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अनपढ़ शिक्षक , साक्षर सिपाही .

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सरकार केवल बेहतर शिक्षा की व्यवस्था कर दे तो गरीबों और उनकी गरीबी से जुडी आधी समस्या का समाधान अपने आप निकल जाएगा ..वगैर शिक्षा के किसी भी समाज, वर्ग का उत्थान संभव नहीं और ना ही सभी समाज की कल्पना की जा सकती है .शायद यहीं वजह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाने के अभियान पर काम शुरू किया . कक्षा एक से बारहवीं के लिए लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को कॉन्ट्रैक्ट पर २००५ से २०११ के बीच बहाल किया गया .बड़े पैमाने पर नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हदतक दूर हुई .सरकारी स्कूलों में छात्रों और छात्राओं का दाखिला अप्रत्याशित ढंग से बढ़ा .सरकारी स्कूलों में शिक्षक और छात्र नजर आने लगे और पठन पाठन का काम तेज गति से शुरू हुआ .
लेकिन धीरे धीरे शिक्षकों की पोल खुलने लगी .पता चला कि ऐसे लोग शिक्षक बहाल हो गए हैं जो खुद अशिक्षित हैं .उन्हें एक से लेकर तीस तक पहाडा याद नहीं . एप्पल और एजुकेशन और टीचर का सही स्पेलिंग भी नहीं पता .कोई एप्पल का स्पेलिंग ( apal) और एजुकेशन का स्पेलिंग ( ajukesan ) और टीचर का स्पेलिंग ( tichar) लिख रहा है . शिक्षकों की योग्यता का सही अंदाजा उनके इस जबाब से लग जाता है कि प्रतिभा पाटील आज भी देश की राष्ट्रपति हैं और स्मृति ईरानी बिहार की राज्यपाल हैं .गया डीएम के पास तबादले के लिए गई एक शिक्षक अनिता कुमारी ने डीएम के सवाल का जबाब देते हुए अपने अद्भूत ज्ञान का परिचय दिया . जवाब से हक्के बक्के डीएम ने टीचर की नियुक्ति की जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन अनीता कुमारी अकेली ऐसी टीचर नहीं हैं .बिहार में नियोजित शिक्षकों की बड़े पैमाने पर नियुक्ति में इसी तरह का घालमेल दीखता है .नियोजित शिक्षकों की योग्यता परीक्षा हुई तो ज्यादातर शिक्षक फेल हो गए. जब शिक्षकों की डीग्री की पड़ताल हुई तो पता चला कि हजारों फर्जी सर्टिफिकेट के आधार शिक्षक बन गए हैं .शिक्षा विभाग के अनुसार अभीतक बीस हजार से ज्यादा ऐसे फर्जी डीग्री वाले लोगों के शिक्षक बहाल हो जाने की बात सामने आ चुकी है .अबतक एक हजार से ज्यादा फर्जी डीग्री वाले शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं .

जब ऐसे शिक्षक इस तरह की उटपटांग शिक्षा बच्चों को देंगें तो फिर उनका भविष्य कैसा होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है .दरअसल शिक्षक बहाली के नाम पर डेढ़ लाख अशिक्षक बहाल कर दिए गए हैं .ये इतने अनपढ़ और प्रौढ़ हैं कि उन्हें अब ट्रेंड कर पाना मुश्किल है . ट्रेंड तो उसे किया जा सकता है जो कुछ पढ़ा लिखा हो .एक अनपढ़ को ट्रेंड कर शिक्षक कैसे बनाया जा सकता है ? शिक्षा विभाग फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर बीस पच्चीस हजार शिक्षकों को बर्खास्त भी कर दे तो क्या फर्क पड़ता है .बहाली के बाद आयोजित मेधा परीक्षा में तो मुश्किल से दस फीसदी शिक्षक ही सफल हुए हैं . क्या बाकि ९० फीसदी योग्य शिक्षकों को नौकरी से निकालना संभव है ? अगर नहीं तो क्या ये अनपढ़ ही हमारे बच्चों को साक्षर बनाने की जिम्मेवारी संभालेगें ? ये ऐसे अनुतरित सवाल हैं जिनका जबाब देना आसान नहीं है .बिहार में एक मामूली कांस्टेबल बनने के लिए ,जिसका काम डंडा चलाना है , लिखित परीक्षा देना अनिवार्य है लेकिन शिक्षक नियुक्ति के लिए किसी तरह की परीक्षा से होकर गुजरना जरुरी नहीं .कहीं आगे चलकर सरकार की योजना बिहार पुलिस के कांस्टेबल के पद पर बहाल लोगों को अध्यापन और अध्यापन के लिए बहाल शिक्षकों को कानून व्यवस्था के काम में लगाने की तो नहीं है ..
शिक्षा व्यवस्था को लेकर कभी लालू और नीतीश कुमार एक दुसरे पर जमकर चुटकियाँ लेते थे .नीतीश कुमार कहते थे – ” ये कलम का ज़माना है ,हम कलम में स्याही डालने का काम कर रहे हैं ,कुछ लोग आज भी लाठी का ज़माना लाना चाहते हैं इसलिए लाठी को तेल पिला रहे हैं “. लालू प्रसाद जबाब देते थे – ” मेरे जमाने में बच्चे स्कूल स्लेट लेकर आटे थे ,आज बच्चे स्लेट की जगह थाली लेकर स्कूल जा रहे हैं “.बड़े पैमाने पर अनपढ़ लोगों की बतौर शिक्षक बहाली को लेकर उठ रहे सवालों के बाद अब लोग एकबार फिर से नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के चुनाव पूर्व इन बयानों को याद कर उसके निहितार्थ समझने की कोशिश कर रहे हैं .

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