हार के बाद मायावती पर बड़ा खुलासा, बसपा की हार के लिए जिम्मेदार है ये ड्राइवर!

0
161

Mandate 2017: Why Mayawati's BSP was decimated in UPलखनऊ. उत्तर प्रदेश चुनाव में मिली करारी हार के बाद बहुजन समाज पार्टी में विद्रोह की शुरुआत हो गई है। एक बार फिर आरोप लगने लगे हैं कि मायावती को बसपा के बड़े नेता गुमराह कर रहे हैं। इस बार यह आरोप मायावती के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) गंगाराम अंबेडकर ने एक हिंदी वेबसाइट से बातचीत में लगाया है। अंबेडकर ने आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती ड्राइवर के कहने पर पूरी पार्टी चला रही हैं। मैं पार्टी में रहते हुए उनका नुकसान होता नहीं देख सकता। मैंने उनको रास्ते पर लाने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया है। आपको बता दें कि गंगाराम अंबेडकर ने बुधवार को मायावती के ओएसडी पद से इस्तीफा दिया था।

एक ड्राइवर चला रहा है पार्टी

गंगाराम अंबेडकर ने आरोप लगाया कि बहनजी और बहुजन समाज पार्टी को कोई और चला रहा है। हमने सिर्फ इसलिए इस्तीफा दिया है जिससे मायावती को इस बात का एहसास हो सके। आपको बता दें कि अंबेडकर ने बसपा महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्रा को मायावती का ड्राइवर बताया है। अंबेडकर ने कहा कि मायावती ने अपनी पार्टी एक ड्राइवर के भरोसे छोड़ दी है, लेकिन सतीश चन्द्र मिश्रा का बहनजी के मिशन से कोई वास्ता नहीं है। अंबेडकर ने कहा कि बहनजी पूरी तरह से उस ड्राइवर के ही कहने पर चलने लगी हैं। मायावती को इस बात का एहसास होना चाहिए कि यह ड्राइवर पार्टी को गलत रास्ते पर ले जा रहा है और इस ड्राइवर की वजह से ही यूपी चुनाव में बसपा की बुरी हार हुई है।

हफ्तों तक नहीं होती मुलाकात

अंबेडकर ने आरोप लगाया कि बहनजी के यहां 2 लोग ऐसे हैं जो हम जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने ही नहीं देते हैं। उन्हीं के लोगों ने बहनजी के आस-पास घेरा बना लिया है। ये दो-तीन लोग पूरी तरह से मायावती को भ्रमित कर रहे हैं। वो किसी दलित-पिछड़े व्यक्ति को राजनीति में नहीं लाना चाहते हैं। अंबेडकर ने कहा कि मैंने इसीलिए अपना इस्तीफा दिया है, जिससे मैं बहनजी तक ये संदेश पहुंचा सकूं कि हम अब भी 2019 जीत सकते हैं।

छोटे लोगों की नहीं कोई पूछ

अंबेडकर ने कहा कि बहनजी के यहां छोटे लोगों की कोई पूछ नहीं होती। हम बहनजी से हफ्तों तक नहीं मिल पाते। उन्होंने कहा कि पेड़ पर जब ज्यादा बगुले बैठने लगते हैं, तो बाग का माली छंटाई करता है या बगुलों का हटाता है। उसी तरह अब बहनजी को तय करना है कि वह बाग की छंटाई करनी है या बगुलों को हटाना है। क्योंकि मायावती को राय देने वालों को शायद यह नहीं पता कि हमारा मिशन क्या था। अभी भी समय है बहनजी को इस ओर सोचना चाहिए और तुरंत कुछ बड़े कदम उठाकर पार्टी को सही रास्ते पर लेकर आना चाहिए।

मायावती को हुआ सबसे बड़ा नुकसान

दरअसल इस बार के यूपी विधानसभा चुनावों में सबसे ज्‍यादा नुकसान मायावती को ही हुआ है। हालांकि मायावती ने पार्टी के खराब प्रदर्शन पर कहा कि यह गले से उतरने वाली नहीं है। उन्‍होंने ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका की बात भी कही है। हालांकि इस बार के नतीजे बताते हैं कि बीएसपी के उभार के बाद से यह उसकी सबसे करारी हार है। वैसे बसपा का इस तरह की हार का सिलसिला 2012 से शुरू हुआ है और तब से बदस्‍तूर जारी है। इस बार मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के तहत 100 मुस्लिम प्रत्‍याशियों को टिकट दिया था लेकिन चुनाव परिणाम बताते हैं कि उनका यह फॉर्मूला नहीं चला है।

एक मंच पर थे ब्राह्मण और दलित

मायावती की राजनीति दलित और पिछड़ों पर आधारित है। पूरे प्रदेश में सिर्फ दलित वोटर्स की संख्या 20 प्रतिशत के करीब है। 2007 में मायावती की जीत में दलित, अति पिछड़ा और ब्राह्मण वोटर्स का अहम रोल था। 2007 में मिली जीत के बाद मायावती को सोशल इंजीनियरिंग का मास्टर कहा जाने लगा। इसमें ब्राह्मणों और दलितों को एक मंच पर मायावती ने लाने का काम किया था।

Loading...
loading...

Leave a Reply