकते हैं।

आॅटोमेटिक या मैन्युअल ट्रांसमीशन
मैन्युअल ट्रांसमीशन की कारें सस्ती, शक्तिशाली और भरोसेमंद होती हैं, यह ड्राइव करने में भी काफी आरामदेह है। वहीं आॅटोमैटिक ट्रांसमीशन कार के शहरों में चलाना ज्यादा आसान है। इसकी कमी यह है कि आॅटोमैटिक ट्रांसमीशन की रिपेयर थोड़ी मुश्किल और महंगी होती है। इसके अलावा, इसमें मैन्युअल के मुकाबले 1.3 गुना अधिक ईंधन की खपत होती है।

फ्यूल पर बचत करें
कार खरीदते समय फ्यूल के बारे में सोचना भी जरूरी है। सीएनजी या एलपीजी वाहन अपना कर पैसे की बचत किया जा सकता है। साथ ही आप बेहतर माइलेज भी पा सकते हैं। आजकल शोरूम में कंपनी फिटेड सीएनजी या एलपीजी के साथ कारें आसानी से मिल जाती हैं। हालांकि कुछ गाड़ियों में बाहर से भी किट लगवाया जा सकता है।

एप्पल का आइज फ्री
टोयटा, होंडा और जीएम समेत कई आॅटो कंपनियां अपने वाहनों में एप्पल के सीरी वॉयस कमांड सिस्टम का इस्तेमाल करने जा रही हैं। एप्पल ने सीरी में आइज फ्री फंक्शन जोड़ा है, जिसके जरिए आई-फोन के बहुत से फीचर्स वॉयस कमांड से संचालित होंगे।

सेफ्टी फीचर्स है डिमांड में
टेलीमैट्रिक्स और नेवीगेशन सिस्टम
ग्राहकों में सबसे ज्यादा तीन टेक्नोलॉजी की डिमांड है- आवाज की पहचान, नेविगेशन सिस्टम और दुर्घटना की सूचना देने वाला आॅटोमेटेड सिस्टम। हालांकि नेविगेशन सिस्टम कार में लगे होते हैं, लेकिन इस अलग से भी लगवाया जा सकता है। मैप माय इंडिया रोड पायलट, भारत नाउ जेटा जेएन 7000, सैटस्की जीपीएस सिस्टम, टॉम-टॉम स्टार वार्स जीपीएस सिस्टम, पेनेट्रेट मोंट कुछ नेविगेशन सिस्टम हैं। नेविगेशन सिस्टम की सहायता से आप करीबी रेस्तरां, गैस स्टेशन और यहां तक कि फ्लाइट की जानकारी भी ले सकते हैं। आने वाले समय में गाड़ियों में टेक्स्ट पढ़ने की सुविधा भी होगी। आपको मोबाइल पर कोई मैसेज आता है, तो इस तकनीक की मदद से आप उसे सुन सकेंगे। इसी तरह ह्युंडाई का ब्लूलिंक सिस्टम आपकी आवाज को टेक्स्ट मैसेज में बदल देता है। वहीं आॅनस्टार और बीएमडब्लू असिस्ट आपको मेंटेनेंस संबंधी जानकारी भी देते हैं। मर्सिडीज बेंज एम्ब्रेस में एक डीलर-कनेक्ट बटन होता है जो सर्विस आॅपरेटर से आपका संपर्क बनाता है। सिस्टम द्वारा भेजी गई सूचना के आधार पर आॅपरेटर आपकी पसंद के डीलर से बात कर सर्विसिंग के लिए समय तय कर सकता है। वहीं ज्यादातर टेलीमैटिक्स सिस्टम चोरी होने पर कार का पता लगाने में मदद करते हैं। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस, अशोक लेलैंड अपनी गाड़ियों में टेलीमैट्रिक्स सुविधाएं दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भारत का नेविगेशन और टेलीमैटिक्स सिस्टम बाजार बढेÞगा। इसकेअलावा, टेलीमैटिक्स सिस्टम आपको कई तरह की मुश्किलों से बचाएगा। भूलवश अगर आपकी चाभी कार के अंदर रह जाए तो इसकी मदद से आप दरवाजा खोल सकते हैं। भीड़-भाड़ वाली पार्किंग में लाइट और हॉर्न से आप अपनी कार तक पहुंच सकते हैं।

स्मार्टफोन एप्लिकेशन
टेलीमैटिक्स सिस्टम पारंपरिक रूप से आपको कार चलाते समय विभिन्न सेवाओं के इस्तेमाल की सुविधा देता है, लेकिन अब ऐसे एप्लिकेशंस भी आ गए हैं, जिनके जरिए आप कार से दूर रहकर भी फीचर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप कार को लॉक करना भूल गए हैं, तो लॉक करने के लिए आपको कार के पास जाने की जरूरत नहीं है। आप इसे दूर से भी लॉक कर सकते हैं। आॅनस्टार का माइलिंक एप्लिके शन दूर से कार स्टार्ट करने की सुविधा देता है। ह्युंडाई का ब्लूलिंक भी रिमोट स्टार्ट की सुविधा देता है। बीएमडब्लू असिस्ट और मर्सिडीज बेंज एम्ब्रेस मैप आपको दिखा सकते हैं कि
आपकी गाड़ी कहां है।

एबीएस या ईबीडी सुरक्षित बनाए ड्राइविंग
ये दोनों फीचर्स आजकल काफी कारों में हैं। कार के अलावा ये फिचर्स कुछ बाइक्स में भी हैं। कुछ वक्त पहले तक ये फीचर्स सिर्फ महंगी कारों में ही आते थे। सेफ्टी के लिहाज से ये फीचर्स काफी महत्वपूर्ण हैं।

एबीएस
एबीएस यानी ऐंटिलॉक ब्रेकिंग सिस्टम। एबीएस न केवल अपनी कार्यप्रणाली, जैसे व्हील लॉकिंग में कारगर है, बल्कि ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल पर नियंत्रण रखते हैं। एबीएस का इस्तेमाल बर्फीले और फिसलन भरी रोड में ड्राइविंग को आसान बनाता है। यह कार के ब्रेक्स को पहियों के साथ लॉक होने या चिपकने से रोकता है। खास तौर पर जब गाड़ी खराब या फिसलन भरे रास्तों पर चल रही हो तो यह सिस्टम काफी कारगर साबित होता है।
यह सिस्टम न सिर्फ पहियों को लॉक होने से रोकता है, बल्कि अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में कार के बैलेंस को भी बनाए रखता है। बरसात में फिसलन भरी सड़कों पर अगर आप नॉर्मल स्पीड में भी ब्रेक लगाते हैं तो गाड़ी फिसलने लगती है। ऐसे में काफी धीरे-धीरे ब्रेक लगानी पड़ती हैं। इस स्थिति में एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है।

ईबीडी
ईबीडी यानी इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक-फोर्स डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम। यह एप्लीकेशन एबीएस की मदद करता है। एबीएस जहां ब्रेक को लॉक होने से बचाता है, वहीं ईबीडी कार में लगाए गए ब्रेक्स की पॉवर को सड़क की कंडिशन के मुताबिक चारों पहियों में डिस्ट्रिब्यूट करता है। अगर आप फिसलन भरी सड़क पर गाड़ी में ब्रेक लगाते हैं तो ईबीडी कार को अगले और पिछले पहियों के बीच ऐसे ब्रेक-फोर्स को बांटता है कि ड्राइवर का स्टियरिंग पर कंट्रोल बना रहेगा। अगर सड़क ज्यादा खराब है तो यह सिस्टम ब्रेक फोर्स को ऐसे विभाजित करता है कि जिस पहिए को जितनी फोर्स की जरूरत होती है, उसे उतना ही ब्रेक-फोर्स मिलता है।

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